जैविक कीट नियंत्रण परियोजना के तहत एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण सह कार्यशाला सम्पन्न

जैविक कीट नियंत्रण परियोजना के तहत एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण सह कार्यशाला सम्पन्न

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गरियाबंद/ कृषि विज्ञान केन्द्र में गत दिवस आदिवासी उपयोजना अन्तर्गत जैविक कीट नियंत्रण परियोजना के तहत् एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित कृषकों को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से आये कीट विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वाई. के यदु ने जैविक कीट नियंत्रण के फायदों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कृषि विज्ञान केन्द्र, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. मनीष चौरसिया ने द्वारा जैविक नियंत्रण से संबंधित विस्तृत जानकारी दी एवं डॉ. वाई के. मेश्राम (सहायक प्राध्यापक) एवं डॉ. रश्मि गौराहा (कार्यक्रम सहायक) ने ट्राईकोकार्ड एवं ब्रैकोकार्ड को खेत में लगाने की विधि तथा जैविक कीट नियंत्रण के विषय में जानकारी देते हुए, ट्राईकोग्रामा अंडा परजीवी का धान के तना छेदक में नियंत्रण ब्रकौन का विभिन्न इल्लीयों के नियंत्रण और फेरोमोन ट्रैप का उपयोग करने के लिए किसानों को जागरूक किया। कृषि विभाग के उपसंचालक श्री चंदन रॉय द्वारा जिले के कृषकों को शासन से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी एवं जैविक कीट नियंत्रण प्रणाली से अधिक से अधिक कृषि करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र गरियाबंद के विषय वस्तु विशेषज्ञों मनीष कुमार आर्या ने अनाज, दलहन व तिलहन फसलो में जैविक कल्चर के उपयोग, डॉ. शालू आब्रहम ने प्राकृतिक खेती विषय पर, प्रवीण कुमार जामरे ने जैविक खेती में मृदा एवं जल संरक्षण विषय पर, डॉ. ज्योति रमा भारद्वाज (विषय वस्तु विशेषज्ञ, कीट विज्ञान) ने किसानों को जैविक किट नियंत्रण के लाभ और रासायनिक किट नियंत्रण के नुकसान की जानकारी दी साथ ही तुषार मिश्रा द्वारा, जैविक कीट नियंत्रण विधियों को अपने खेतों में फसलों पर अपनाने के संबंध में कृषि विज्ञान केन्द्र से मदद करते हुए कृषकों से अपनाने की अपील किया। प्रशिक्षण सह कार्यशाला कार्यक्रम में उपस्थिति इफको टोकियो के जिला प्रभारी श्री खान एवं यदु तथा ग्राम भरवामुड़ा, जटियोतोरा एवं हीराबत्तर के 40 कृषक उपस्थित थे। जिन्हें योजनांतर्गत आवश्यक आदान सामग्री का वितरण अतिथियों के द्वारा किया गया।