अम्बिकापुर: बटईकेला आंगनबाड़ी भवन निर्माण विवाद पर जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
अम्बिकापुर, 13 जून 2026: सरगुजा जिले के बतौली तहसील अंतर्गत ग्राम बटईकेला में आंगनबाड़ी भवन निर्माण को लेकर उपजे विवाद और इच्छा मृत्यु की मांग वाले आवेदन पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच कराई, जिसमें कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
जांच प्रतिवेदन: क्या है जमीन की सच्चाई?
प्रशासन द्वारा कराए गए मौका निरीक्षण और पटवारी जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि ग्राम बटईकेला स्थित खसरा क्रमांक 1784 पूरी तरह से शासकीय मद की भूमि है। जांच प्रतिवेदन में यह पुष्टि की गई है कि उक्त भूमि पर आंगनबाड़ी भवन का निर्माण विभागीय स्वीकृति के आधार पर ग्राम पंचायत द्वारा ही कराया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, आवेदिका द्वारा जिस भूमि को निजी कब्जे की भूमि बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई थी, वह राजस्व अभिलेखों के अनुसार सरकारी संपत्ति है। इसके अतिरिक्त, यह भी पाया गया कि आवेदिका के परिवार के पास ग्राम बटईकेला और ग्राम महेशपुर में पहले से ही पृथक खातों में भूमि दर्ज है।
शासकीय स्थल पर ही हो रहा निर्माण
जांच के दौरान एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि इस स्थल पर पहले भी एक आंगनबाड़ी भवन निर्मित था। वर्तमान में उसी पुराने भवन को हटाकर उसी स्थान पर नवीन भवन का निर्माण किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि यह निर्माण कार्य पूरी तरह से निर्धारित शासकीय स्थल पर ही जारी है, इसमें किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अनियमियता नहीं पाई गई है।
कानूनी प्रक्रिया: छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत कार्रवाई
आवेदन में जिन व्यक्तियों के विरुद्ध शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के आरोप लगाए गए थे, जिला प्रशासन ने उस मामले की भी बारीकी से जांच की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध तथ्यों और शिकायत के परीक्षण के बाद, संबंधित प्रकरण को तहसील न्यायालय में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 के अंतर्गत पंजीबद्ध कर लिया गया है। अब इस मामले में विधिसम्मत और कानूनी कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
धारा 248 का महत्व: यह धारा शासकीय भूमि पर अनधिकृत कब्जा करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई और बेदखली का अधिकार राजस्व अधिकारियों को प्रदान करती है।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
जिला प्रशासन ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें यह कहा गया था कि इस मामले में कार्रवाई नहीं की जा रही है। प्रशासन ने दोहराया है कि शासकीय भूमि से संबंधित शिकायतों और अतिक्रमण के सभी प्रकरणों पर नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है और किसी भी नागरिक को कानून हाथ में लेने की आवश्यकता नहीं है।













