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रायपुर : ये खिलौने महज खिलौने ही नहीं, ज्ञान की किताबें भी है….

रायपुर : ये खिलौने महज खिलौने ही नहीं, ज्ञान की किताबें भी है….

खेल-खेल में पाए ज्ञान, यह सिखाती है खिलौने की स्टॉल

जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शिक्षा समागम का आयोजन

प्रदर्शनी में बच्चों को मिल रही नवाचार की जानकारी

रायपुर, 14 नवम्बर 2021खिलौने सिर्फ वह नहीं, जो महज मनोरंजन के काम आए, असल खिलौने तो वह है जो आपका मनोरंजन करने के साथ आपको किसी शिक्षक और किताब की तरह ज्ञान की बातें भी सिखाए। स्कूल में दाखिले के बाद सभी बच्चों का मन स्कूल जाने में और किताबों को पढ़ने में लगे यह जरूरी नहीं, बहुत से ऐसे भी बच्चे होते हैं जो अपने माता-पिता के साथ बीते हुए पल और अपने आसपास के माहौल में गुजरे हुए बचपन से एकाएक अलग होकर स्कूल पहुँचते हैं। यहाँ उन्हें बिल्कुल ही नए माहौल में नए व्यक्ति, जो एक शिक्षक होता है के साथ घण्टों समय बिताना होता है। इन विपरीत माहौल में नए बच्चों को खुद से जोड़ना और उन्हें उनकी पसंद के अनुरूप माहौल में ढल कर उनका सबसे प्रिय बन जाना एक शिक्षक की कौशल कला ही होती है। कुछ ऐसी ही कौशल कला की कहानी है प्राइमरी स्कूल की शिक्षिका श्रीमती वसुन्धरा कुर्रे  की, जो खेल-खेल में स्कूल आने वाले बच्चों को ऐसा ज्ञान देती है कि गाँव का हर बच्चा उनकी क्लास आना चाहता है। अपनी कल्पनाशीलता से तैयार खिलौनों से विद्यार्थियों का नया भविष्य गढ़ने वाली शिक्षिका श्रीमती कुर्रे  द्वारा तैयार हर खिलौने में प्राइमरी का छात्र खुद का मनोरंजन करने के साथ बहुत कुछ ज्ञान की बाते सीख सकता है। यह आप भी खिलौने के स्टॉल में आकर जान सकते हैं।

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       राजधानी के डीडीयू आडिटोरियम में आयोजित जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शिक्षा समागम में नवाचार प्रयोगों पर आधारित प्रदर्शनी बच्चों के साथ अभिभावकों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रही है। यहां नवाचार पर आधारित अनेक स्टॉल लगाए गए है जो आपको देखने और समझने बहुत कुछ सिखायेगी। प्रदर्शनी में खिलौने का स्टॉल भी है। चूंकि खिलौना हर बच्चों से जुड़ा होने के साथ उनके कौतुहल का भी विषय होता है, ऐसे में स्वाभाविक है कि खिलौने वाले स्टॉल में पहुंचना सबको भा रहा है। राज्य भर से चयनित नवाचारों को प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदर्शित करती इस स्टॉल में कोरबा जिले के पाली विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम सरईसिंगार प्राथमिक शाला की शिक्षिका श्रीमती वसुंधरा कुर्रे  द्वारा तैयार प्रत्येक खिलौनों में नवाचार के साथ सीखने और सिखाने की वह कला भी है जो किसी भी बच्चे को उबाऊ नहीं लगेगी। शिक्षिका श्रीमती कुर्रे ने गणित से लेकर पर्यावरण के विषयों को खिलौनों से बहुत रोचक बनाने के साथ कुछ ऐसा किया है कि उनके साथ जुड़ने वाले बच्चों की जिज्ञासा बड़ती चली जाएगी और बच्चा खेल-खेल में बहुत कुछ सीख पायेगा। उन्होंने चाल गोटी, रास्ता ढूंढो, चल रे तुमा बाटे बाट, घोड़ा टाप, लारी लप्पा, सहित 100 से अधिक खिलौने तैयार किये हैं जो महज खिलौने न होकर ज्ञान की किताब भी है। अपनी नवाचारों से मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल सहित अन्य विशिष्ट जनों से प्रशंसा हासिल कर चुकी शिक्षिका श्रीमती कुर्रे की रेसिंग कार वाली खिलौने भी अनूठा है। छोटे-छोटे कारों के शौकीन छोटे बच्चों को रेसिंग कार चलाने में बहुत आनंद और रोमांच आने के साथ दुर्घटनाओं से बचने और यातायात के नियमों की भी जानकारी प्रदान करती है। चित्रकला के माध्यम से जानवरों को पहचानने के आसान और कठिन तरीकों से भी बच्चे बहुत कुछ सीख सकते हैं। खिलौने के स्टॉल में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रतिमाह प्रकाशित होने वाली मासिक अकादमिक पत्रिका चर्चा पत्र से कैसे सभी शिक्षक नवाचार की दिशा में काम करते हैं, यह भी बखूबी बताया गया है। प्रदर्शनी स्थल पर अनुभव आधारित सीख, शुरूवाती वर्षों में सीखना, कोविड लॉकडाउन के दौरान अपनाए गए नवाचारी प्रयास सहित चयनित मॉडलों के माध्यम से भी शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों को बताया जा रहा है। 

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