अंबिकापुर: मातृ शक्ति कार्य धर्म जागरण समन्वय द्वारा निकाली गई भव्य 151 मीटर चुनरी यात्रा, मां महामाया के दरबार में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
अंबिकापुर (सरगुजा): सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहर की पावन धरा अंबिकापुर में शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर भक्ति, श्रद्धा और मातृशक्ति के अप्रतिम समर्पण का ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। ‘मातृ शक्ति कार्य धर्म जागरण समन्वय अंबिकापुर सरगुजा’ के तत्वावधान में आयोजित विशाल चुनरी यात्रा ने पूरे शहर को भक्ति रस में सराबोर कर दिया। 151 मीटर लंबी अलौकिक लाल चुनरी को अपने हाथों में धारण कर जब सैकड़ों की संख्या में महिलाएं सड़कों पर निकलीं, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो साक्षात शक्ति स्वरूपा देवी धरातल पर अवतरित हो गई हों।
सरस्वती शिशु मंदिर (घड़ी चौक, देवीगंज रोड) से प्रारंभ होकर सिद्ध पीठ मां महामाया मंदिर तक पहुंची यह चुनरी यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सामाजिक एकजुटता और नारी शक्ति के जागरण का एक अभूतपूर्व प्रतीक बन गई।
घड़ी चौक से हुआ यात्रा का भव्य शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल सरस्वती शिशु मंदिर परिसर, घड़ी चौक से वैदिक मंतोषचार और पूजा-अर्चना के साथ हुआ। मातृ शक्ति कार्य धर्म जागरण समन्वय की प्रमुख पदाधिकारियों एवं वरिष्ठ साधवियों द्वारा मां दुर्गा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर यात्रा को हरी झंडी दिखाई गई।
इसके पश्चात 151 मीटर लंबी भव्य चुनरी का पूजन किया गया। जैसे ही महिलाओं ने सर्वमंगल की कामना करते हुए चुनरी को अपने हाथों में उठाया, पूरा परिसर ‘जय माता दी’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘मां महामाया की जय’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। देवीगंज रोड पर चुनरी यात्रा के आगे बढ़ते ही आसपास का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।
नवदुर्गा के नौ रूपों की जीवंत झांकियों ने मोहा मन
इस चुनरी यात्रा का सबसे मुख्य आकर्षण नवदुर्गा के सभी नौ स्वरूपों—मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री—की मनमोहक और जीवंत झांकियां थीं। बच्चों एवं युवतियों ने माता के विभिन्न रूपों की सजीव वेशभूषा धारण कर रखी थी।
झांकी की मुख्य विशेषताएं:
- जीवंत वेशभूषा: बालिकाओं द्वारा धारण किए गए माता के नौ रूपों के अस्त्र-शस्त्र और पारंपारिक स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहे।
- पुष्प वर्षा: यात्रा मार्ग में स्थान-स्थान पर नगरवासियों और व्यापारी संघों द्वारा पुष्प वर्षा कर झांकियों और चुनरी यात्रा का स्वागत किया गया।
- पार पारंपरिक वाद्य यंत्र: ढोल-नगाड़ों और ताशे की धुन पर श्रद्धालु महिलाएं झूमती और नृत्य करती नजर आईं।
भक्ति और उत्साह में सराबोर हुआ अंबिकापुर शहर
घड़ी चौक से प्रारंभ होकर यह यात्रा देवीगंज रोड, महामाया रोड होते हुए ऐतिहासिक मां महामाया मंदिर प्रांगण पहुंची। यात्रा के पूरे मार्ग में सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम थे। नगर के विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, सामाजिक संगठनों और युवा मंडलों ने यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, फलाहार और जलपान के स्टॉल लगाए थे।
रास्ते भर ढोल-नगाड़ों की थाप और भक्ति गीतों की गूंज ने पूरे अंबिकापुर शहर को शिव-शक्ति मय बना दिया। महिलाओं का उत्साह देखते ही बनता था—पारंपरिक लाल और पीली साड़ियों में सुसज्जित महिलाएं पूरी निष्ठा और नियम-संयम के साथ चुनरी को संभाले आगे बढ़ रही थीं।
महामाया मंदिर में चुनरी अर्पण के साथ हुआ समापन
यात्रा का समापन सरगुजा संभाग की अधिष्ठात्री देवी मां महामाया के मंदिर परिसर में हुआ। मंदिर पहुंचने पर मुख्य पुजारी एवं आचार्यों द्वारा चुनरी का विधिवत पूजन कराया गया। इसके पश्चात 151 मीटर लंबी चुनरी को मां महामाया देवी के पावन दरबार में अर्पित किया गया।
चुनरी अर्पण के बाद समस्त मातृशक्ति और उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक आरती में भाग लिया और देश, प्रदेश तथा सरगुजा अंचल की सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य की कामना की। आरती के उपरांत उपस्थित जनसमूह के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
आयोजन में मातृशक्ति की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य चुनरी यात्रा की सफलता में ‘मातृ शक्ति कार्य धर्म जागरण समन्वय’ की प्रमुख कार्यकर्ताओं एवं नगर की प्रबुद्ध महिलाओं का विशेष योगदान रहा। यात्रा का नेतृत्व एवं संचालन क्षेत्र की वरिष्ठ महिला प्रतिनिधियों एवं समाजसेविकाओं द्वारा किया गया।
यात्रा में प्रमुख रूप से सम्मिलित सम्मानित महिलाएं:
इन प्रमुख नामों के साथ-साथ अंबिकापुर नगर एवं आसपास के ग्रामीण अंचलों से आई सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने कंधे से कंधा मिलाकर इस यात्रा को ऐतिहासिक रूप प्रदान किया।
धर्म जागरण और सामाजिक समरसता का संदेश
मातृ शक्ति कार्य धर्म जागरण समन्वय के प्रवक्ताओं ने बताया कि इस चुनरी यात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज में धर्म जागरण, सांस्कृतिक चेतना का प्रसार और नारी शक्ति को एकजुट करना है। सनातन परंपरा में नारी को शक्ति का प्रतीक माना गया है, और जब मातृशक्ति धर्म एवं संस्कृति की रक्षा तथा संवर्धन के लिए आगे आती है, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
“151 मीटर चुनरी यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारी अटूट आस्था, एकता और मातृशक्ति की अपार ऊर्जा का प्रकटीकरण है। मां महामाया की कृपा समस्त सरगुजा अंचल पर बनी रहे, यही हमारी प्रार्थना है।”
अंबिकापुर में आयोजित यह 151 मीटर चुनरी यात्रा वर्षों तक अपने भव्य स्वरूप, भक्तिमय वातावरण और अभूतपूर्व जनभागीदारी के लिए याद की जाएगी। नगरवासियों ने धर्म जागरण समन्वय के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की और भविष्य में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक अनुष्ठानों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।













