छत्तीसगढ़ पेट्रोल-डीजल नियम 2026: किसानों को ड्रम और जेरीकेन में ईंधन के लिए मिली छूट






पश्चिम एशिया संकट: किसानों को कृषि कार्य के लिए मिलेगा आवश्यक पेट्रोल-डीजल, कलेक्टर के सख्त निर्देश

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पश्चिम एशिया संकट का असर: किसानों को कृषि कार्य के लिए बिना बाधा मिलेगा पेट्रोल-डीजल, कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जारी किए सख्त निर्देश; लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई

स्थान: जिला मुख्यालय
दिनांक: 23 जून 2026
विभाग: खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग

पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक संकट और इसके परिणामस्वरूप ईंधन आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों के मद्देनजर, राज्य शासन द्वारा एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के कड़े परिपालन में, कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जिले के सभी रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) संचालकों को स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश और राज्य के अन्नदाताओं को कृषि कार्यों के लिए आवश्यक ईंधन की किसी भी कमी का सामना न करना पड़े।

कलेक्टर ने जिले के सभी ईंधन अधिकारियों और पेट्रोल पंप मालिकों को निर्देशित किया है कि खरीफ सीजन की तैयारियों और रबी फसल की कटाई के इस महत्वपूर्ण समय में किसानों को प्राथमिकता के आधार पर मांग के अनुसार पेट्रोल एवं डीजल उपलब्ध कराया जाए। शासन का यह कदम कृषि अर्थव्यवस्था को किसी भी संभावित ईंधन संकट से सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है।

मुख्य नीतिगत निर्णय: नए आदेश के तहत जिले में स्थापित सभी रिटेल आउटलेट पंपों के माध्यम से किसानों को उनके कृषि कार्य से संबंधित वाहनों, जैसे ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि यंत्रों की टंकियों में सीधे उनकी मांग के अनुरूप पेट्रोल और डीजल अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाएगा। किसी भी वैध मांग को खारिज नहीं किया जा सकता।

खेती-किसानी के लिए विशेष छूट: सीधे टंकी के अलावा ड्रम और जेरीकेन में भी मिल सकेगा ईंधन

उल्लेखनीय है कि खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, मंत्रालय नवा रायपुर द्वारा 22 मई 2026 को एक दूरगामी आदेश जारी किया गया था। इस मूल आदेश के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए रिटेल आउटलेट्स से पेट्रोल एवं डीजल का विक्रय केवल और केवल उपभोक्ताओं के वाहनों की इन-बिल्ट टंकी में ही किए जाने के निर्देश हैं। खुले तौर पर ड्रम, बोतल, गैलन या जेरीकेन में ईंधन बेचने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया गया है ताकि जमाखोरी और असुरक्षित भंडारण को रोका जा सके।

परंतु, वर्तमान में जारी कृषि सीजन की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया है। वर्तमान में रबी फसल की कटाई का अंतिम दौर चल रहा है और साथ ही आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों के लिए किसानों को खेतों की जुताई और अन्य कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर ईंधन की आवश्यकता होती है। कई बार कृषि यंत्रों और सिंचाई पंपों को सीधे पेट्रोल पंप तक लाना संभव नहीं होता।

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इसी अनिवार्यता को समझते हुए, शासन ने पूर्व में जारी निर्देशों के तहत एक विशेष व्यवस्था दी है। इसके अंतर्गत:

  • संबंधित क्षेत्र के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी एसडीएम (SDM) द्वारा स्थानीय स्तर पर त्वरित परीक्षण किया जाएगा।
  • कृषि कार्य की प्रामाणिकता की जांच और अनुमति प्राप्त होने के बाद, किसानों को सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करते हुए नियंत्रित तरीके से ड्रम, बोतल और जेरीकेन में भी पेट्रोल-डीजल प्रदान किया जा सकेगा।
  • इस छूट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खेतों में खड़े दूर-दराज के सिंचाई पंप या अन्य भारी मशीनें ईंधन के अभाव में बंद न हों।

अत्यावश्यक सेवाओं और शासकीय निर्माण कार्यों को भी प्रतिबंध से रियायत

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध केवल आम नागरिकों के लिए खुले बर्तनों में ईंधन लेने पर लागू है, लेकिन समाज और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई कड़ियों को इससे मुक्त रखा गया है। किसानों के अलावा निम्नलिखित क्षेत्रों को भी इस प्रतिबंध से विशेष छूट दी गई है:

  1. शासकीय निर्माण कार्य: ऐसे सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जो अपनी तय समय-सीमा (Time-bound) के भीतर पूरे होने हैं, उनके भारी वाहनों और संयंत्रों के लिए आवश्यक ईंधन आपूर्ति।
  2. अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाएं: जीवन रक्षक प्रणालियों और आपातकालीन जनरेटर बैकअप को सुचारू रखने के लिए चिकित्सा संस्थानों को छूट।
  3. दूरसंचार सेवाएं (मोबाइल टॉवर): कनेक्टिविटी को निर्बाध बनाए रखने के लिए मोबाइल टॉवरों में स्थापित डीजल जनरेटर सेटों (DG Sets) के लिए ईंधन की उपलब्धता।

कलेक्टर की चेतावनी: जिले में ईंधन की कोई कमी नहीं, जमाखोरी या मनाही पर होगी एफआईआर

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जिले के नागरिकों और विशेषकर किसान भाइयों को आश्वस्त किया है कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद जिले के डिपो और रिटेल आउटलेट्स में पेट्रोल तथा डीजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। पैनिक बाइंग (घबराहट में की जाने वाली खरीदारी) या किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचने की अपील की गई है। इसके साथ ही, उन्होंने पेट्रोल पंप संचालकों को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि किसी भी रिटेल आउटलेट द्वारा स्टॉक होने के बावजूद किसानों को ईंधन देने से मना किया जाता है या कृत्रिम कमी दिखाई जाती है, तो उनके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

🚨 किसानों के लिए आधिकारिक हेल्पलाइन और शिकायत प्रक्रिया

यदि किसी पेट्रोल पंप द्वारा किसानों को डीजल अथवा पेट्रोल उपलब्ध कराने में आनाकानी की जाती है, तो किसान सीधे जिला प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं। त्वरित निवारण के लिए एक विशेष शिकायत सेल का गठन किया गया है:

📞 हेल्पलाइन नंबर: 9691901259

⏰ संपर्क समय: कार्यालयीन समय (प्रातः 10:00 बजे से शाम 05:30 बजे तक)

📋 शिकायत दर्ज कराते समय आवश्यक जानकारी:
त्वरित और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए किसान भाई शिकायत करते समय निम्नलिखित विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज कराएं:

  • किसान का पूरा नाम
  • वैध किसान कोड (Farmer Code)
  • सक्रिय मोबाइल नंबर
  • संबंधित रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) का नाम और उसका सटीक स्थान

सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य

अंत में, प्रशासन ने सभी नागरिकों और वितरकों से अपील की है कि अनुमत श्रेणियों में भी जब ड्रम या जेरीकेन में ईंधन का परिवहन किया जाए, तो अत्यधिक ज्वलनशील प्रकृति के कारण सुरक्षा मानकों की अनदेखी न की जाए। अनाधिकृत रूप से पेट्रोल-डीजल का भंडारण करना या उसे ऊंची कीमतों पर ब्लैक मार्केट में बेचना एक गंभीर अपराध है, जिस पर जिला पुलिस और खाद्य विभाग की संयुक्त टीमें पैनी नजर रख रही हैं।