आज का पंचांग: 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार | आश्विन कृष्ण एकादशी (इंदिरा एकादशी), शुभ मुहूर्त, राहुकाल एवं चौघड़िया
1. आज के पंचांग की प्रमुख विशेषता एवं पांच अंग (Panchang Overview)
भारतीय वैदिक ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का विशेष स्थान है। ‘पंचांग’ शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है — पांच अंग। ये पांच अंग हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इन पांचों की सटीक गणना के आधार पर ही किसी भी दिन के शुभ और अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है। किसी भी शुभ कार्य, पूजा-अनुष्ठान, यात्रा या नए व्यवसाय का शुभारंभ करने से पूर्व पंचांग का अवलोकन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
| पंचांग अंग | आज की स्थिति (6 अक्टूबर 2026) |
|---|---|
| दिनांक | 6 अक्टूबर 2026 (6 October 2026) |
| वार | मंगलवार (Tuesday) |
| तिथि (Tithi) | आश्विन कृष्ण एकादशी (7 अक्टूबर रात 12:34 बजे तक) |
| नक्षत्र (Nakshatra) | आश्लेषा नक्षत्र (रात 10:17 बजे तक), तत्पश्चात मघा |
| योग (Yog) | सिद्ध योग (सुबह 07:19 बजे तक), तत्पश्चात साध्य योग |
| करण (Karan) | बव करण (दोपहर 01:19 बजे तक), तत्पश्चात बालव करण |
| पक्ष (Paksha) | कृष्ण पक्ष (पितृ पक्ष) |
| मास (Month) | आश्विन मास (पूर्णिमांत) / भाद्रपद (अमांत) |
| ऋतु (Season) | शरद ऋतु (Sharad Ritu) |
| अयन (Ayan) | दक्षिणायन (Dakshinayana) |
| विक्रम संवत | 2083 (विक्रमी) |
| शक संवत | 1948 (पराभव) |
2. सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय (Sun & Moon Timings)
सूर्योदय और सूर्यास्त की समय गणना ग्रहों की गति एवं स्थान के आधार पर होती है। नीचे दी गई समय-सारणी नई दिल्ली / मध्य भारत के मानक समय पर आधारित है:
| सूर्योदय (Sunrise) | सुबह 06:16 AM |
| सूर्यास्त (Sunset) | शाम 06:03 PM |
| चंद्रोदय (Moonrise) | रात 02:15 AM (7 अक्टूबर तड़के) |
| चन्द्रास्त (Moonset) | दोपहर 03:40 PM |
| सूर्य राशि | कन्या राशि (Virgo) |
| चंद्र राशि | कर्क राशि (Cancer) रात 10:17 बजे तक, तत्पश्चात सिंह राशि (Leo) |
3. आज के शुभ मुहूर्त और चौघड़िया (Auspicious Timings)
शुभ मुहूर्त वह समय-खंड होता है जिसमें प्राकृतिक ऊर्जा अत्यंत सकारात्मक और अनुकूल होती है। इस समय शुरू किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सर्वाधिक रहती है।
शुभ मुहूर्त समय
- अभिजित मुहूर्त (Abhijit Muhurat): दोपहर 11:51 AM से दोपहर 12:38 PM तक (पूजा एवं नए कार्यों के लिए अत्यंत उत्तम)।
- अमृत काल (Amrit Kaal): शाम 08:35 PM से रात 10:17 PM तक।
- विजय मुहूर्त (Vijaya Muhurat): दोपहर 02:12 PM से दोपहर 02:58 PM तक।
- गोधूलि मुहूर्त (Godhuli Muhurat): शाम 06:03 PM से शाम 06:27 PM तक।
- ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurat): सुबह 04:42 AM से सुबह 05:29 AM तक।
आज का दिन का चौघड़िया (Day Choghadiya)
| चौघड़िया का प्रकार | समय सीमा | प्रकृति / प्रभाव |
|---|---|---|
| रोग (Roga) | 06:16 AM – 07:44 AM | अशुभ (स्वास्थ्य का ध्यान रखें) |
| उद्वेग (Udveg) | 07:44 AM – 09:12 AM | अशुभ (मानसिक तनाव से बचें) |
| चर (Chara) | 09:12 AM – 10:41 AM | सामान्य (यात्रा के लिए शुभ) |
| लाभ (Laabh) | 10:41 AM – 12:09 PM | अत्यंत शुभ (व्यापारिक लाभ) |
| अमृत (Amrit) | 12:09 PM – 01:37 PM | सर्वोत्तम (सभी कार्यों के लिए अनुकूल) |
| काल (Kaal) | 01:37 PM – 03:06 PM | अशुभ (सावधानी बरतें) |
| शुभ (Shubh) | 03:06 PM – 04:34 PM | शुभ (धार्मिक कार्य एवं पूजा) |
| रोग (Roga) | 04:34 PM – 06:03 PM | अशुभ |
4. अशुभ समय एवं राहुकाल (Inauspicious Timings)
अशुभ समय के दौरान महत्वपूर्ण निर्णय लेने, नया व्यापार शुरू करने, गृहारंभ या लंबी यात्रा पर जाने से बचना चाहिए। इस दौरान राहुकाल विशेष रूप से वर्जित माना जाता है।
| राहुकाल (Rahu Kaal) | दोपहर 03:06 PM से शाम 04:34 PM तक (इस दौरान कोई शुभ कार्य न करें)। |
| यमगंड (Yamaganda) | सुबह 09:12 AM से सुबह 10:41 AM तक। |
| गुलिक काल (Gulika Kaal) | दोपहर 12:09 PM से दोपहर 01:37 PM तक। |
| दुर्मुहूर्त (Dur Muhurat) | सुबह 08:38 AM से सुबह 09:25 AM तक। |
| दिशा शूल (Disha Shool) | उत्तर दिशा (North)। आज उत्तर दिशा में यात्रा करने से बचें। यदि यात्रा आवश्यक हो तो गुड़ या कसार खाकर घर से निकलें। |
5. आज का विशेष पर्व: इंदिरा एकादशी व्रत एवं श्राद्ध (Indira Ekadashi Importance)
6 अक्टूबर 2026 को पड़ने वाली इंदिरा एकादशी सनातन परंपरा में विशेष स्थान रखती है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में आने के कारण इसका प्रत्यक्ष संबंध पितृ पक्ष (श्राद्ध) से होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इंदिरा एकादशी का व्रत नियमपूर्वक रखता है और अपने पितरों के नाम से दान-पुण्य करता है, उसके पूर्वज यमलोक की यातनाओं से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त होते हैं।
इंदिरा एकादशी का धार्मिक महत्व:
यदि परिवार के किसी पूर्वज से जाने-अनजाने में कोई पाप हुआ हो और वे अधोगति या नरक भोग रहे हों, तो इस एकादशी का व्रत रखकर उसका पुण्य फल पितरों को समर्पित करने से उन्हें तुरंत मुक्ति मिल जाती है। महाभारत काल में भगवान श्री कृष्ण ने राजा युधिष्ठिर को इस एकादशी का महात्म्य सुनाया था|
Ashish Sinha
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