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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा रिटायर हो गए

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा रिटायर हो गए। हाईकोर्ट में आयोजित फेयरवेल पर चीफ जस्टिस सिन्हा बेहद भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि अदालतें केवल ईंट, पत्थर और कंक्रीट से निर्मित संरचना नहीं है, बल्कि यह वह स्थान है जहां नागरिक अपनी आशाओं और न्याय व्यवस्था पर विश्वास के साथ आते हैं।

बेंच और बार एक ही न्याय वितरण प्रणाली के अभिन्न अंग हैं। एक सशक्त न्यायपालिका के लिए स्वतंत्र और गरिमापूर्ण बार का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अपने कार्यकाल में सहयोग के लिए सभी न्यायाधीशों, रजिस्ट्री के अधिकारियों, अधिवक्ताओं और राज्य शासन के प्रति आभार जताया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक चीफ जस्टिस की जिम्मेदारी केवल केस निपटाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें संस्था को मजबूत करना, बुनियादी ढांचे का विकास करना और गरिमापूर्ण कार्य वातावरण तैयार करना भी शामिल है।

जस्टिस अग्रवाल ने गिनाई कार्यकाल की उपलब्धियां

इस कार्यक्रम की शुरुआत में जस्टिस संजय के अग्रवाल ने चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के कार्यकाल में प्रदेशभर की अदालतों और आवासीय कॉलोनियों के क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व कार्यों की जानकारी दी। इसके साथ ही उनके कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

समारोह में बोलते हुए बेहद भावुक हो गए चीफ जस्टिस सिन्हा

सीजे सिन्हा ने संस्थागत मूल्यों पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि निष्पक्षता, विश्वास और न्याय के प्रति निष्ठा से ही एक महान संस्था का निर्माण होता है। इस दौरान चीफ जस्टिस बेहद भावुक हो गए। उन्होंने संदेश दिया कि हमारे द्वारा धारण किया गया पद अस्थायी होता है, लेकिन संस्थाओं को स्थायी रूप से बने रहना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि उनका कार्यकाल तभी सफल माना जाएगा जब वे अपने पीछे एक ऐसी संस्था छोड़कर जाएं जो उन्हें मिली संस्था से अधिक सशक्त हो।

बेंच और बार न्याय प्रणाली के अटूट हिस्से

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चीफ जस्टिस ने कहा कि, बेंच और बार एक ही न्याय वितरण प्रणाली के अभिन्न अंग हैं। एक सशक्त न्यायपालिका के लिए स्वतंत्र और गरिमापूर्ण बार का होना अधिक आवश्यक है। उन्होंने अपने कार्यकाल में सहयोग के लिए सभी न्यायाधीशों, रजिस्ट्री के अधिकारियों, अधिवक्ताओं और राज्य शासन के प्रति आभार जताया।

जनहित व प्रशासनिक कसावट के लिए याद किए जाएंगे चीफ जस्टिस सिन्हा

समारोह में महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने चीफ जस्टिस के असाधारण न्यायिक करियर की जानकारी दी। बताया कि 29 मार्च 2023 से 01 सितंबर 2026 तक चीफ जस्टिस द्वारा कुल 50228 मामलों का निराकरण किया गया। इनमें सिंगल बेंच के 32600 मामले और डिवीजन बेंच के 17628 मामले शामिल हैं।

इसके अलावा उन्होंने 369 से अधिक रिपोर्टेड निर्णयों के जरिए संवैधानिक, आपराधिक और सेवा विधि जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों का निराकरण किया। छत्तीसगढ़ आने से पहले करीब 1 लाख 34 हजार 200 निर्णय दे चुके थे। इसके साथ ही जनहित के मुद्दों और मीडिया रिपोर्ट्स पर संज्ञान लेने के लिए चीफ जस्टिस सिन्हा हमेशा याद किए जाएंगे।

जस्टिस संजय के अग्रवाल बने कार्यवाहक चीफ जस्टिस

जस्टिस संजय के अग्रवाल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के नए कार्यवाहक चीफ जस्टिस नियुक्त किए गए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा शुक्रवार को रिटायर हो गए हैं। उनके रिटायरमेंट के तुरंत बाद राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 223 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए हाई कोर्ट के जज जस्टिस संजय के अग्रवाल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का कार्यवाहक चीफ जस्टिस नियुक्त किया है।

भारत सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग की तरफ से इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। संयुक्त सचिव जगन्नाथ श्रीनिवासन के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश के बाद, अब जस्टिस अग्रवाल चीफ जस्टिस के पद के सभी कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे।

मंत्रालय ने इस नियुक्ति और अधिसूचना की प्रति छत्तीसगढ़ के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राज्य के मुख्य सचिव, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय और सुप्रीम कोर्ट को भी सूचनार्थ भेज दी है। बता दें कि जस्टिस अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया जा चुका है। अधिसूचना जारी होने तक वे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस के दायित्वों का निर्वहन करेंगे।

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