विशेष राजनीतिक रिपोर्ट: SIR प्रक्रिया पर घमासान
“नोटबंदी के समय कहा गया था कि काला धन पकड़ा जाएगा, पर 99.3% करेंसी वापस आ गई। अब SIR को ‘घुसपैठिए पकड़ने’ का जरिया बताया जा रहा है, लेकिन करोड़ों नाम काटने के बाद भी सरकार और चुनाव आयोग आंकड़ा नहीं बता पा रहे। यह घुसपैठ की आड़ में वोट काटने (Vote Chori) का खेल है।” — टी एस सिंहदेव
SIR की आड़ में आम जनता को परेशान करने का आरोप: टी एस सिंहदेव का बड़ा हमला
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव (T S Singhdeo) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर निशाना साधा है। सिंहदेव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR / विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया की मंशा और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
सिंहदेव ने खोजी पत्रकारिता संगठन ‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ (The Reporters’ Collective) की एक हालिया खोजी रिपोर्ट और हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग देश की जनता को भ्रमित कर रहे हैं। उनके अनुसार, SIR की आड़ में वैध नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाकर सीधे तौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुँचाया जा रहा है।
📱 टी एस सिंहदेव का आधिकारिक वक्तव्य (‘X’ पोस्ट का मुख्य अंश):
“अमित शाह जी राष्ट्र को बताते हैं कि SIR घुसपैठियों को पकड़ने के लिए है। लेकिन ‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ की जांच से पता चला है कि बंगाल में SIR सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग के अपने सॉफ्टवेयर में किसी को ‘गैर-नागरिक’ (Non-Citizen) चिह्नित करने का कोई विकल्प ही नहीं था। बिहार के 100 से अधिक चुनावी अधिकारियों से RTI के जवाब में SIR के माध्यम से पहचाने गए गैर-नागरिकों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।”
“बिलासपुर में बंगाल के 23 प्रवासी मजदूरों को संदिग्ध ‘बांग्लादेशी’ बताकर हिरासत में लिया गया। अंततः हर एक को रिहा कर दिया गया—अंतिम चार मजदूरों को तो 33 दिन हिरासत में बिताने पड़े। हमने यह फिल्म पहले भी देखी है…”
खोजी रिपोर्ट और बिलासपुर घटना का दिया हवाला
अपने हमले को धार देते हुए सिंहदेव ने दो प्रमुख उदाहरण प्रस्तुत किए:
1. चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर में खामी और RTI खुलासे: सिंहदेव ने कहा कि ‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ की मीडिया रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ है कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल किए गए चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर में ऐसा कोई टेक्निकल प्रावधान ही मौजूद नहीं था, जिससे किसी व्यक्ति को अनाधिकृत/गैर-नागरिक श्रेणी में डाला जा सके। इसी तरह, बिहार में RTI (सूचना का अधिकार) के तहत दाखिल किए गए 100 से अधिक आवेदनों के उत्तर में किसी भी अधिकारी के पास SIR द्वारा चिह्नित गैर-नागरिकों का कोई डेटा उपलब्ध नहीं था।
2. बिलासपुर में प्रताड़ित प्रवासी मजदूर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर का जिक्र करते हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल से आए 23 निर्दोष प्रवासी मजदूरों को “संदिग्ध बांग्लादेशी घुसपैठिया” बताकर हिरासत में लिया गया था। बाद में जांच में वे सभी भारतीय नागरिक पाए गए और रिहा कर दिए गए, लेकिन इनमें से चार निरपराध मजदूरों को बिना किसी गलती के 33 दिनों तक पुलिस कस्टडी में मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
“नोटबंदी की तरह SIR भी एक विफलता”— सिंहदेव
टी एस सिंहदेव ने वर्तमान SIR प्रक्रिया की तुलना 2016 की नोटबंदी (Demonetisation) से की। उन्होंने कहा:
📌 सिंहदेव द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु:
- नोटबंदी का उदाहरण: नोटबंदी का मकसद काला धन खत्म करना बताया गया था, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 99.3% बंद किए गए नोट बैंकिंग सिस्टम में वापस लौट आए।
- करोड़ों वोट काटने का आरोप: SIR का उद्देश्य ‘घुसपैठियों’ को पकड़ना बताया गया, लेकिन करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम काटने के बाद भी चुनाव आयोग यह सार्वजनिक नहीं कर सका कि उसने असल में कितने घुसपैठियों को पकड़ा।
- आम जनता को परेशानी: दोनों ही प्रक्रियाओं में देश के आम और गरीब नागरिकों को अपनी नागरिकता और अपने ही पैसे साबित करने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा।
- बॉलीवुड और तंज: सिंहदेव ने बॉलीवुड फिल्म ‘धुरंधर’ का तंजिया संदर्भ देते हुए लिखा कि शायद इस काल्पनिक कहानी के अगले अध्याय में ही घुसपैठियों के वोटर कार्ड जलते हुए और कोई हाई-वोल्टेज आइटम गाना देखने को मिले, क्योंकि हकीकत में सरकार के पास कोई डेटा नहीं है।
अमित शाह से सीधे सवाल: ‘कितने घुसपैठिए पकड़े, आंकड़े जारी करें’
सिंहदेव ने सीधे तौर पर गृह मंत्री से सवाल पूछा कि आखिर सरकार देश के सामने सच रखने से क्यों कतरा रही है? उन्होंने कहा, “अमित शाह जी, SIR के तहत वास्तव में कितने घुसपैठियों को पकड़ा गया है? देश को वह संख्या (Number) स्पष्ट रूप से बताएं।”
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि “घुसपैठ” केवल एक धुंध (Smokescreen) है ताकि असल मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके। इसका असली मकसद चुनिंदा वर्गों के वोट काटना (Vote Chori) है ताकि चुनावों के नतीजों को प्रभावित किया जा सके।
राजनीतिक परिदृश्य और भावी प्रतिक्रियाएं
टी एस सिंहदेव के इस बयान के बाद राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के आसार हैं। चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण अभियान (Purification Drive) और SIR प्रक्रिया पर विपक्ष लगातार निष्पक्षता के सवाल उठाता रहा है। अब सिंहदेव द्वारा आंकड़ों और प्रशासनिक रिपोर्टों के आधार पर किए गए इस हमले के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।













