नवरात्र के पावन पर्व और त्योहारी उल्लास के माहौल के बीच मंत्री राजेश अग्रवाल की यह सहजता लोगों को हैरान भी कर रही है और गदगद भी। आमतौर पर जब कोई जनप्रतिनिधि मंत्री पद जैसे उच्च संवैधानिक पद पर आसीन होता है, तो उसके आसपास सुरक्षाकर्मियों का घेरा और गाड़ियों का काफिला होना आम माना जाता है। लेकिन राजेश अग्रवाल ने इन सभी प्रोटोकॉल्स और कृत्रिम तामझाम से परे जाकर आम जनजीवन के बीच सीधे संवाद स्थापित करने का एक अनूठा उदाहरण पेश किया है।
स्कूटी पर सवार होकर निकले शहर के रास्तों पर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने किसी वीआईपी मूवमेंट के बजाय बेहद सादगीपूर्ण तरीके से स्कूटी उठाई और अंबिकापुर की सड़कों पर निकल पड़े। शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए उन्होंने न सिर्फ यातायात के सामान्य नियमों का पालन किया, बल्कि रास्ते में मिलने वाले आम नागरिकों, दुकानदारों और युवाओं से रुके बिना सहजता से मुलाकात की।
अचानक अपने बीच एक कैबिनेट मंत्री को इस तरह साधारण रूप में स्कूटी चलाते हुए देखकर राहगीर और स्थानीय नागरिक अछंभित रह गए। कई युवाओं ने इस पल अपने मोबाइल में कैद किया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। शहर के सदर रोड समेत विभिन्न प्रमुख इलाकों में स्थित दुर्गा पंडालों में जब मंत्री राजेश अग्रवाल बिना किसी तामझाम के पहुंचे, तो वहां मौजूद समितियों के सदस्यों और श्रद्धालुओं का उत्साह दोगुना हो गया。
दुर्गा पंडालों में टेका माथा, प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना
शहर भ्रमण के दौरान मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदर रोड स्थित प्रमुख दुर्गा पंडाल समेत कई अन्य स्थानों पर पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन किए। उन्होंने विधि-विधान के साथ माता रानी की पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति, स्वास्थ्य एवं चहुंमुखी विकास की कामना की। पंडालों में उपस्थित श्रद्धालुओं ने जब अपने लोकप्रिय मंत्री को बिल्कुल साधारण तरीके से कतार में खड़े होकर या सामान्य रूप से दर्शन करते देखा, तो उन्होंने गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया। मंत्री ने भी किसी प्रकार के प्रोटोकॉल की परवाह न करते हुए आम श्रद्धालुओं की तरह ही सभी से हाथ जोड़कर भेंट की और त्योहार की बधाइयां दीं。
“अंबिकापुर की जनता का कर्ज इस जन्म में नहीं चुका सकता”: भावुक हुए राजेश अग्रवाल
जनसंपर्क और पंडाल दर्शन के दौरान स्थानीय नागरिकों और मीडिया से अनौपचारिक चर्चा करते हुए मंत्री राजेश अग्रवाल बेहद भावुक नजर आए। अंबिकापुर की जनता के साथ अपने आत्मीय संबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने दिल को छू लेने वाली बात कही।
“अंबिकापुर की जनता ने मुझे जो मान-सम्मान और अपार प्रेम दिया है, उसका कर्ज मैं इस जीवन में तो क्या, अनेकों जन्मों में भी नहीं चुका सकता। मैं अपने क्षेत्र के लिए दिन-रात कितनी भी मेहनत कर लूं, जनता के इस उपकार और प्यार का कर्ज मुझ पर हमेशा बना रहेगा।”
— राजेश अग्रवाल, कैबिनेट मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन
उनके इन शब्दों में जनता के प्रति जो विनम्रता और कृतज्ञता झिलमिला रही थी, उसने वहां मौजूद हर एक व्यक्ति का दिल जीत लिया। राजनीति के गलियारों में अक्सर जहां नेताओं और जनता के बीच की दूरियां चर्चा का विषय रहती हैं, वहीं राजेश अग्रवाल का यह बयान और उनकी कार्यशैली जन-प्रतिनिधित्व की एक बेहतरीन मिसाल पेश करती है।
सादगी का यह कोई पहला वाकया नहीं
राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब राजेश अग्रवाल ने अपने इस अनोखे और जमीन से जुड़े मिजाज से सबको चौंकाया हो। मंत्री बनने से पहले और बाद में भी, कई मौकों पर उन्हें लाव-लश्कर को छोड़कर बिल्कुल साधारण अंदाज में आम जगहों पर देखा जाता रहा है।
कभी वे बिना किसी पूर्व सूचना या तामझाम के अकेले ही कलेक्ट्रेट या सरकारी दफ्तरों में आम जनता के कार्यों की गति का जायजा लेने पहुंच जाते हैं, तो कभी शहर के मंदिरों में आम श्रद्धालुओं की तरह लाइन में खड़े नजर आते हैं। वीआईपी कल्चर से दूरी बनाने की उनकी यह प्रवृत्ति उन्हें अन्य राजनेताओं से अलग खड़ा करती है। सरगुजा संभाग की राजनीतिक जमीन पर उनकी यह सादगी अब उनकी पहचान बन चुकी है।
जनता के बीच चर्चा का केंद्र बना यह अंदाज
आज के दौर में जहां छोटे से लेकर बड़े जनप्रतिनिधि तक अपनी शान-शौकत और काफिले के साथ चलना अपनी प्रतिष्ठा का प्रतीक मानते हैं, वहीं कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल का इस तरह स्कूटर पर सवार होकर शहर की गलियों में घूमना और आम जनता से सीधे जुड़ना एक बड़ा राजनीतिक संदेश देता है। चाय की दुकानों से लेकर चौराहों तक, सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म्स पर लोग उनकी इस सादगी की मुक्तकंठ से सराहना कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि सत्ता की धौंस और दूरी से दूर रहने वाले ऐसे राजनेता ही वास्तव में जनता के दिल में राज करते हैं। दुर्गा उत्सव के इन पावन दिनों में मां दुर्गा के दरबार में माथा टेकने पहुंचे मंत्री का यह रूप अंबिकापुर की गलियों में एक सुखद चर्चा का विषय बन गया है, जो यह साबित करता है कि पद चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, इंसानियत और ज़मीन से जुड़ाव ही सबसे ऊपर होता है।

















