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जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का बदला नियम! जानें 1 से 2 साल की देरी पर कैसे बनेगा सर्टिफिकेट

छत्तीसगढ़ विशेष: जन्म एवं मृत्यु पंजीयन के नियमों में बड़ा बदलाव

स्थान: अम्बिकापुर (सरगुजा) | तिथि: 13 अक्टूबर 2026 | बुलेटिन: विशेष शासकीय रिपोर्ट
अम्बिकापुर, 13 अक्टूबर 2026: जन्म एवं मृत्यु का पंजीयन कराने में देरी करने वालों के लिए अब कानूनी प्रक्रिया और अधिक सख्त एवं स्पष्ट कर दी गई है। भारत सरकार द्वारा जन्म एवं मृत्यु पंजीयन अधिनियम, 1969 में ऐतिहासिक संशोधन करते हुए नए प्रावधान लागू किए गए हैं।

विशेष रिपोर्ट: पंजीयन में विलंब पर अब नए कानूनी प्रावधान लागू

छत्तीसगढ़ शासन के आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय से प्राप्त दिशा-निर्देशों के परिपालन में सरगुजा जिले के कलेक्टर एवं अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) द्वारा जिले के सभी नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों के पंजीयन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नए नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, पूर्व में विलंबित पंजीयन को लेकर कई स्तरों पर भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती थी तथा नागरिक प्रक्रियात्मक जटिलताओं के कारण लंबे समय तक परेशान होते थे। भारत सरकार द्वारा **जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2026** पारित किए जाने के बाद अब समय-सीमा के अनुसार सक्षम प्राधिकारियों का निर्धारण पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया गया है।

समय-सीमा के आधार पर नई प्रक्रियात्मक व्यवस्था

संशोधित अधिनियम के अनुसार यदि किसी नागरिक द्वारा जन्म या मृत्यु की घटना की सूचना समय पर नहीं दी जाती है, तो विलंब की अवधि के आधार पर निम्नलिखित प्राधिकारियों से अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा:

एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर (1 से 2 वर्ष तक का विलंब):

यदि जन्म या मृत्यु की घटना के एक वर्ष बीत जाने के बाद परंतु दो वर्ष के भीतर पंजीयन के लिए आवेदन किया जाता है, तो इसके लिए **डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (कलेक्टर)**, **डिवीजनल मजिस्ट्रेट (अनुविभागीय अधिकारी/SDM)** अथवा **डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा विशेष रूप से प्राधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate)** का लिखित आदेश अनिवार्य होगा। संबंधित क्षेत्र के रजिस्ट्रार केवल सक्षम मजिस्ट्रेट के आदेश के पश्चात ही पंजीयन करेंगे।

दो वर्ष से अधिक की देरी पर (2 वर्ष से अधिक का विलंब):

यदि घटना के घटित होने के दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद सूचना दी जाती है, तो प्रक्रिया और अधिक विधिक हो जाएगी। ऐसे मामलों में पंजीयन का आदेश केवल **प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (First Class Judicial Magistrate – JMFC)** द्वारा जारी किया जाएगा। न्यायिक आदेश प्रस्तुत करने पर ही संबंधित स्थान के रजिस्ट्रार द्वारा पंजीयन की कार्यवाही पूरी की जाएगी।

अधिनियम में संशोधन: धारा 13 में बदलाव का विधिक स्वरूप

भारत सरकार द्वारा मूल कानून **जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 (संशोधित 2023)** में व्यापक सुधार करते हुए **रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ एंड डेथ (संशोधन) अधिनियम 2026** को प्रख्यापित किया गया है।

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इस नए संशोधन के अंतर्गत अधिनियम की मुख्य धारा **13** में संशोधन किया गया है। इसके तहत पूर्व की उपधारा (3) को पूरी तरह से प्रतिस्थापित करते हुए नई **उपधारा (3)** तथा एक नई **उपधारा (3ए)** को जोड़ा गया है। इन कानूनी संशोधनों का मूल उद्देश्य देश भर में विलंबित पंजीयन प्रक्रिया में एकरूपता, पारदर्शित तथा सुरक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि फर्जी या अवैध प्रमाण पत्र जारी करने की गुंजाइश खत्म हो सके।

नियमों का संक्षिप्त विवरण (तुलनात्मक तालिका)

विलंब की अवधि सक्षम प्राधिकारी (अनुमति देने हेतु) निष्पादन अधिकारी कानूनी आधार (संशोधित धारा)
21 दिन के भीतर निःशुल्क / सामान्य प्रक्रिया स्थानीय रजिस्ट्रार धारा 13(1)
21 दिन से 30 दिन तक विलंब शुल्क के साथ स्थानीय रजिस्ट्रार धारा 13(1)
30 दिन से 1 वर्ष तक जिला रजिस्ट्रार / निर्धारित प्राधिकारी स्थानीय रजिस्ट्रार धारा 13(2)
1 वर्ष से 2 वर्ष के भीतर डिस्ट्रिक्ट / डिवीजनल / प्राधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट स्थान का रजिस्ट्रार धारा 13(3) [संशोधित 2026]
2 वर्ष से अधिक प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) स्थान का रजिस्ट्रार धारा 13(3A) [संशोधित 2026]

सरगुजा जिला प्रशासन द्वारा सख्त निर्देश

कलेक्टर एवं अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) सरगुजा ने निर्देश दिया है कि जिले के सभी मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO), जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), स्वास्थ्य विभागों के अस्पताल अधीक्षकों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राम पंचायत सचिवों (रजिस्ट्रार) को इन नियमों का शत-प्रतिशत पालन करना होगा।

प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी भी जन्म या मृत्यु की घटना की सूचना घटना घटित होने के 21 दिनों के भीतर अपने नजदीकी पंजीयन केंद्र (ग्राम पंचायत/नगर पालिका/अस्पताल) में आवश्यक रूप से दें, जिससे उन्हें भविष्य में मजिस्ट्रेट कार्यालय या अदालत के चक्कर न काटने पड़ें।

संशोधन का महत्व और नागरिक सुविधाएं

  • डिजिटल एकरूपता: नए संशोधन के तहत प्रमाण पत्रों का सीधा जुड़ाव राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय डिजिटल डेटाबेस से हो रहा है।
  • पारदर्शिता: न्यायिक एवं प्रशासनिक अनुमति अनिवार्य होने से गलत या कूटरचित (Fake) दस्तावेजों के आधार पर पंजीयन रुकेंगे।
  • नागरिक सेवा में सुगमता: हालांकि प्रक्रिया कड़ी की गई है, लेकिन प्राधिकारियों का क्षेत्राधिकार स्पष्ट होने से आवेदकों को सही मार्गदर्शक मिलेगा।

आम जनता के लिए महत्वपूर्ण सलाह:

समय पर जन्म एवं मृत्यु का पंजीयन कराना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यह दस्तावेज स्कूल में प्रवेश, पासपोर्ट बनवाने, आधार अपडेट, विरासत/संपत्ति नामांतरण तथा सरकारी योजनाओं का लाभ लेने हेतु प्राथमिक कानूनी पहचान पत्र होता है। किसी भी असुविधा से बचने के लिए घटना के तुरंत बाद पंजीयन कराएं।

© 2026 जिला जनसंपर्क कार्यालय एवं सांख्यिकी विभाग, सरगुजा (छत्तीसगढ़) | सर्वाधिकार सुरक्षित

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