बाहर बारिश हो रही थी। कोई भी बाहर नहीं जाना चाहता था। बारिश से बचने के लिए एंट्री गेट पर खड़े लोग अंदर आने के लिए धक्का-मुक्की करने लगे। भीड़ इतनी बढ़ गई कि सांस लेना मुश्किल हो गया। अंदर खड़े सभी लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर रहे थे। मैं भी लोगों के नीचे दब गया था। बचना मुश्किल था, किसी तरह खुद को संभाला, मां के पास पहुंचा, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी। वो मेरी आंखों के सामने मर गईं।

यह कहना है 25 साल के सोनू पाल का। शनिवार शाम कोलकाता चोरबागान दुर्गा पंडाल में मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई, इसमें उनकी मां भी थीं।
हादसे को लेकर एक बड़ा दावा किया जा रहा है कि पंडाल के आयोजकों ने एक घोषणा की थी, जिसमें चेतावनी थी कि यदि भीड़ कंट्रोल नहीं हुई तो पंडाल गिर सकता है। इसके ठीक बाद भगदड़ मच गई, एग्जिट गेट का एक हिस्सा भी गिर गया।
चोरबागान पंडाल को इस बार बंगाल सरकार के देवी दुर्गा सम्मान 2026 में सर्वश्रेष्ठ में सर्वश्रेष्ठ (सेरार सेरा) पंडाल का तीसरा अवॉर्ड भी मिला है।

















