रामानुजगंज में पण्डो जनजाति के स्वर्णिम भविष्य की नई भोर: कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने किया 3 प्री-मैट्रिक छात्रावासों का लोकार्पण
इस ऐतिहासिक अवसर पर रामानुजगंज में विशेष रूप से निर्मित बालक एवं बालिका छात्रावास तथा डिण्डो स्थित बालक छात्रावास का लोकार्पण किया गया। लंबे समय से अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा और सुरक्षित आवास की बाट जोह रहे पण्डो जनजाति समाज के लिए यह क्षण अत्यंत भावुक और उत्साहजनक रहा। कार्यक्रम के दौरान पण्डो जनजाति समाज कल्याण समिति के पदाधिकारियों एवं समाज प्रमुखों ने कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम को पूरे आदर और पारंपरिक ‘सेवा जोहार’ के साथ आभार पत्र सौंपकर उनका आत्मीय अभिनंदन किया।
कम समय में वादों से धरातल तक का सफर: 10 माह में पूरी हुईं वर्षो पुरानी मांगें
लोकार्पण कार्यक्रम में प्रस्तुत किए गए आभार पत्र ने यह स्पष्ट कर दिया कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनप्रतिनिधि का जन सरोकार आपस में मिलते हैं, तो बदलाव किस गति से संभव होता है। आभार पत्र के अनुसार, लगभग 10 माह पूर्व पण्डो समाज के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम से मुलाकात कर समाज की मुख्य समस्याओं और आवश्यकताओं से अवगत कराया था।
प्रतिनिधिमंडल ने उस दौरान विशेष रूप से तीन प्रमुख मांगें रखी थीं:
- नौनिहालों के लिए सुरक्षित एवं आधुनिक छात्रावास: पण्डो समाज के बच्चों को दूर-दराज के क्षेत्रों से आकर पढ़ाई करने में हो रही परेशानियों को देखते हुए छात्रावासों का निर्माण।
- सामाजिक पहचान एवं सामुदायिक भवन: समाज के सांस्कृतिक व सामाजिक आयोजनों हेतु आधारभूत संरचनाओं का विकास।
- जातिगत विसंगतियों व सुधार का प्रतिवेदन: पण्डो जनजाति की प्रशासनिक एवं सामाजिक पहचान से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान।
मात्र 10 महीनों के संक्षिप्त अंतराल में कृषि मंत्री की त्वरित पहल से ये मांगें न केवल कागजों से निकलकर धरातल पर उतरीं, बल्कि संपूर्ण समाज को एक नया दिशा-निर्देश भी दे गईं। रामानुजगंज में बालक-बालिका छात्रावास और डिण्डो में बालक छात्रावास की तत्काल स्वीकृति मिलने के बाद इनका निर्माण कार्य रिकॉर्ड समय में पूरा कराया गया।
महादेवपुर-खुटरा में सामाजिक भवन एवं बुनियादी सुविधाओं का कायाकल्प
केवल छात्रावास ही नहीं, बल्कि पण्डो समाज की सांस्कृतिक धरोहर और सामुदायिक बैठकों के केंद्र महादेवपुर-खुटरा स्थित सामाजिक भवन का कायाकल्प भी पूरा कर लिया गया है। मंत्री श्री रामविचार नेताम के प्रयासों से परिसर का समतलीकरण, पेयजल व्यवस्था हेतु ट्यूबवेल खनन, और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बिजली व्यवस्था का कार्य पूर्ण कराया गया। इससे पण्डो समाज के लोगों को अपने धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक आयोजन गरिमापूर्ण ढंग से आयोजित करने का स्थायी स्थल प्राप्त हो गया है।
जाति सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम: TRI विभाग का प्रतिवेदन प्रस्तुत
पण्डो जनजाति की वर्षों पुरानी और अत्यंत संवेदनशील मांग ‘जाति सुधार एवं विसंगति निवारण’ पर भी शासन स्तर पर तीव्र कार्यवाही की गई। कृषि मंत्री के विशेष निर्देशों के बाद जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRI – Tribal Research and Training Institute) विभाग द्वारा गहन अध्ययन कर एक विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कराया गया।
इस प्रतिवेदन को 27 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ शासन के समक्ष अंतिम स्वीकृति और अग्रिम वैधानिक कार्यवाही हेतु प्रस्तुत कर दिया गया। पण्डो समाज ने इस कदम को अपनी अस्मिता और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर करार दिया है।
| क्र. | पण्डो समाज की प्रमुख मांगें | शासन द्वारा की गई त्वरित कार्यवाही / उपलब्धि |
|---|---|---|
| 1 | रामानुजगंज व डिण्डो में बच्चों के आवास की समस्या | 3 नए प्री-मैट्रिक छात्रावासों (रामानुजगंज में बालक/बालिका व डिण्डो में बालक) का लोकार्पण। |
| 2 | महादेवपुर-खुटरा में सामाजिक भवन का अभाव | भवन निर्माण, समतलीकरण, ट्यूबवेल खनन एवं विद्युत कनेक्शन का कार्य पूर्ण। |
| 3 | जातिगत विसंगतियां एवं सुधार की मांग | 27 अप्रैल 2026 को TRI विभाग द्वारा तैयार प्रतिवेदन शासन को प्रेषित। |
| 4 | शिक्षा एवं सामाजिक उत्थान के अवसर | विशेष पिछड़ी जनजाति के लिए सर्वसुविधायुक्त शैक्षणिक माहौल की स्थापना। |
“केवल ईंट-पत्थर के भवन नहीं, यह हमारे अस्तित्व और पहचान की सुरक्षा है”
पण्डो जनजाति समाज कल्याण समिति द्वारा सौंपे गए आभार पत्र के शब्द अत्यंत भावुक और समाज की अंतरात्मा को अभिव्यक्त करने वाले थे। आभार पत्र में समाज के प्रबुद्ध जनों और पदाधिकारियों ने लिखा:
“माननीय मंत्री जी, आपके इन ऐतिहासिक प्रयासों से केवल कंक्रीट और ईंट-पत्थर के भवन खड़े नहीं हुए हैं, बल्कि इनसे हमारी विशेष पिछड़ी पण्डो जनजाति की भावी पीढ़ी को आगे बढ़ने का एक ठोस रास्ता मिला है। हमारे समाज का अस्तित्व जो उपेक्षा के भंवर में था, वह आज सुरक्षित हुआ है और हमें एक नई पहचान मिली है।”
समाज ने कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम को उनकी संवेदनशीलता, आत्मीयता और संरक्षण देने के स्वभाव के कारण ‘जन-दुलरुवा, पाल के लाल’ की उपाधि से विभूषित किया। पत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि श्री नेताम द्वारा पण्डो जनजाति के सर्वांगीण विकास के लिए दिया गया यह अमूल्य योगदान पण्डो समाज के इतिहास में सदैव स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम का संबोधन: “पण्डो समाज का स्नेह ही मेरी असली पूंजी”
आभार और अभिनंदन को सहर्ष स्वीकार करते हुए मुख्य अतिथि एवं कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि पण्डो समाज अत्यंत निष्छल, सीधा-साधा और संवेदनशील समाज है। उन्होंने कहा कि पण्डो समाज का जो अपार स्नेह, सम्मान और अटूट विश्वास उन्हें हमेशा से प्राप्त होता रहा है, वही उनके सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
मंत्री श्री नेताम ने भावुक होते हुए कहा, “पण्डो समाज के उत्थान और सेवा के लिए मैं जितना भी कार्य कर लूं, वह कम ही रहेगा। जब समाज के प्रतिनिधियों ने 10 महीने पहले बच्चों की शिक्षा और छात्रावास की चिंता मेरे सामने रखी थी, तो वह केवल एक मांग पत्र नहीं था, बल्कि मेरे अपने परिवार के बच्चों के भविष्य की पुकार थी। उन मांगों को पूरा करना जनप्रतिनिधि के नाते मेरा परम दायित्व था।”
बिटियों की शिक्षा और सामाजिक नेतृत्व पर विशेष बल
कृषि मंत्री ने विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि ये प्री-मैट्रिक छात्रावास पण्डो समाज के बच्चों, विशेषकर हमारी बेटियों के लिए ज्ञान और आत्मनिर्भरता के नए द्वार खोलेंगे। जब बेटियां शिक्षित होती हैं, तो केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि दो परिवार शिक्षित और संस्कारी बनते हैं।
उन्होंने उपस्थित अभिभावकों और समाज प्रमुखों से पुरजोर अपील की:
- नियमित स्कूल व छात्रावास भेजें: बच्चों को किसी भी परिस्थिति में पढ़ाई से वंचित न रखें। उन्हें नियमित रूप से स्कूल और छात्रावासों में भेजें।
- भविष्य के नेतृत्वकर्ता: आज छात्रावासों में रहकर पढ़ने वाले यही बच्चे कल डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी बनकर पण्डो समाज और पूरे क्षेत्र का नेतृत्व करेंगे।
- शासकीय योजनाओं का अधिकतम लाभ: शासन द्वारा जनजातीय वर्गों के कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न स्वरोजगार, कृषि और आजीविका योजनाओं का भरपूर लाभ उठाएं।
संस्कृति, भाषा और परंपरा की रक्षा का आह्वान
अपने विस्तृत संबोधन में कृषि मंत्री ने आर्थिक विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में अपनी पहचान खो देना किसी भी जीवंत समाज के लिए ठीक नहीं है।
श्री नेताम ने कहा, “आर्थिक संपन्नता जीवन के लिए बेहद जरूरी है और हमारी सरकार इसके लिए निरंतर आजीविका के साधन बढ़ा रही है। परंतु इसके साथ ही पण्डो समाज को अपनी समृद्ध भाषा, अनूठी परंपराएं, लोकगीत, नृत्य और मौलिक संस्कृति को भी सहेजकर रखना होगा। आपकी यह सांस्कृतिक विरासत ही पण्डो जनजाति की असली पहचान और गौरव है।”
विकास की मुख्यधारा से जुड़ती विशेष पिछड़ी जनजातियां
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ का बलरामपुर-रामानुजगंज जिला भौगोलिक दृष्टि से वनांचल और दूरस्थ अंचलों से आच्छादित है, जहां विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) जैसे पण्डो और पहाड़ी कोरवा निवास करते हैं। राज्य सरकार और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के लगातार प्रयासों से इन जनजातियों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, शुद्ध पेयजल और पक्के मकान जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं।
रामानुजगंज में प्री-मैट्रिक छात्रावासों का एक साथ लोकार्पण होना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि राज्य शासन की प्राथमिकता सूची में अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति का विकास सर्वोपरि है। मांगलिक भवन में आयोजित इस गरिमापूर्ण समारोह में स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पण्डो समाज के प्रांतीय व जिला स्तरीय पदाधिकारी, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में पण्डो समाज के ग्रामीण व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
Ashish Sinha
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