कानपुर देहात के प्राइमरी स्कूल का एक छात्र माधव मिश्रा स्कूल प्रशासन से परेशान होकर अपनी शिकायतें पुलिस चौकी करने पहुंचा। वहां उसने कहा – मैडम फोन देखती रहती हैं… बड़े बच्चे मारते-पीटते हैं… शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नहीं होती।” जब एक छोटा बच्चा अपनी समस्या लेकर पुलिस चौकी पहुंचने को मजबूर हो जाए, तो सवाल सिर्फ एक स्कूल पर नहीं, पूरी व्यवस्था पर खड़ा होता है।
क्लास में किताबों की जगह मोबाइल
शिक्षक बच्चों के भविष्य की नींव रखते हैं, लेकिन अगर कक्षा में किताबों की जगह मोबाइल और अनुशासन की जगह लापरवाही हो, तो फिर सरकारी शिक्षा का भविष्य कौन संभालेगा?

















