अरुणाचल में चीनी सैनिकों के साथ झड़प और मोदी सरकार की चुप्पी
नई दिल्ली: भारत-चीन सीमा विवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर एक बार फिर से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर देश की सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों को छिपाने और चीन के सामने घुटने टेकने का सीधा आरोप लगाया है। यह पूरा विवाद भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक (DG) शत्रुजीत कपूर द्वारा अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चीनी सैनिकों के साथ लगातार हो रही झड़पों को लेकर दिए गए एक बड़े खुलासे के बाद सामने आया है।
— ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर द्वारा किया गया आधिकारिक खुलासा
ITBP प्रमुख के खुलासे ने खोली सरकार के दावों की पोल
भारतीय सीमा की रक्षा करने वाली प्रमुख अर्धसैनिक बल ITBP के शीर्ष अधिकारी शत्रुजीत कपूर द्वारा दिए गए इस बयान ने देश के रक्षा तंत्र और कूटनीति पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां केंद्र सरकार और उसके नुमाइंदे सीमा पर सब कुछ सामान्य होने और शांति का दावा करते रहे हैं, वहीं देश के सुरक्षा बल के मुखिया ने यह स्वीकार किया है कि अरुणाचल प्रदेश के कई सेक्टरों में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) यानी चीनी सैनिकों के साथ झड़पें जारी हैं।
कांग्रेस पार्टी ने इस खुलासे को आधार बनाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और प्रेस के माध्यम से मोदी सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। पार्टी का मुख्य आरोप है कि इस साल जुलाई महीने से ही अरुणाचल सीमा पर तनाव और झड़पों की खबरें अंदरखाने आ रही थीं, लेकिन चुनावी और राजनीतिक नफा-नुकसान को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने इन संवेदनशील जानकारियों को देश की जनता से छिपाने का काम किया।
BRICS सम्मेलन और कूटनीतिक विरोधाभास
कांग्रेस पार्टी ने अपने आक्रामक बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस कूटनीतिक रुख पर भी सवाल उठाया है, जिसमें वे एक तरफ चीन के साथ सीमा पर गंभीर सैन्य तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नजर आए। पार्टी ने विशेष रूप से BRICS सम्मेलन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि जब चीनी सैनिक भारतीय सीमा के भीतर आक्रामक रुख अपना रहे थे और हमारे जवानों के साथ झड़पें हो रही थीं, ठीक उसी समय प्रधानमंत्री मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हंसी-ठिठोली करते और उनका स्वागत करते नजर आए।
मुख्य बिंदु:
- ITBP DG का बयान: शत्रुजीत कपूर ने पुष्टि की कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ सीमा पर फेस-ऑफ (फेस-टू-फेस झड़पें) की स्थिति अभी भी बनी हुई है।
- जुलाई से सुलग रही सीमा: रिपोर्टों के अनुसार, जुलाई से ही अरुणाचल के त्सिंग (Taksing) और आसपास के इलाकों में चीनी सैनिकों द्वारा टेंट गाड़ने और आक्रामकता दिखाने की खबरें थीं।
- शी जिनपिंग के साथ मुलाकात: एक तरफ सीमा पर संघर्ष जारी था, दूसरी तरफ भारत में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान उच्च स्तरीय मेल-जोल देखा गया।
“सैनिकों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा”
कांग्रेस ने तीखे शब्दों में कहा है कि एक तरफ देश के वीर जवान बर्फीली ऊंचाइयों और दुर्गम इलाकों में चीनी सेना की हरकतों का डटकर मुकाबला कर रहे हैं, वहीं देश के प्रधानमंत्री द्वारा कूटनीति के नाम पर ड्रैगन के शीर्ष नेतृत्व के साथ गर्मजोशी दिखाना हमारे सैनिकों के बलिदान और जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वे हर बार देश की क्षेत्रीय अखंडता और सीमाओं की रक्षा के मामले में कमजोर साबित हुए हैं।
कांग्रेस के मुताबिक, देश की जनता के सामने यह स्पष्ट होना चाहिए कि आखिर सरकार ने इन हमलों और झड़पों की आधिकारिक पुष्टि करने से क्यों परहेज किया। क्या कूटनीतिक विफलता को छिपाने के लिए देश की आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता से समझौता किया जा रहा है?
3. ### गद्दारी और क्लीनचिट देने के गंभीर आरोप
कांग्रेस ने अपने आक्रामक राजनीतिक हमले में शब्दों की मर्यादा को पार किए बिना सीधे तौर पर प्रधानमंत्री की राष्ट्र सुरक्षा नीतियों को ‘देश के साथ गद्दारी’ तक करार दे दिया है। उनके अनुसार:
- क्लीनचिट का मुद्दा: साल 2020 की गलवान घाटी की घटना के बाद प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए उस बयान की याद दिलाई गई जिसमें चीन को कथित तौर पर ‘क्लीनचिट’ दी गई थी कि “न कोई हमारी सीमा में घुसा है और न ही कोई चौकी हमारी कब्जे में है।”
- पेट्रोलिंग पॉइंट्स से पीछे हटना: आरोप लगाया गया है कि बफर जोन बनाने और समझौतों के नाम पर भारत ने अपने पारंपरिक पेट्रोलिंग पॉइंट्स (गश्त वाले स्थानों) से पीछे हटना स्वीकार कर लिया है, जिससे भारत की संप्रभुता के दायरे वाले बड़े भूभाग पर चीन का कब्जा आसान हो गया है।
- कमजोर नेतृत्व: विपक्षी दल का यह भी कहना है कि इस ‘कमजोर प्रधानमंत्री’ की नीतियों के कारण भारत की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में रणनीतिक बढ़त कमजोर हुई है और चीन इसका लगातार फायदा उठा रहा है।
रणनीतिक और सामरिक विशेषज्ञों की चिंताएं
रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि लद्दाख के बाद अब अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर चीन की ओर से बढ़ रही गतिविधियां भारत के लिए दीर्घकालिक चिंता का विषय हैं। ITBP महानिदेशक द्वारा यह भी बताया गया है कि सीमा पर स्थायी रक्षा प्रणालियों को मजबूत करने के लिए अगले तीन वर्षों में बड़े पैमाने पर भूमिगत आश्रयों (Underground Shelters) का निर्माण किया जाएगा, जिससे यह साफ होता है कि सीमा पर हालात सामान्य नहीं हैं और दीर्घकालिक संघर्ष या तनाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ झड़पों की पुष्टि होने के बाद देश का राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है। जहां एक तरफ सुरक्षा बल सीमा की रक्षा के लिए अपनी तैयारियों को और पुख्ता कर रहे हैं—जैसे कि ‘शूरवीर’ कमांडो यूनिट्स का गठन और बंकरों का निर्माण—वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर घमासान मचा है कि सरकार ने सीमा के सच को देश से क्यों छिपाया। आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक यह मुद्दा सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।













