हरियाणा: नायब सैनी सरकार के दो साल पूरे होने पर CLP नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा का तीखा हमला, सरकार के वादों की खोली पोल
हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नायब सिंह सैनी सरकार के दो साल का कार्यकाल पूरा होने के साथ ही राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है. विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के कामकाज, विकास के दावों और चुनावी वादों को लेकर चौतरफा घेराबंदी शुरू कर दी है. इसी कड़ी में हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के विधायक दल (CLP) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार के रिपोर्ट कार्ड का कच्चा-चिट्ठा खोलते हुए कड़े प्रहार किए हैं.
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार पर निशाना साधते हुए मुख्य रूप से दो बड़े वादों—महिलाओं को हर महीने 2,100 रुपये देने की घोषणा और प्रदेश में 10 आधुनिक औद्योगिक शहर (IMT) बनाकर ग्रामीण युवाओं को रोजगार देने के वादे—पर सवाल खड़े किए हैं. हुड्डा का कहना है कि सरकार ने जनता से बड़े-बड़े वादे करके सत्ता तो हासिल कर ली, लेकिन धरातल पर उन वादों को पूरा करने के बजाय पेचीदा शर्तें थोपकर जनता को छला गया है.
1. महिलाओं को 2,100 रुपये प्रति माह देने के वादे पर तंज
चुनाव के दौरान भाजपा ने हरियाणा की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए हर महीने 2,100 रुपये देने का बड़ा संकल्प लिया था. इसे पार्टी के संकल्प पत्र का एक अहम हिस्सा बताया गया था. हालांकि, जैसे ही सरकार का कार्यकाल आगे बढ़ा, इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े होने लगे.
“मुख्यमंत्री जी का संकल्प था कि हरियाणा की महिलाओं को हर महीने 2,100 रुपए दिए जाएंगे- लेकिन फिर बहुत सारी शर्तें लगाकर महिलाओं को इससे वंचित कर दिया गया।”
— भूपेंद्र सिंह हुड्डा, CLP नेता, हरियाणा
सीएलपी नेता ने आरोप लगाया कि सरकार ने महिलाओं से वादा तो धूमधाम से किया था, लेकिन जब लाभ देने की बारी आई, तो उसमें तमाम तरह की जटिल शर्तें, आय सीमा और दस्तावेजी पाबंदियां जोड़ दी गईं. इसके चलते बड़ी संख्या में महिलाएं इस योजना के लाभ से वंचित रह गईं. हुड्डा ने कहा कि सरकार की नीयत स्पष्ट नहीं है और जनता के साथ खुलेआम घोषणाओं के नाम पर छलावा किया जा रहा है.
2. 10 आधुनिक औद्योगिक शहर (Industrial Cities) और युवाओं के रोजगार पर प्रहार
बेरोजगारी की मार झेल रहे हरियाणा के युवाओं के लिए सरकार ने अपने एजेंडे में यह वादा किया था कि राज्य में 10 आधुनिक औद्योगिक शहर (Modern Industrial Cities / IMTs) विकसित किए जाएंगे. इन शहरों के जरिए स्थानीय और ग्रामीण युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलने का दावा किया गया था.
इस वादे पर करारा प्रहार करते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा:
“इसके साथ ही वादा किया था कि हरियाणा में 10 आधुनिक औद्योगिक शहर बनाएंगे, जहां गांव के युवाओं को रोजगार दिया जाएगा- लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।”
— भूपेंद्र सिंह हुड्डा
हुड्डा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि आज हरियाणा बेरोजगारी के मामले में देश में शीर्ष राज्यों की श्रेणी में खड़ा है. राज्य में न तो कोई नई औद्योगिक नीति जमीन पर उतर पाई है और न ही वे 10 आधुनिक शहर कहीं नजर आते हैं. गुरुग्राम और अन्य क्षेत्रों में निवेश के नाम पर केवल कागजी आंकड़े परोसे जा रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि धरातल पर एक भी नया बड़ा प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ है, जिससे युवाओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया है.
3. विकास के दावों की खुली पोल और बिगड़ती वित्तीय स्थिति
नायब सैनी सरकार के दो साल पूरे होने पर पेश किए गए रिपोर्ट कार्ड को ‘झूठा’ करार देते हुए हुड्डा ने कहा कि सरकार विज्ञापनों और झूठे प्रचार के सहारे अपनी पीठ थपथपा रही है, जबकि प्रदेश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचा चरमरा चुका है:
- कर्ज का बोझ: हरियाणा पर कर्ज का आंकड़ा बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है, जिससे हर हरियाणवी नागरिक पर वित्तीय बोझ लगातार बढ़ रहा है।
- बेरोजगारी और विकास दर: नीति आयोग और अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य बेरोजगारी के मामले में पिछड़ रहा है और विकास दर में भी हरियाणा अपनी सही क्षमता से काफी पीछे (लगभग 14वें स्थान पर) चल रहा है.
- कृषि और किसान वर्ग: किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और अन्य वादों पर सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है. मंडियों में किसानों को परेशान होना पड़ रहा है और बिजली के निजीकरण व महंगे दामों ने खेती की लागत को और बढ़ा दिया है.
4. कांग्रेस का आक्रामक रुख और राजनीतिक भविष्य की रणनीति
भूपेंद्र सिंह हुड्डा के इन बयनों से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी नायब सैनी सरकार को सड़क से लेकर सदन तक घेरने की पूरी रणनीति बना चुकी है. सरकार के दो साल के जश्न के ठीक उलट कांग्रेस इसे ‘विफलता के दो साल’ के रूप में पेश कर रही है. महिला सम्मान योजना, बेरोजगारी, कानून व्यवस्था और औद्योगिक विकास जैसे मुद्दों को कांग्रेस ने आगामी राजनीतिक संघर्ष का मुख्य हथियार बना लिया है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार इन बुनियादी मुद्दों और जनता से किए गए वादों पर संतोषजनक जवाब नहीं देती है, तो आने वाले समय में जनता का आक्रोश और अधिक बढ़ सकता है, जिसका राजनीतिक लाभ उठाने के लिए विपक्ष पूरी तरह तैयार बैठा है.













