ऑनलाइन सट्टेबाजी पर कानून सख्त होने के बावजूद इसका बाजार खत्म नहीं हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में इसका अवैध बाजार करीब 10 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। कानून से बचने के लिए प्लेटफॉर्म विदेश शिफ्ट किए गए हैं। सट्टेबाजी चलाने के लिए म्यूल बैंक खाते, टेलीग्राम समूह, नए डोमेन और विदेशी सर्वर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 15 अवैध ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म पर 540 करोड़ से ज्यादा विजिट दर्ज हुईं। यानी औसतन हर दिन करीब 1.48 करोड़ बार इन मंचों तक पहुंच बनाई गई। वहीं, 854 इन्फ्लुएंसर भी सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के प्रचार में शामिल मिले।
संसद ने 2025 में ऑनलाइन मनी गेम पर रोक लगाने वाला कानून पारित किया। यह 1 मई 2026 से प्रभावी है। कानून लक या कौशल, दोनों तरह की ऑनलाइन सट्टेबाजी, उनके प्रचार और भुगतान सुविधा पर रोक लगाता है। इसके बावजूद निजी मैसेजिंग समूह, सरोगेट विज्ञापन, इन्फ्लुएंसर और एजेंट विदेश से चलने वाले सट्टेबाजी मंचों तक यूजर्स को पहुंचा रहे हैं।

















