खातीगुड़ा बांध से अचानक पानी छोड़े जाने से बस्तर में तबाही: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव की बड़ी पहल
रायपुर। ओडिशा स्थित इंद्रावती जलाशय (खातीगुड़ा बांध) से बिना किसी पूर्व सूचना और अंतर-राज्यीय समन्वय के भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल बस्तर संभाग में भीषण बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है। इंद्रावती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुँचने के कारण जगदलपुर शहर के दर्जनों वार्ड और सैकड़ों ग्रामीण इलाके जलमग्न हो चुके हैं। इस आपदा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राजस्व व आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा को पत्र लिखकर आपातकालीन राहत, विशेष मुआवजा पैकेज और स्थायी समाधान की मांग की है।
1. बस्तर में बाढ़ की विभीषिका: जनजीवन अस्त-व्यस्त, भारी नुकसान
ओडिशा के खातीगुड़ा बांध से पानी छोड़े जाने के बाद इंद्रावती नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में अचानक जलस्तर में भयानक उछाल आया है। इसके चलते बस्तर संभाग का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र जगदलपुर शहर एवं आसपास के ग्रामीण अंचल पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इस विनाशकारी आपदा के कारण:
- फसलों की तबाही: लाखों एकड़ भूमि में लहलहा रही खरीफ फसलें (विशेषकर धान) पूरी तरह पानी में डूबकर नष्ट हो चुकी हैं।
- आवासीय क्षति: सैकड़ों परिवारों के कच्चे व पक्के मकान क्षतिग्रस्त या पूरी तरह ढह गए हैं, जिससे लोग बेघर हो गए हैं।
- पशुधन की हानि: अचानक आए पानी के तेज बहाव में ग्रामीणों के मवेशी और पशुधन बह गए हैं।
- व्यापारिक क्षति: स्थानीय छोटे व्यापारी, दुकानदार और हाट-बाजारों में काम करने वाले लोगों की सामग्री जलमग्न होने से उन्हें भारी आर्थिक चोट पहुँची है।
2. केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल को पत्र: केंद्र से हस्तक्षेप और ‘विशेष पैकेज’ की मांग
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के अध्यक्ष सी.आर. पाटिल को लिखे विस्तृत पत्र में बस्तर की विकराल स्थिति का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि चूंकि बस्तर क्षेत्र मुख्य रूप से गरीब एवं जनजातीय आबादी से आच्छादित है, इसलिए यहाँ मानवीय दृष्टिकोण से तत्काल बड़े राहत कदम उठाने की आवश्यकता है।
केंद्रीय पत्र की मुख्य मांगें:
- केंद्रीय टीम का तत्काल दौरा: आपदा की विभीषिका का भौतिक सत्यापन करने के लिए केंद्र सरकार की एक अंतर-मंत्रालयीन केंद्रीय टीम (Inter-Ministerial Central Team) तुरंत बस्तर भेजी जाए।
- विशेष बस्तर बाढ़ राहत पैकेज: ‘विशेष बस्तर बाढ़ राहत, जोरा नाला डीपीआर एवं पुनरुद्धार पैकेज’ को अविलंब स्वीकृति प्रदान की जाए।
- एनडीआरएफ (NDRF) मद से मुआवजा: बाढ़ से तबाह हुई खरीफ फसलों के लिए किसानों को प्रति एकड़ के हिसाब से विशेष राहत राशि तुरंत जारी की जाए।
- पीएम आवास में प्राथमिकता: बाढ़ से प्रभावित परिवार जिनके मकान नष्ट हो गए हैं, उन्हें ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (PMAY) के तहत प्राथमिकता से नया मकान आवंटित किया जाए और तात्कालिक जीवन-यापन के लिए आर्थिक सहायता दी जाए।
- डीबीटी (DBT) से सीधी सहायता: बहे पशुधन और प्रभावित दुकानदारों/छोटे व्यापारियों के नुकसान का सर्वेक्षण कर मुआवजे की राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाए।
3. जोरा नाला का नया डीपीआर और हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन
इंद्रावती नदी और जोरा नाला के संगम एवं जल वितरण की समस्या बस्तर में बाढ़ का एक प्रमुख तकनीकी कारण रही है। किरण देव ने अपने पत्र में जोरा नाला के पुनरुद्धार और वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष जोर दिया है।
जोरा नाला हेतु प्रस्तावित तकनीकी सुधार:
- संशोधित DPR का निर्माण: जोरा नाला में अनियंत्रित मिट्टी के कटाव और इंद्रावती नदी के जल विचलन (Water Diversion) को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन कराकर नई ‘डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट’ (DPR) तैयार की जाए।
- गेटेड रेगुलेटर स्ट्रक्चर (Gated Regulator Structure): जोरा नाला पर एक स्वचालित और आधुनिक गेटेड रेगुलेटर स्ट्रक्चर बनाया जाए। इससे मानसून के दौरान अतिरिक्त जलप्रवाह को इंद्रावती और जोरा नाला के बीच वैज्ञानिक तरीके से विभाजित किया जा सकेगा, जिससे जगदलपुर और बस्तर पर बाढ़ का सीधा दबाव कम होगा।
4. दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन एवं कैचमेंट एरिया डेवलपमेंट प्लान
बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए किरण देव ने केंद्रीय जल आयोग (CWC) और जल शक्ति मंत्रालय के तकनीकी मार्गदर्शन में एक व्यापक रणनीति पेश की है:
- वृक्षारोपण और मृदा संरक्षण: इंद्रावती और उसकी सहायक नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment Areas) में बड़े पैमाने पर पौधरोपण, मृदा संरक्षण और ‘कंटूर ट्रेंचिंग’ का कार्य किया जाए ताकि रन-ऑफ वाटर (सतही जल बहाव) की गति को कम किया जा सके।
- ड्रेजिंग प्रोजेक्ट (Dredging Project): इंद्रावती नदी के तल में वर्षों से जमा गाद (Silt) को हटाने के लिए केंद्रीय जल आयोग के मार्गदर्शन में ड्रेजिंग प्रोजेक्ट स्वीकृत किया जाए, जिससे नदी की जलधारण क्षमता में वृद्धि हो सके।
- अर्बन ड्रेनेज व टाउन प्लानिंग: जगदलपुर शहर में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए ‘अमृत’ (AMRUT) योजना के तहत एक ‘एकीकृत स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम’ विकसित किया जाए और नदी के संवेदनशील तटवर्ती इलाकों में पक्के गाइड बांध/तटबंध (Embankments) निर्मित किए जाएँ।
5. रियल-टाइम डेटा शेयरिंग और अर्ली वार्निंग सिस्टम
भविष्य में इस प्रकार की अनियंत्रित जल निकासी से बचने के लिए अंतर-राज्यीय समन्वय तंत्र को मजबूत करने का प्रस्ताव रखा गया है:
ओडिशा के खातीगुड़ा बांध से छोड़े जाने वाले पानी के समय और मात्रा का रियल-टाइम टेलीमेट्री डेटा (Real-Time Telemetry Data) छत्तीसगढ़ प्रशासन के साथ तुरंत साझा किया जाना चाहिए। इसके लिए केंद्रीय जल आयोग (CWC) को नोडल एजेंसी बनाया जाए। साथ ही इंद्रावती बेसिन में सेंसर-आधारित चेतावनी प्रणालियाँ (Sensor-based Warning Systems) स्थापित की जाएँ, ताकि पानी छोड़े जाने से कम से कम 24 से 48 घंटे पूर्व निचले इलाकों को खाली कराया जा सके और जन-धन की हानि रोकी जा सके।
6. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को पत्र
केंद्रीय स्तर पर पहल करने के साथ-साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने राज्य स्तर पर भी त्वरित राहत कार्यों के संचालन हेतु मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा को अलग-अलग पत्र प्रेषित किए हैं।
राज्य सरकार से की गई प्रमुख मांगें:
- तात्कालिक पुनर्वास: राहत शिविरों में ठहराए गए बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन, शुद्ध पेयजल, चिकित्सा सुविधा और तात्कालिक पुनर्वास की समुचित व्यवस्था।
- त्वरित क्षति सर्वे: राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमों को मैदान में उतारकर फसल, मकान और पशुधन के नुकसान का तत्काल निष्पक्ष सर्वे कराया जाए।
- राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) से तुरंत भुगतान: प्रभावितों को बिना किसी प्रशासनिक देरी के सीधे डीबीटी के माध्यम से मुआवजा राशि का वितरण।
- राज्य स्तर पर अंतर-राज्यीय समन्वय: ओडिशा सरकार के साथ उच्च स्तरीय वार्ता कर भविष्य में बांधों से पानी छोड़ने के नियमों (SOP) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना।
— किरण देव, प्रदेश अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी (छत्तीसगढ़)
ओडिशा के खातीगुड़ा बांध से छोड़े गए पानी ने बस्तर संभाग में न केवल तात्कालिक मानवीय संकट खड़ा किया है, बल्कि दीर्घकालिक अवसंरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता को भी रेखांकित किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव द्वारा केंद्र और राज्य सरकार, दोनों स्तरों पर एक साथ की गई इस पहल से बाढ़ पीड़ितों को राहत मिलने और जोरा नाला के दीर्घकालिक वैज्ञानिक पुनरुद्धार की दिशा में तेजी से कार्य होने की उम्मीद जगी है।











