“`
- सरगुजा जिले के महिला आजीविका क्लस्टर संगठनों में 22 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक चरणबद्ध बैठकों का आयोजन।
- कलेक्टर के निर्देश एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के मार्गदर्शन में तैयार हुआ खाका।
- कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, रेशम, स्वास्थ्य, आयुष एवं ग्रामीण विकास विभाग एक ही मंच पर आए।
- लखपति दीदियों की मांग और आवश्यकता के आधार पर तैयार होगी संसंकुलवार (Cluster-wise) आजीविका कार्ययोजना।
- बिहान (NRLM) और अन्य विभागीय योजनाओं के अभिसरण (Convergence) से सामुदायिक परिसंपत्तियों का होगा बेहतर उपयोग।
अंबिकापुर (सरगुजा)। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में ग्रामीण अंचल की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने और स्वावलंबन से समृद्धि की ओर अग्रसर ‘लखपति दीदियों’ की आय में स्थायी वृद्धि दर्ज करने के उद्देश्य से एक बड़ी प्रशासनिक पहल की शुरुआत हुई है। जिले में लखपति दीदियों की आजीविका के अवसरों का विस्तार करने और विभिन्न शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ उन तक पहुंचाने के लिए 22 अक्टूबर से विभागीय अभिसरण (Departmental Convergence) बैठकों का आयोजन शुरू हो गया है।
यह महत्वपूर्ण अभियान जिला कलेक्टर के दिशा-निर्देशों तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। योजना के अनुसार, 22 अक्टूबर से शुरू हुआ यह बैठकों का दौर 28 अक्टूबर तक जिले के सभी महिला आजीविका क्लस्टर संगठनों (संकुल संगठनों) में चरणबद्ध तरीके से आयोजित किया जाएगा। इस दौरान शासन के प्रमुख विकासात्मक एवं सेवा प्रदाता विभाग एक मंच पर आकर ग्रामीण महिला स्व-सहायता समूहों के सदस्यों से सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं।
अभियान का मुख्य उद्देश्य: आजीविका का सशक्तिकरण और योजनाओं का एकीकरण
विभागीय अभिसरण बैठकों का मुख्य ध्येय केवल योजनाओं की जानकारी देना मात्र नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में कार्य कर रही महिलाओं और लखपति दीदियों की वास्तविक जमीनी जरूरतों, प्राथमिकताओं और मांगों को समझना है। बैठकों के माध्यम से प्रत्येक क्लस्टर संगठन स्तर पर महिलाओं के साथ खुली चर्चा की जा रही है। प्राप्त फीडबैक और मांगों के आधार पर एक सुदृढ़ कार्ययोजना (Action Plan) तैयार की जाएगी, जिसके माध्यम से पात्र महिलाओं को संबंधित विभागों की व्यक्तिगत एवं सामूहिक योजनाओं से प्राथमिकता के आधार पर लाभान्वित किया जाएगा।
पहले दिन की बैठकों में कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, रेशम उत्पादन, स्वास्थ्य, आयुष एवं ग्रामीण विकास विभाग के जिला व ब्लॉक स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं, अनुदान, सब्सिडी और तकनीकी सहायता के विषय में दीदियों को विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की।
कृषि एवं पशुपालन विभाग: वैज्ञानिक खेती और पशुधन सुरक्षा पर जोर
कृषि विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। बैठकों में कृषि विभाग द्वारा निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर मार्गदर्शन प्रदान किया गया:
- खेती बचाओ अभियान: उपजाऊ भूमि की सुरक्षा, जैविक खादों के प्रयोग और पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों के संबंध में महिलाओं को जागरूक किया गया।
- स्वास्थ्य धारा समृद्ध किसान योजना: भूमि की सेहत सुधारने और फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए चलाई जा रही इस योजना की बारीकियों से महिलाओं को अवगत कराया गया।
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card): अधिकारियों ने बताया कि किस प्रकार मिट्टी परीक्षण कराकर खेत की उर्वरता का सटीक आकलन किया जा सकता है। मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही उपयुक्त फसल का चयन करने और संतुलित मात्रा में रासायनिक व जैविक उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी गई, जिससे लागत में कमी आए और मुनाफा बढ़े।
दूसरी ओर, पशुपालन विभाग ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुधन की भूमिका को रेखांकित किया। अधिकारियों ने ‘पशु बीमा योजना’ की पात्रता, प्रीमियम दरों और मिलने वाले लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। महिलाओं को प्रेरित किया गया कि वे अपने दुधारू पशुओं, बकरियों और अन्य मवेशियों का बीमा अवश्य कराएं ताकि किसी भी आकस्मिक नुकसान या बीमारी की स्थिति में उनके आर्थिक हितों की रक्षा हो सके। इसके अलावा डेरी विकास और नस्ल सुधार कार्यक्रमों से जुड़कर अतिरिक्त आय अर्जित करने के तरीके भी बताए गए।
उद्यानिकी एवं रेशम उत्पादन: आय बढ़ाने के नए और लाभदायक विकल्प
पारंपरिक खाद्यान्न फसलों के अलावा फल, फूल, सब्जी और रेशम उत्पादन जैसे क्षेत्रों को आजीविका संवर्धन का सबसे सशक्त माध्यम माना जा रहा है। अभिसरण बैठकों में इन दोनों विभागों ने महिलाओं के सामने नई संभावनाएं रखीं:
उद्यानिकी (Horticulture) विभाग की योजनाएं:
उद्यानिकी विभाग के प्रतिनिधियों ने महिलाओं को कम जमीन में अधिक लाभ देने वाली बागवानी फसलों की ओर आकर्षित किया। बैठकों में दी गई प्रमुख जानकारियां निम्नलिखित हैं:
- फलदार पौधों का रोपण: आम, अमरूद, पपीता, नींबू और मुनगा जैसे व्यावसायिक एवं पोषणयुक्त फलदार वृक्षों के रोपण हेतु उपलब्ध सहायता।
- सब्सिडी व अनुदान: बाड़ी विकास योजना, ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) प्रणाली, पॉलीहाउस एवं ग्रीनहाउस निर्माण तथा शेडनेट के लिए शासकीय योजनाओं के तहत मिलने वाले भारी अनुदान की प्रक्रिया समझाई गई।
- सब्जी एवं पुष्प खेती: बेमौसम सब्जियों की खेती और मांग वाले फूलों की खेती से दैनिक आय सृजित करने के गुर सिखाए गए।
रेशम (Sericulture) विभाग से स्वरोजगार:
सरगुजा जिले की जलवायु और प्राकृतिक परिवेश रेशम कीट पालन के लिए अत्यंत अनुकूल है। रेशम विभाग के अधिकारियों ने क्लस्टर बैठकों में महिलाओं को कोकून उत्पादन से जुड़ने की तकनीक बताई:
- रेशम कीट पालन (Tasar & Mulberry Sericulture): अर्जुन एवं शहतूत के पौधों पर रेशम कीटों के रख-रखाव की जानकारी दी गई।
- कोकून उत्पादन और आय: महिलाओं को बताया गया कि वे वर्ष में सीमित समय के भीतर कोकून उत्पादन कर सीधे बाजार या विभागीय क्रय केंद्रों के माध्यम से अच्छी-खासी आमदनी प्राप्त कर सकती हैं।
- प्रशिक्षण एवं औजार: रेशम विभाग द्वारा समूहों को दिए जाने वाले नि:शुल्क प्रशिक्षण, टूलकिट और बुनियादी ढांचे से जुड़ी सहायता की जानकारी साझा की गई।
विभागीय समन्वय और सामुदायिक परिसंपत्तियों का इष्टतम उपयोग
बैठक का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM – बिहान) और वीबी-जी राम जी (VB-G RAM G) जैसी योजनाओं के अंतर्गत संचालित गतिविधियों का अन्य विभागीय योजनाओं के साथ तालमेल बैठाना रहा।
बैठकों में ग्रामीण विकास कार्यों और महिला आजीविका गतिविधियों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया। इसके तहत गांव-गांव में निर्मित सामुदायिक परिसंपत्तियों (Community Assets) जैसे—सामुदायिक आवर्ती भवन, शेड, जल निकाय, गोठान और आजीविका केंद्रों का बहुउद्देशीय उपयोग करने की रणनीति पर मंथन हुआ। इससे महिला समूहों को कार्यस्थल की समस्या से मुक्ति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर ही प्रसंस्करण (Processing) व पैकेजिंग के कार्य संभव हो सकेंगे।
स्वास्थ्य एवं आयुष सेवाएं: स्वस्थ नारी से ही समृद्ध परिवार
आर्थिक सशक्तीकरण के साथ-साथ महिलाओं का शारीरिक स्वास्थ्य और पोषण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस सोच को साकार करते हुए स्वास्थ्य एवं आयुष विभाग ने बैठकों में सक्रिय भागीदारी निभाई।
राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत उपस्थित अधिकारियों ने महिलाओं को आयुष स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने की अपील की:
- निःशुल्क दवाएं एवं परामर्श: आयुष औषधालयों और स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धति की नि:शुल्क औषधियों की जानकारी दी गई।
- आयुष स्वास्थ्य शिविर: ग्रामीण अंचलों में समय-समय पर आयोजित होने वाले नि:शुल्क जांच एवं उपचार शिविरों में भाग लेने हेतु महिलाओं को जागरूक किया गया।
- गंभीर एवं जीवनशैली संबंधी बीमारियों की जांच: महिलाओं में तेजी से बढ़ रही थायराइड (Thyroid), एनीमिया (रक्तअल्पता), उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों के शुरुआती लक्षणों, मुफ्त जांच सुविधाओं और सटीक उपचार के बारे में विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
बैठकों का खाका और कार्ययोजना (22 से 28 अक्टूबर)
सरगुजा जिले के प्रशासनिक ढांचे के तहत यह अभियान ब्लॉक और क्लस्टर स्तर तक व्यवस्थित रूप से संचालित किया जा रहा है। बैठकों का विवरण संक्षेप में नीचे दिया गया है:
| समयावधि | आयोजन स्थल | प्रमुख प्रतिभागी | मुख्य एजेंडा |
|---|---|---|---|
| 22 से 28 अक्टूबर (चरणबद्ध) | जिले के समस्त महिला आजीविका क्लस्टर संगठन (संकुल) | विभागीय अधिकारी, क्लस्टर कैडर, लखपति दीदियां, SHG सदस्य | योजनाओं की जानकारी, मांग आधारित कार्ययोजना निर्माण, ऑन-द-स्पॉट आवेदन संकलन |
| प्रथम दिवस (22 अक्टूबर) | चिह्नित प्रथम चरण के संकुल संगठन | कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, रेशम, स्वास्थ्य, आयुष एवं बिहान की टीम |
लखपति दीदियों की प्रतिक्रिया और भविष्य का रोडमैप
अभिसरण बैठकों के पहले ही दिन से ग्रामीण महिलाओं और लखपति दीदियों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। दूर-दराज के गांवों से आकर बैठकों में शामिल हुई स्व-सहायता समूह की सदस्यों ने खुलकर अपनी बात रखी और अपनी व्यावसायिक आवश्यकताओं को अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया।
बैठक में शामिल हुई दीदियों का कहना है कि अक्सर उन्हें विभागीय योजनाओं की जानकारी के अभाव में दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब जब तमाम विभाग स्वयं उनके क्लस्टर संगठन के दरवाजे पर पहुंचे हैं, तो इससे न केवल उनका समय बचेगा बल्कि उन्हें अपनी आवश्यकता के अनुसार सही योजना चुनने की आजादी भी मिलेगी।
भावी रणनीति: 28 अक्टूबर को बैठकों का दौर समाप्त होने के पश्चात, सभी क्लस्टर संगठनों से प्राप्त आवेदनों, मांगों और आवश्यकताओं को संकलित कर जिला स्तर पर एक समेकित ‘आजीविका संवर्धन डेटाबेस’ तैयार किया जाएगा। इसके बाद संबंधित विभागों द्वारा बजट व संसाधनों का आवंटन कर स्वीकृतियां जारी की जाएंगी, जिससे सरगुजा की हजारों ग्रामीण महिलाओं को सीधे रोजगार और आय-वृद्धि के साधनों से जोड़ा जा सकेगा।
सरगुजा जिले में 22 से 28 अक्टूबर तक आयोजित हो रही यह विभागीय अभिसरण बैठकें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होंगी। कलेक्टर के कुशल नेतृत्व एवं जिला पंचायत सीईओ के सतत मार्गदर्शन में शुरू हुई इस पहल से न केवल लखपति दीदियों के सपनों को नए पंख मिलेंगे, बल्कि सरगुजा जिला महिला सशक्तीकरण, स्वास्थ्य सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में राज्य में एक नया आदर्श स्थापित करेगा।
© प्रदेश खबर डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क | सर्वाधिकार सुरक्षित।
सरगुजा, छत्तीसगढ़ से विशेष रिपोर्ट।
“`














