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छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सदन में प्रस्ताव पेश करेंगे। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष अपनी-अपनी बात रखेंगे।

राज्य गठन के बाद यह विधानसभा में किसी सरकार के खिलाफ लाया गया 10वां अविश्वास प्रस्ताव है। इससे पहले 9 बार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो चुकी है, लेकिन एक भी सरकार नहीं गिरी। विधानसभा के इतिहास में सबसे लंबी बहस 2015 में तत्कालीन डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई थी, जो 24 घंटे 25 मिनट तक चली थी।

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अविश्वास प्रस्ताव का मकसद केवल सरकार गिराना नहीं होता। विपक्ष इस बहस के जरिए सरकार के पूरे कार्यकाल के कामकाज पर सवाल उठाता है। सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां गिनाता है और विपक्ष के आरोपों का जवाब देता है। चर्चा के बाद अगर मत विभाजन की स्थिति होती है, तब मतदान होता है। अगर सरकार के पक्ष में बहुमत रहता है तो प्रस्ताव स्वत: गिर जाता है। कई बार ध्वनिमत से ही फैसला लिया जाता है।

इस बार कांग्रेस नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और विभिन्न प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं भाजपा सरकार अपनी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक उपलब्धियों का पक्ष रखेगी।

विधानसभा में बीजेपी के 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 35 सदस्य हैं। 1 विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के हैं। ऐसे में संख्या बल बीजेपी के पक्ष में है। यही वजह है कि प्रस्ताव का राजनीतिक महत्व अधिक है, जबकि गणित सरकार के पक्ष में दिखाई देता है।

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