आज का संपूर्ण पंचांग (सोमवार, 3 अगस्त 2026)
भारतीय सनातन पंचांग मुख्य रूप से पांच अंगों (वार, तिथि, नक्षत्र, योग और करण) से मिलकर बनता है। यहाँ 3 अगस्त 2026, सोमवार के दिन का संपूर्ण, विस्तृत और प्रामाणिक वैदिक पंचांग प्रस्तुत है।
1. पंचांग का सामान्य परिचय एवं दिनांक विवरण
- दिन (वार): सोमवार (भगवान भोलेनाथ शिवशंकर को समर्पित पावन वार, साथ ही सावन मास का विशेष सोमवार)।
- विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थी नाम संवत्सर)
- शक सम्वत: 1948 (पराभव)
- अयन: दक्षिणायन
- गोल: उत्तर गोल
- ऋतु: वर्षा ऋतु
- मास (महीना):
- अमांत मास (गुजरात और महाराष्ट्र आदि के अनुसार): आषाढ़ मास
- पूर्णिमांत मास (उत्तर भारत के पंचांग अनुसार): श्रावण मास (सावन)
2. सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और चंद्रास्त
विभिन्न कार्यों के निर्धारण के लिए सूर्य और चंद्रमा की स्थिति का बहुत महत्व होता है:
- सूर्योदय: प्रातः 05:43 बजे (दिल्ली के मानक समयनुसार)
- सूर्यास्त: संध्या 07:10 बजे
- चंद्रोदय: रात्रि 09:51 बजे
- चंद्रास्त: अगले दिन पूर्वाह्न 09:54 बजे
- सूर्य राशि: सूर्यदेव कर्क राशि में विराजमान हैं।
- चंद्र राशि: चंद्रमा पूरे दिन और रात जल तत्व प्रधान मीन राशि पर संचार करेंगे।
3. पंचांग के पाँच मुख्य अंग (तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार)
(क) तिथि विवरण
- कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि: रात्रि 10:54 बजे तक रहेगी। इसके पश्चात तुरंत कृष्ण पक्ष षष्ठी तिथि आरंभ हो जाएगी।
- विशेष: सावन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि जीवन में साधना, शुद्धि, और आंतरिक शांति प्राप्त करने के लिए उत्तम मानी जाती है।
(ख) नक्षत्र विवरण
- उत्तरभाद्रपदा नक्षत्र: रात्रि 10:00 बजे तक रहेगा। इसके उपरांत रेवती नक्षत्र का प्रवेश होगा।
- नक्षत्र स्वामी: उत्तरभाद्रपदा नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं, जो धैर्य, स्थिरता और न्याय के प्रतीक हैं। यह नक्षत्र साधना, गुप्त विद्याओं और अध्ययन के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
(ग) योग विवरण
- सुकर्मा योग: रात्रि 09:13 बजे तक रहेगा। इसके बाद धृति योग शुरू होगा।
- धार्मिक महत्व: सुकर्मा योग में किए गए सभी प्रकार के मांगलिक और सकारात्मक कार्य सफल होते हैं और व्यक्ति के कर्मों की प्रतिष्ठा बढ़ती है।
(घ) करण विवरण
- कौलव करण: पूर्वाह्न 11:08 बजे तक।
- तैतिल करण: रात्रि 10:54 बजे तक।
- गर करण: रात्रि 10:54 बजे के बाद से अगले दिन सुबह तक।
4. शुभ मुहूर्त एवं श्रेष्ठ समय (Auspicious Timings)
यदि आज के दिन आपको कोई नया कार्य, महत्वपूर्ण बैठक, या धार्मिक अनुष्ठान करना हो, तो निम्नलिखित शुभ मुहूरों का उपयोग किया जा सकता है:
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:19 बजे से प्रातः 05:01 बजे तक (ध्यान, साधना और ईश्वर स्मरण के लिए सर्वोत्तम)।
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:54 बजे तक (दिन का सबसे शुभ और ऊर्जावान समय, जिसमें बिना किसी बाधा के नए कार्य शुरू किए जा सकते हैं)।
- अमृत काल: सायं 05:07 बजे से सायं 06:45 बजे तक।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:41 बजे से दोपहर 03:35 बजे तक (विजय प्राप्ति, वाद-विवाद या महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धा में सफलता के लिए)।
- गोधूलि मुहूर्त: सायं 07:10 बजे से सायं 07:31 बजे तक (संध्या बेला में पूजन के लिए)।
5. अशुभ काल एवं वर्जित समय (Inauspicious Timings)
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन अशुभ काल के दौरान किसी भी प्रकार के शुभ, नए या मांगलिक कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए:
- राहुकाल (Rahu Kaal): प्रातः 07:24 बजे से प्रातः 09:05 बजे तक (इस दौरान कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय या वित्तीय लेन-देन न करें)।
- यमगंड काल: पूर्वाह्न 10:46 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक।
- गुलिक काल: दोपहर 02:08 बजे से अपराह्न 03:48 बजे तक।
- दुर्मुहूर्त:
- दोपहर 12:54 बजे से दोपहर 01:48 बजे तक
- अपराह्न 03:35 बजे से सायं 04:29 बजे तक
- वर्ज्यम् काल: प्रातः 07:26 बजे से प्रातः 09:04 बजे तक।
6. चौघड़िया मुहूर्त (दिन और रात)
दिन का चौघड़िया:
| मुहूर्त का प्रकार | अवधि (समय) | फल / स्थिति |
|---|---|---|
| अमृत | प्रातः 05:43 से प्रातः 07:24 | सर्वोत्तम |
| काल | प्रातः 07:24 से प्रातः 09:05 | अशुभ |
| शुभ | प्रातः 09:05 से पूर्वाह्न 10:46 | उत्तम |
| रोग | पूर्वाह्न 10:46 से दोपहर 12:27 | अशुभ |
| उद्वेग | दोपहर 12:27 से दोपहर 02:08 | अशुभ |
| चर | दोपहर 02:08 से अपराह्न 03:49 | सामान्य |
| लाभ | अपराह्न 03:49 से सायं 05:30 | उत्तम |
| अमृत | सायं 05:30 से सायं 07:11 | सर्वोत्तम |
रात का चौघड़िया:
| मुहूर्त का प्रकार | अवधि (समय) | फल / स्थिति |
|---|---|---|
| चर | सायं 07:11 से रात्रि 08:30 | सामान्य |
| रोग | रात्रि 08:30 से रात्रि 09:49 | अशुभ |
| काल | रात्रि 09:49 से रात्रि 11:08 | अशुभ |
| लाभ | रात्रि 11:08 से रात्रि 12:27 | उत्तम |
| उद्वेग | रात्रि 12:27 से रात्रि 01:47 | अशुभ |
| शुभ | रात्रि 01:47 से रात्रि 03:06 | उत्तम |
| अमृत | रात्रि 03:06 से प्रातः 04:25 | सर्वोत्तम |
| चर | प्रातः 04:25 से प्रातः 05:44 | सामान्य |
7. आज का विशेष पर्व एवं उपाय (Special Remedies)
- सावन सोमवार का महत्व: चूंकि आज सावन मास का सोमवार है, इसलिए भगवान शिव की आराधना करना अत्यंत फलदायी है। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और शमी पत्र अर्पित करने से मानसिक शांति, आरोग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
- मंत्र जाप: आज के दिन “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का अधिक से अधिक जाप करना मानसिक विकारों को दूर करता है और आंतरिक ऊर्जा को मजबूत बनाता है।
- दान-पुण्य: इस पंचमी तिथि और सोमवार के संयोग पर जरूरतमंदों को सफेद वस्त्र, चावल या दूध का दान करना विशेष पुण्यकारी माना जाता है।
नोट: किसी भी नए और मांगलिक कार्य को शुरू करने से पहले स्थानीय पंचांग और ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।









