गरियाबंद में खरहरी-कोचबाय मार्ग पर जानलेवा गड्ढा, हादसे को न्योता दे रही क्षतिग्रस्त पुलिया
गरियाबंद। दिलीप नेताम, गरियाबंद।जिले के अंतर्गत ग्राम पंचायत कोचबाय और खरहरी के बीच सड़क किनारे इन दिनों एक बड़ा और खतरनाक गड्ढा ग्रामीणों तथा राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। सड़क के किनारे पुलिया के आसपास की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस स्थान की मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में यहां गंभीर सड़क हादसा हो सकता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कोचबाय और खरहरी के बीच यह मार्ग आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रास्ता है। प्रतिदिन इस सड़क से दोपहिया, चारपहिया वाहन, छोटे मालवाहक वाहन और ग्रामीणों का आवागमन होता है। ऐसे में सड़क किनारे बना गहरा गड्ढा और क्षतिग्रस्त पुलिया वाहन चालकों के लिए लगातार खतरा बनी हुई है।
सड़क किनारे बना गड्ढा बना परेशानी का सबब
ग्रामीणों के अनुसार, पुलिया के आसपास सड़क का हिस्सा कमजोर होकर धीरे-धीरे धंसता जा रहा है। बारिश के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। पानी भरने के कारण गड्ढे की वास्तविक गहराई और स्थिति वाहन चालकों को दिखाई नहीं देती, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है।
विशेषकर रात के समय इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पर्याप्त रोशनी और चेतावनी संकेत नहीं होने की स्थिति में अचानक सामने आने वाले गड्ढे से वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह खतरा और भी अधिक गंभीर माना जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार वाहन चालक अचानक गड्ढा देखकर बचने का प्रयास करते हैं। ऐसी स्थिति में वाहन सड़क से नीचे उतर सकता है या सामने से आने वाले वाहन से टकराने का खतरा पैदा हो सकता है।
बारिश के बाद बढ़ी समस्या
बरसात के मौसम में सड़क और पुलिया के आसपास पानी जमा होने से समस्या और बढ़ गई है। पानी के लगातार बहाव के कारण मिट्टी के कटाव की स्थिति भी दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का दावा है कि यदि पानी की निकासी और पुलिया के आसपास की संरचना को तत्काल मजबूत नहीं किया गया तो सड़क का किनारा और अधिक क्षतिग्रस्त हो सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शुरुआत में यदि छोटी-मोटी मरम्मत कर दी जाती तो समस्या इतनी गंभीर नहीं होती। लेकिन समय पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण अब स्थिति धीरे-धीरे बड़ी समस्या का रूप लेती जा रही है।
पुलिया निर्माण की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
क्षतिग्रस्त पुलिया को लेकर स्थानीय ग्रामीण निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान यदि निर्धारित मानकों और गुणवत्ता का सही तरीके से पालन किया गया होता तो पुलिया की स्थिति इतनी जल्दी खराब नहीं होती।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। निर्माण की गुणवत्ता, लागत, तकनीकी मानकों और कार्य की वास्तविक स्थिति की जांच संबंधित विभाग या सक्षम एजेंसी द्वारा किए जाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर पुलिया की स्थिति का तकनीकी परीक्षण कराए। साथ ही यह भी देखा जाए कि निर्माण कार्य किस योजना के तहत कराया गया था, इसकी लागत कितनी थी और निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन किया गया या नहीं।
पंचायत और प्रशासन से ग्रामीणों की उम्मीद
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुलिया जैसी बुनियादी सुविधाएं सीधे तौर पर आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ी हुई हैं। यदि सड़क के किनारे बड़ा गड्ढा बन गया है और पुलिया का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो रहा है तो संबंधित पंचायत तथा प्रशासन को इसकी तत्काल जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि किसी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था करना जरूरी है। गड्ढे के आसपास अस्थायी बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और रात में दिखाई देने वाली सुरक्षा व्यवस्था की जा सकती है। इसके बाद स्थायी रूप से पुलिया और सड़क की मरम्मत कर समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।
राहगीरों के लिए बढ़ता खतरा
इस मार्ग का उपयोग करने वाले राहगीरों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि गड्ढा सड़क के किनारे होने के बावजूद वाहन चालक को अचानक इसके बारे में पता चलता है। बारिश के दौरान पानी भर जाने से गड्ढे की गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।
दोपहिया वाहन चालक यदि अचानक गड्ढे से बचने के लिए वाहन मोड़ते हैं तो पीछे या सामने से आ रहे वाहन से टक्कर की संभावना बन सकती है। वहीं चारपहिया वाहन का पहिया गड्ढे में जाने से वाहन क्षतिग्रस्त होने की संभावना भी बनी रहती है।
ग्रामीणों के अनुसार, यह केवल सड़क की खराब स्थिति का मामला नहीं है, बल्कि लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।
रात में सबसे अधिक खतरा
दिन के समय किसी तरह वाहन चालक गड्ढे को देखकर बचने का प्रयास कर सकते हैं, लेकिन रात में स्थिति काफी खतरनाक हो जाती है। यदि सड़क पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं है तो वाहन चालक को गड्ढा दिखाई देने में देर हो सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर रात में आने-जाने वाले लोगों के लिए तत्काल चेतावनी संकेत लगाया जाना चाहिए। जब तक पुलिया की स्थायी मरम्मत नहीं होती, तब तक प्रशासन को अस्थायी सुरक्षा उपाय करने चाहिए।
हादसा होने से पहले हो कार्रवाई
स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी मांग यही है कि प्रशासन किसी हादसे का इंतजार न करे। उनका कहना है कि अक्सर सड़क की समस्या तब गंभीर मानी जाती है जब कोई दुर्घटना हो जाती है। लेकिन यदि किसी स्थान पर पहले से खतरा दिखाई दे रहा है तो उसे दुर्घटना से पहले ही ठीक करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करें और जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई करें।
निर्माण की जांच की उठी मांग
ग्रामीणों के बीच पुलिया निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों को देखते हुए निर्माण कार्य की जांच की मांग भी सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि यदि पुलिया का निर्माण हाल के वर्षों में हुआ है और इसके बावजूद वह तेजी से क्षतिग्रस्त हो रही है, तो इसकी तकनीकी जांच जरूरी है।
जांच में निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, कार्य की गुणवत्ता, स्वीकृत राशि, तकनीकी स्वीकृति और निर्माण एजेंसी की भूमिका सहित अन्य बिंदुओं की जांच की जा सकती है।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग भी ग्रामीणों ने की है।
ग्रामीणों ने रखी ये प्रमुख मांगें
कोचबाय और खरहरी के बीच क्षतिग्रस्त पुलिया एवं सड़क किनारे बने गड्ढे को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं।
पुलिया और सड़क का तत्काल निरीक्षण कराया जाए।
खतरनाक गड्ढे की तत्काल मरम्मत कराई जाए।
पुलिया के क्षतिग्रस्त हिस्से को मजबूत किया जाए।
बारिश के पानी की उचित निकासी की व्यवस्था की जाए।
जब तक स्थायी मरम्मत नहीं होती, तब तक बैरिकेडिंग की जाए।
रात में वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए चेतावनी संकेत लगाए जाएं।
पुलिया निर्माण की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जाए।
निर्माण कार्य की लागत और तकनीकी मानकों की जांच की जाए।
भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्थायी समाधान किया जाए।
ग्रामीणों में नाराजगी
लंबे समय से समस्या का समाधान नहीं होने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी भी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि सड़क और पुलिया का उपयोग प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण करते हैं। इसके बावजूद यदि इतनी गंभीर स्थिति पर संबंधित विभाग का ध्यान नहीं जाता तो यह चिंता का विषय है।
ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। उनका कहना है कि सड़क की मरम्मत केवल आवागमन को आसान बनाने के लिए नहीं बल्कि लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।
दुर्घटना की स्थिति में कौन होगा जिम्मेदार?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते गड्ढे और पुलिया की मरम्मत नहीं की गई और भविष्य में यहां कोई गंभीर दुर्घटना होती है, तो जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी होगा। इसलिए उनका आग्रह है कि संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर समस्या का तत्काल समाधान करें।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन के पास सड़क एवं पुलिया की स्थिति सुधारने के लिए आवश्यक संसाधन और विभागीय व्यवस्था मौजूद है। जरूरत केवल समय पर कार्रवाई करने की है।
प्रशासन के निरीक्षण का इंतजार
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोगों को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर पुलिया और गड्ढे की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करेंगे और आवश्यक मरम्मत कार्य शुरू कराया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कदम उठाया गया तो किसी संभावित दुर्घटना को टाला जा सकता है। लेकिन यदि समस्या को नजरअंदाज किया गया तो बारिश के दौरान सड़क और पुलिया की स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी रहेगी।
गरियाबंद जिले के ग्राम पंचायत कोचबाय और खरहरी के बीच सड़क किनारे बनी क्षतिग्रस्त पुलिया और खतरनाक गड्ढा इस समय स्थानीय लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। बारिश के कारण गड्ढे में पानी भरने और सड़क के किनारे कटाव होने से खतरा और बढ़ गया है।
ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है कि प्रशासन दुर्घटना होने का इंतजार किए बिना तत्काल मौके का निरीक्षण करे। पुलिया की तकनीकी जांच, सड़क की मरम्मत, पानी की निकासी और सुरक्षा संकेतक लगाने जैसे कदम तत्काल उठाए जाने चाहिए।
साथ ही यदि निर्माण की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं तो संबंधित विभाग द्वारा निष्पक्ष तकनीकी जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए। इससे न केवल वर्तमान समस्या का समाधान होगा, बल्कि भविष्य में सरकारी राशि से निर्मित सड़क और पुलिया की गुणवत्ता को लेकर भी जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।
अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों की शिकायत और मांग पर संबंधित विभाग कब तक कार्रवाई करता है और कोचबाय-खरहरी मार्ग पर बने इस खतरनाक गड्ढे तथा क्षतिग्रस्त पुलिया को कब तक सुरक्षित बनाया जाता है।













