हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत और राजनीतिक बयानबाजी
चंडीगढ़/हरियाणा: हरियाणा में नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के कार्यकाल को दो साल पूरे हो चुके हैं। सरकार जहां अपनी उपलब्धियों के बड़े-बड़े दावे पेश कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवाओं के बदतर हालातों को लेकर विपक्ष और आम जनता तीखे सवाल खड़े कर रही है। राज्य के अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, डॉक्टरों की कमी और आयुष्मान भारत योजना के तहत फंड अटकने के मामलों ने सरकार के दावों की पोल खोल दी है।
विपक्ष के तीखे हमले: “दावे बड़े, जमीन पर कुछ नहीं”
स्वास्थ्य व्यवस्था के मौजूदा संकट को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार ने जनता से हर जिले में मेडिकल कॉलेज, डायलिसिस सेंटर और आईसीयू स्थापित करने के बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।
विपक्ष का आरोप है कि आज प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं, और न ही मरीजों के लिए जीवनरक्षक दवाइयां और एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर जिला स्तर तक के अस्पतालों में स्वास्थ्य ढांचे की स्थिति दयनीय बनी हुई है।
आयुष्मान योजना और फंड का संकट
बीजेपी सरकार ने चुनाव और अपने घोषणापत्र में यह बड़ा वादा किया था कि ‘आयुष्मान भारत’ योजना के तहत लोगों को 5 लाख से लेकर 10 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिलेगा, साथ ही 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को 5 लाख रुपए तक का अतिरिक्त मुफ्त इलाज मुहैया कराया जाएगा।
लेकिन जमीनी हकीकत यह रही है कि कई बार अस्पतालों और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) को भुगतान में भारी देरी और फंड की कमी के चलते इलाज सेवाएं बाधित करनी पड़ी हैं। निजी और अनुबंधित अस्पतालों को समय पर सरकारी फंड न मिलने के कारण मरीजों को बीच में ही इलाज बंद होने या दर-दर भटकने की मजबूरियों का सामना करना पड़ा है। हालांकि, बाद में सरकार द्वारा आश्वासन और कुछ बजट जारी करने के बाद सेवाओं को दोबारा पटरी पर लाने के दावे किए गए, लेकिन वित्तीय प्रबंधन को लेकर अनिश्चितता अब भी बनी हुई है।
सरकार का पक्ष और दो साल का रिपोर्ट कार्ड
दूसरी तरफ, सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर भाजपा प्रदेश नेतृत्व और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने रिपोर्ट कार्ड में स्वास्थ्य क्षेत्र को सुधारने के लिए कई नए कदमों की घोषणा की है। सरकार का दावा है कि आयुष्मान और चिरायु योजना के दायरे को लगातार बढ़ाया जा रहा है।
“सरकार ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ाने, डॉक्टरों व सहायक स्टाफ को स्पेशल इंसेंटिव देने, डायग्नोस्टिक सेवाओं (MRI, CT Scan) का विस्तार करने और रिक्त पदों को भरने के लिए ओपन भर्ती व विशेष प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की हैं।”
– शासन और स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्र
इसके साथ ही प्रदेश अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने अपने वक्तव्यों में यह भी रेखांकित किया है कि राज्य में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए टेली-मेडिसिन, ‘स्वस्थ हरियाणा-समृद्ध हरियाणा’ अभियान और नई मेडिकल परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है।
एक तरफ जहां सरकार डिजिटल मॉनिटरिंग, इंसेंटिव और नई स्वास्थ्य परियोजनाओं के जरिए व्यवस्था को दुरुस्त करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर डॉक्टरों के खाली पद, चरमराई स्वास्थ्य सेवाएं और आयुष्मान योजना के सुचारू क्रियान्वयन में आने वाली अड़चनें आम जनता के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई हैं। हरियाणा की जनता आज भी एक ऐसी मजबूत और पारदर्शी स्वास्थ्य प्रणाली की उम्मीद लगाए बैठी है, जो कागजी दावों से इतर जमीनी स्तर पर असरदार साबित हो सके।













