विशेष कवरेज: 21वीं सदी की बदलती वैश्विक व्यवस्था और भारत का ऐतिहासिक रोडमैप
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विश्व शिखर सम्मेलन में ऐतिहासिक संबोधन — उत्सव, उमंग, तकनीक और वैश्विक शांति पर भारत की विस्तृत रणनीति
नई दिल्ली: भारत जब अपने पारंपरिक त्योहारों के आनंद, सांस्कृतिक उमंग और उत्साह में सराबोर है, ऐसे में देश की राजधानी में वैश्विक विचारकों, राष्ट्राध्यक्षों और उद्योग जगत के दिग्गजों का एक विशाल समागम देखने को मिला। ‘एनडीटीवी वर्ल्ड समिट’ के विशेष मंच से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अत्यंत दूरदर्शी और विश्लेषणात्मक भाषण दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज दुनिया जिस तेजी से एक नए World Order (विश्व व्यवस्था) की ओर बढ़ रही है, उसका सीधा असर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ रहा है। ऐसे दौर में भारत न केवल एक मूकदर्शक की भूमिका से बाहर निकल चुका है, बल्कि नई वैश्विक दिशा तय करने वाला प्रमुख स्तंभ बन गया है।
— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
1. उत्सव का वातावरण और वैश्विक समागम का वैश्विक संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत भारत के जीवंत सांस्कृतिक परिवेश का उल्लेख करते हुए की। उन्होंने कहा कि भारत में यह समय केवल कैलेंडर की तिथियों का नहीं, बल्कि जन-जन के उल्लास का है। नवरात्रि, विजयदशमी, धनतेरस, दीपावली और छठ पूजा जैसे महान पर्व भारत की सामाजिक एकता, ऊर्जा और सकारात्मकता को प्रदर्शित करते हैं। जब कोई देश अंदर से ऊर्जावान और प्रसन्न होता है, तब वह दुनिया के सामने अपनी शक्ति और संभावनाओं का प्रदर्शन अधिक आत्मविश्वास के साथ कर पाता है।
उन्होंने विदेशों से आए अतिथियों और प्रतिनिधियों का भारत की धरती पर स्वागत करते हुए कहा कि भारत की यह पावन धरा हमेशा से ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (पूरा विश्व एक परिवार है) के विचार को जीती आई है। आज जब वैश्विक स्तर पर कई तरह की अनिश्चितताएं, तनाव और आर्थिक चुनौतियां मौजूद हैं, तब भारत की यह सकारात्मक ऊर्जा पूरी दुनिया के लिए आशा की एक नई किरण बनकर उभरती है।
2. बदलता World Order और सामान्य नागरिक का जीवन
प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ‘वर्ल्ड ऑर्डर’ केवल कूटनीतिक गलियारों या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में चर्चा का विषय नहीं रह गया है। आज दुनिया के किसी भी कोने में होने वाली घटना, युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव या व्यापारिक प्रतिबंध सीधे तौर पर आम नागरिक के रसोई के बजट, ईंधन की कीमतों, डिजिटल कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसरों को प्रभावित करते हैं।
प्रधानमंत्री ने विस्तार से समझाया कि कैसे अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chains) में रुकावट आने से आम जनता को महंगाई का सामना करना पड़ता है। इसीलिए, एक पारदर्शी, नियम-आधारित और समावेशी वैश्विक व्यवस्था का निर्माण करना आज के युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वर्ल्ड समिट जैसे आयोजनों की सार्थकता इसी में है कि वे केवल समस्याओं पर चर्चा न करें, बल्कि वैश्विक कल्याण के लिए ठोस और टिकाऊ समाधान प्रस्तुत करें।
3. टेक्नोलॉजी का सशक्तीकरण और ‘माइंडपावर’ पर वैश्विक भरोसा
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के तकनीकी बदलाव की यात्रा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक समय था जब भारत को केवल एक बड़े बाजार या एक सस्ते श्रमबल वाले देश के रूप में देखा जाता था। दुनिया भारत के ‘ब्रेनपावर’ को मानती तो थी, लेकिन उसका उपयोग प्राथमिक स्तर के कार्यों तक सीमित रहता था। परंतु पिछले एक दशक में भारत ने जिस गति से आत्मनिर्भरता और नवाचार के क्षेत्र में कदम बढ़ाए हैं, उसने वैश्विक नजरिए को पूरी तरह बदल दिया है।
आज दुनिया भारत के केवल ब्रेनपावर पर ही नहीं, बल्कि भारत के ‘माइंडपावर’ (Intellectual Capability & Innovation) पर अटूट विश्वास करती है। भारत अब केवल सेवाओं का निर्यात करने वाला देश नहीं है, बल्कि वह आधुनिक तकनीक, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है।
सेमीकंडक्टर क्रांति: 2nm और 3nm चिप्स की ओर भारत के कदम
प्रधानमंत्री ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि भारतीय छात्रों, इंजीनियरों और शोधकर्ताओं ने अब तक 325 से अधिक स्वदेशी चिप्स का डिजाइन और विकास सफलता पूर्वक पूरा कर लिया है। भारत अब केवल चिप असेंबल करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अत्याधुनिक 2nm (नैनोमीटर) और 3nm तकनीक वाली चिप्स के डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को देश में ही आकार दे रहा है।
- तकनीकी आत्मनिर्भरता: सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की सफलता वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूती प्रदान करेगी।
- रोजगार के अवसर: इस क्रांति से देश के लाखों युवाओं को उच्च-तकनीकी (High-Tech) क्षेत्र में नए और गुणवत्तापूर्ण रोजगार मिलेंगे।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा: भारत जल्द ही दुनिया के उन चुने हुए देशों की सूची में शामिल होगा जो सेमीकंडक्टर तकनीक के प्रमुख केंद्र हैं।
4. ‘विकसित भारत 2047’: वैश्विक समृद्धि की गारंटी
प्रधानमंत्री ने दोहराया कि भारत सरकार का लक्ष्य केवल अल्पकालिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के महासंकल्प को सिद्ध करना है। जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब देश हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर और समृद्ध होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का विकास कभी भी आक्रामक या स्वार्थी नहीं रहा है। इतिहास साक्षी है कि जब-जब भारत मजबूत हुआ है, तब-तब दुनिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि बढ़ी है।
भारत की आर्थिक वृद्धि दर (GDP Growth Rate) आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज है। भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), जैसे कि UPI, आधार और डिजिलॉकर, आज दुनिया के कई देशों के लिए अध्ययन और अपनाने का विषय बन चुका है। भारत अपनी इस सफलता को केवल अपने तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि ग्लोबल साउथ (Global South) के विकासशील और गरीब देशों के साथ इसे साझा कर रहा है।
‘विकसित भारत’ के प्रमुख 5 स्तंभ:
- आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे, आधुनिक रेलवे और हरित ऊर्जा पोर्ट।
- तकनीकी नेतृत्व: AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और अंतरिक्ष विज्ञान में अग्रणी भूमिका।
- समावेशी विकास: समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ (Direct Benefit Transfer)।
- युवा शक्ति और कौशल: दुनिया की सबसे युवा आबादी को आधुनिक कौशल से लैस करना।
5. वैश्विक कूटनीति, शांति और पश्चिम एशिया (West Asia) की स्थिति
अंतरराष्ट्रीय मामलों और विदेश नीति पर बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के स्पष्ट और निष्पक्ष रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से शांति का समर्थक रहा है। आज जब विश्व के कई हिस्से युद्ध, संघर्ष और तनाव की स्थिति से गुजर रहे हैं, तब भारत लगातार संवाद (Dialogue) और कूटनीति (Diplomacy) का रास्ता अपनाने का आग्रह कर रहा है।
हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई अपनी वार्ताओं, विशेष रूप से इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सहित अन्य वैश्विक नेताओं के साथ हुई चर्चाओं का संदर्भ देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा मानवीय दृष्टिकोण और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में शांति और स्थिरता न केवल उस क्षेत्र के लिए बल्कि पूरे विश्व की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है।
भारत ने स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया है कि यह युग युद्ध का युग नहीं है (This is not an era of war)। सभी विवादों का समाधान केवल शांतिपूर्ण बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में ही निकाला जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संबोधन केवल एक भाषण नहीं था, बल्कि यह 21वीं सदी के भारत की एक नई तस्वीर और वैश्विक दृष्टिकोण का दस्तावेज था। एक तरफ भारत अपने पारंपरिक त्यौहारों और सांस्कृतिक विरासत का जश्न मना रहा है, तो दूसरी तरफ वह अत्याधुनिक तकनीक, आर्थिक प्रगति और शांतिपूर्ण वैश्विक कूटनीति के जरिए दुनिया को एक नया रास्ता दिखा रहा है।
वर्ल्ड समिट के इस मंच से निकला संदेश स्पष्ट है: आने वाला समय भारत का है, और भारत की यह प्रगति पूरी दुनिया के कल्याण और स्थिरता का आधार बनेगी। देशवासी उत्सव और उमंग के इस माहौल में अपनी राष्ट्रीय जिम्मेदारियों को समझते हुए ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अपना योगदान देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।











