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नवाचार और आधुनिक तकनीक से बदली खेती की तस्वीर: मक्के की खेती से बढ़ा मुनाफा





नवाचार और आधुनिक तकनीक से बदली खेती की तस्वीर: बिराज विश्वास ने मक्के की खेती से बढ़ाया मुनाफा

नवाचार और आधुनिक तकनीक से बदली खेती की तस्वीर: बिराज विश्वास ने मक्के की खेती से बढ़ाया मुनाफा

प्रदेश खबर नेटवर्क | ग्राम सरगांवा

कृषि में नवाचार, आधुनिक तकनीक और फसल विविधीकरण को अपनाकर ग्राम सरगांवा के उन्नत कृषक बिराज विश्वास ने खेती को घाटे के सौदे से निकालकर मुनाफे के व्यवसाय में बदल दिया है। पारंपरिक धान की खेती में लगने वाली अत्यधिक मेहनत और कम मुनाफे को देखते हुए बिराज ने मक्के की खेती का रुख किया और आज वे ’नैनो उर्वरकों’ के उपयोग से बंपर पैदावार ले रहे हैं।

फसल चक्र में बदलाव से बढ़ी आय

बिराज विश्वास बताते हैं कि उनके पास कुल 7 एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने पिछले चार सालों से धान की फसल लेना बंद कर दिया है। इसके स्थान पर वे अब मक्के की खेती कर रहे हैं। वे आधुनिक तरीके से ट्रैक्टर से खेतों की जुताई कर कतारबद्ध तरीके से उन्नत किस्म के बीजों की बुआई करते हैं। मक्के की खेती में धान की अपेक्षा लागत और मेहनत दोनों कम लगती है। वर्तमान में वे एक ही वर्ष में मक्के की तीन फसलें ले रहे हैं, जिनमें से एक फसल कच्चे भुट्टे के रूप में और शेष दो दाने के रूप में बाजार में बेची जाती है। इसके अतिरिक्त वे अपनी कुछ जमीन पर सब्जियों की भी खेती कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।

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जैविक खाद और नैनो उर्वरकों का सफल प्रयोग

बिराज अपनी खेती में रासायनिक खादों का प्रयोग कम से कम करते हैं। वे भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए मुख्य रूप से गोबर की खाद और मुर्गी पालन से प्राप्त जैविक खाद का उपयोग करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने ’नैनो खाद’ को भी अपनी खेती का अहम हिस्सा बना लिया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने जो नैनो खाद निकाला है, वह बहुत ही बेहतरीन है। पहले वे भी इसके प्रति आशंकित थे, लेकिन पिछले एक साल से इसके उपयोग के बाद शानदार परिणाम मिले हैं। बिराज के अनुसार, दानेदार डीएपी या अन्य खाद 15-20 दिनों में मिट्टी के नीचे चले जाते हैं जिससे पौधों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता, लेकिन नैनो खाद का स्प्रे करने से पौधों को तुरंत और संपूर्ण खुराक मिल जाती है।

किसानों से अपील: जलभराव रहित क्षेत्रों में करें मक्के की खेती

बिराज ने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी धान के मोह से बाहर निकलकर मक्के की खेती करने की सलाह दी है। उन्होंने सुझाव दिया है कि जिन खेतों में पानी का ठहराव नहीं होता, वहां मक्का एक बेहतरीन विकल्प है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि बुआई के समय पारंपरिक पोटाश और डीएपी का कम से कम उपयोग करें और फसल वृद्धि के लिए ’नैनो उर्वरक’ के स्प्रे को अपनाएं, ताकि खेती की लागत घटे और मुनाफा बढ़े।

छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं और कृषि में आधुनिक नवाचारों का लाभ उठाकर ग्राम सरगांवा के बिराज विश्वास आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक सफल मॉडल बनकर उभरे हैं।


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