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दुर्ग में पुलिसकर्मी के बेटे चेतन साहू की हत्या के मामले में करीब 10 महीने बाद अदालत ने फैसला सुनाया

दुर्ग में पुलिसकर्मी के बेटे चेतन साहू की हत्या के मामले में करीब 10 महीने बाद अदालत ने फैसला सुनाया है। प्रथम अपर सत्र न्यायालय ने 14 अक्टूबर 2026 को तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास समेत अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई।

घटना के वक्त चेतन की गर्लफ्रेंड ने उसे मिलने के लिए बुलाया था। वहां विवाद हुआ, जिसने हिंसक रूप ले लिया। इसके बाद आरोपियों ने चेतन पर हमला कर दिया। पुलिस की जांच और अदालत में सुनवाई के बाद अब इस मामले में फैसला आया है।

पुलिस जांच में सामने आया था कि चेतन साहू न्यू पुलिस लाइन, दुर्ग का रहने वाला था। रोशनी लकड़ा और चेतन की मां पुलिस विभाग में आरक्षक थीं। पुलिस लाइन में रहने के दौरान चेतन और रोशनी के बीच गहरी दोस्ती हो गई थी।

बाद में रोशनी की मां का तबादला सरगुजा हो गया। इसके बाद रोशनी भी अपनी मां के साथ वहां चली गई। इसी दौरान रोशनी की नजदीकियां दूसरे युवक से बढ़ गईं। इसके बावजूद चेतन उस पर मिलने के लिए लगातार दबाव बना रहा था।

दिसंबर 2024 में रोशनी अपनी मां के साथ दुर्ग आई थी। इसकी जानकारी मिलने पर चेतन उससे मिलने की कोशिश करने लगा। लगातार फोन आने से परेशान रोशनी ने इसकी जानकारी अपने नए प्रेमी को दी।

मिलने बुलाया, फिर दोस्तों के साथ पहुंचा युवक

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्रेमी के कहने पर रोशनी ने चेतन को कसारीडीह सिविल लाइन स्थित क्वार्टर के पास मिलने के लिए बुलाया था। 29 दिसंबर 2024 की रात करीब 8:30 बजे आयुष्मान हॉस्पिटल के पास चेतन के साथ मारपीट की गई। आरोपियों ने उस पर लाठी-डंडों और घातक हथियारों से हमला किया।

गंभीर चोटों के कारण चेतन की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। शुरुआती कार्रवाई में कई संदेहियों को हिरासत में लिया गया। बाद में पुलिस ने रोशनी लकड़ा, आकाश देशलहरा और कुलेश्वर साहू के साथ तीन नाबालिगों को भी पकड़ा।

इस मामले में हत्या सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।

कोर्ट ने 3 को सुनाई उम्रकैद

प्रथम अपर सत्र न्यायालय, दुर्ग ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास समेत अलग-अलग अवधि की सजा और अर्थदंड सुनाया। उपलब्ध सजा वारंट के मुताबिक, भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1)/190 और 61(2) के तहत आजीवन कारावास और 500-500 रुपए अर्थदंड दिया गया है।

वहीं, धारा 191(2) के तहत 2 साल और धारा 191(3), 118(1) के तहत 3-3 साल के कारावास की सजा के साथ जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने सभी सजाएं साथ-साथ चलाने और न्यायिक अभिरक्षा में पहले बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का आदेश दिया। मामले की विवेचना निरीक्षक केशव राम कोसले ने की थी।

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