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“चंदा और ज़मीन सौदों में खेल से आहत सनातनी”: T.S. Singhdeo का बड़ा बयान, ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ में होंगे शामिल






सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा और टी.एस. सिंहदेव का बयान: विस्तृत समाचार अपडेट


विशेष समाचार अपडेट

श्री राम मंदिर चंदा और भूमि विवाद: टी.एस. सिंहदेव के ऐलान के बाद ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ पर देश में सियासी पारा हाई

विषय: दिग्विजय सिंह द्वारा शुरू की गई ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टी.एस. सिंहदेव का समर्थन
प्रकाशन वर्ष: 2026

अयोध्या में भगवान श्री राम मंदिर के निर्माण के नाम पर एकत्रित किए गए चंदे, चढ़ावे और भूमि सौदों में कथित गड़बड़ियों के मुद्दों ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है। इसी सिलसिले में छत्तीसगढ़ के कद्दावर कांग्रेस नेता और पूर्व उप-मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक तीखा और आक्रामक बयान जारी किया है, जिसने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक गर्मा दिया है। सिंहदेव के इस ऐलान के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में निकाली जा रही ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में मुख्य चर्चा का केंद्र बन गई है।

टी.एस. सिंहदेव का तीखा बयान: “सनातनियों की आस्था के साथ खिलवाड़”

छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कांग्रेस नेता टी.एस. सिंहदेव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए देश के वर्तमान राजनीतिक माहौल और धार्मिक प्रबंधन पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर के चंदे, चढ़ावे और भूमि सौदों में जिस तरह की अनियमितताओं और विवादों की खबरें सामने आई हैं, उससे देश का हर सच्चा सनातनी गंभीर रूप से आहत और आक्रोशित है।

सिंहदेव ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की सत्ता पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि यह सब कुछ एक ऐसे राजनीतिक संरक्षण में हुआ है, जिसने धर्म और आस्था का उपयोग सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने और व्यापार चलाने के लिए किया। जनता की धार्मिक भावनाओं को कुंद करके अपने राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करने वालों के खिलाफ अब विरोध स्वर मुखर होने लगे हैं।

“श्री राम मंदिर, अयोध्या के चंदे और चढ़ावे के नाम पर हुई गड़बड़ी और ज़मीन सौदों में हुए खेल से आज देश का हर सच्चा सनातनी आहत भी है और आक्रोशित भी। यह सब उस सरकार के संरक्षण में हुआ है, जिसने धर्म और आस्था के नाम पर सिर्फ़ भावनाओं से खिलवाड़ किया और अपना राजनीतिक कारोबार चलाया।”
— टी.एस. सिंहदेव (वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व उप-मुख्यमंत्री)

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दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’: एक बड़ा जन-आंदोलन

धार्मिक स्थलों की पवित्रता, पारदर्शिता और कथित चंदा चोरों के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने विजयादशमी (दशहरा) के पावन अवसर पर एक ऐतिहासिक पदयात्रा का शुभारंभ किया है। इस यात्रा का नाम ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ रखा गया है, जो सनातन धर्म के स्वाभिमान की रक्षा और सत्य की विजय का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही है।

यात्रा के प्रमुख बिंदु:

  • शुभारंभ: विजयादशमी के अवसर पर मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन स्थित महाकाल की नगरी से।
  • कुल दूरी और लक्ष्य: लगभग 950 से 1000 किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा (पदयात्रा), जो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों व बुंदेलखंड क्षेत्र से होते हुए अयोध्या पहुंचेगी।
  • अनुमानित अवधि: यह यात्रा लगभग 70 दिनों में पूरी होगी, जिसमें हजारों की संख्या में साधु-संत, कांग्रेस कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक हिस्सा ले रहे हैं।
  • रथ और प्रतीक: यात्रा के साथ चल रहे विशेष रथ पर भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की प्रतिमाओं के साथ-साथ देश की पांच पवित्र नदियों (गंगा, यमुना, शिप्रा, नर्मदा और कावेरी) का जल कलश में सुशोभित किया गया है।

टी.एस. सिंहदेव ने किया यात्रा में शामिल होने का ऐलान

दिग्विजय सिंह की इस पहल का समर्थन करते हुए टी.एस. सिंहदेव ने घोषणा की है कि वह स्वयं इस महत्वपूर्ण यात्रा का हिस्सा बनेंगे। उन्होंने देश भर के सनातन प्रेमियों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस वैचारिक और धार्मिक शुद्धता की लड़ाई में बढ़-चढ़कर जुड़ें। सिंहदेव के इस ऐलान से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कांग्रेस संगठन में इस यात्रा को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।

यात्रा के दौरान लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि यह किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के खिलाफ है जिन्होंने धर्म की आड़ में वित्तीय अनियमितताएं की हैं और आस्था के साथ समझौता किया है। यात्रा के मार्ग में “चंदा चोरों, अयोध्या छोड़ो” जैसे नारे भी गूंज रहे हैं, जो सीधे तौर पर मंदिर प्रबंधन और उससे जुड़े ट्रस्ट की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं

इस यात्रा और टी.एस. सिंहदेव तथा दिग्विजय सिंह के बयानों पर सत्ताधारी दल (भाजपा) की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सत्ता पक्ष का कहना है कि चुनाव नजदीक आते ही विपक्ष को अचानक भगवान राम और सनातन धर्म की याद आने लगती है। भाजपा प्रवक्ताओं ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जिन लोगों ने अपने कार्यकाल में राम मंदिर के निर्माण का विरोध किया और राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए, वे आज अचानक धर्म के रक्षक बनने का ढोंग कर रहे हैं।

दूसरी ओर, यात्रा के आयोजकों और समर्थकों का स्पष्ट मानना है कि चंदे के नाम पर हुए कथित घोटालों और जमीनों की खरीद-फरोख्त में हुई धांधली पर पर्दा डालना असंभव है। जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि राम भक्तों द्वारा दिए गए एक-एक पाई का उपयोग कहां और कैसे हुआ।

टी.एस. सिंहदेव के समर्थन और दिग्विजय सिंह की इस पदयात्रा ने देश की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। जैसे-जैसे यह यात्रा उज्जैन से उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए अयोध्या की ओर बढ़ेगी, यह धार्मिक आस्था, वित्तीय पारदर्शिता और राजनीतिक नैतिकता के मुद्दों को राष्ट्रीय पटल पर और अधिक आक्रामक रूप से उठाएगी। आने वाले दिनों में यह यात्रा राजनीतिक सरगर्मी का एक प्रमुख केंद्र बनी रहेगी।

© 2026 समाचार डेस्क | सर्वाधिकार सुरक्षित। यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पोस्ट और समसामयिक राजनीतिक घटनाक्रमों पर आधारित है।


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