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सरगुजा पुलिस का ‘साइबर जागृति अभियान’: जन शिक्षण संस्थान में वृहद जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, 300 से अधिक युवाओं व श्रमिकों को मिले डिजिटल सुरक्षा के गुर
अंबिकापुर। डिजिटल दुनिया के बढ़ते विस्तार के साथ ही ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी नौकरी के विज्ञापन और सोशल मीडिया आधारित ठगी के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। साइबर अपराधियों के इस फैलते जाल से आम नागरिकों, विशेषकर असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और रोजगार की तलाश में लगे युवाओं को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सरगुजा पुलिस द्वारा एक व्यापक एवं दूरगामी ‘साइबर जागृति अभियान’ चलाया जा रहा है।
डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश अग्रवाल (भा.पु.से.) के कुशल दिशा-निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रितेश चौधरी के प्रत्यक्ष नेतृत्व में संचालित इस अभियान के पाँचवें सप्ताह (13 से 19 सितंबर 2026) के तहत आज कौशल विकास केंद्र ‘जन शिक्षण संस्थान’ (JSS) में एक विशाल साइबर जागरूकता कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कुशल, अकुशल, रोजगार सृजन केंद्रों के प्रशिक्षणार्थियों तथा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को आधुनिक साइबर अपराधों के पैटर्न से अवगत कराना और उन्हें डिजिटल सुरक्षा के प्रति सतर्क बनाना था।
📌 कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण
जन शिक्षण संस्थान में आयोजित इस विशेष सेशन में 300 से अधिक छात्र-छात्राओं, असंगठित क्षेत्र के युवाओं एवं श्रमिकों के साथ-साथ संस्थान के 10 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान प्रतिभागियों ने दैनिक जीवन में साइबर सुरक्षा से जुड़े सवाल पूछकर अपनी विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान पाया।
ऑनलाइन जॉब फ्रॉड और फर्जी भर्ती एजेंसियों के चक्रव्यूह से सावधान
कार्यक्रम के दौरान सरगुजा पुलिस की विशेषज्ञ टीम ने असंगठित क्षेत्र में रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं, छात्र-छात्राओं एवं श्रमिकों को वर्तमान में सक्रिय साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जा रहे नए-नए तरीकों के बारे में विस्तार से समझाया। पुलिस टीम ने विशेष रूप से निम्नलिखित साइबर खतरों पर प्रकाश डाला:
- फर्जी नौकरी के विज्ञापन व वर्क फ्रॉम होम फ्रॉड: पुलिस ने बताया कि सोशल मीडिया, व्हाट्सएप या टेलीग्राम संदेशों के माध्यम से ‘पार्ट-टाइम’, ‘डाटा एंट्री’, या ‘वर्क फ्रॉम होम’ के नाम पर दिए जाने वाले लुभावने और अत्यधिक कमाई के ऑफर्स अक्सर ठगी का माध्यम होते हैं। शुरुआती दौर में कुछ छोटे टास्क देकर भरोसा जीता जाता है और फिर बड़े निवेश के नाम पर लाखों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं।
- रजिस्ट्रेशन व वेरिफिकेशन शुल्क के नाम पर ठगी: साइबर विशेषज्ञों ने स्पष्ट शब्दों में समझाा कि कोई भी प्रामाणिक, पंजीकृत या प्रतिष्ठित कंपनी कभी भी नौकरी देने के एवज में उम्मीदवारों से पहले पैसे, सिक्योरिटी डिपॉजिट, लेपटॉप चार्ज या प्रोसेसिंग फीस की मांग नहीं करती। यदि कोई एजेंसी नौकरी देने के नाम पर पैसों की मांग करती है, तो वह पूरी तरह से फर्जी है।
- फिशिंग लिंक, फर्जी APK फाइलें व नकली वेबसाइट्स: अनजान नंबरों से प्राप्त होने वाले संदिग्ध लिंक्स, लॉटरी, स्कॉलरशिप या मुफ्त उपहारों का लालच देने वाले मैसेजेस पर गलती से भी क्लिक न करने की सख्त हिदायत दी गई। इसके अलावा, अनधिकृत स्रोतों से थर्ड-पार्टी एंड्रॉइड ऐप (APK फाइल्स) डाउनलोड न करने की सलाह दी गई, क्योंकि ये मोबाइल का पूरा कंट्रोल हैकर्स को सौंप सकते हैं।
संस्थान के अधिकारियों एवं पुलिस टीम की रही सक्रिय भूमिका
जन शिक्षण संस्थान में आयोजित इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान के अधिकारियों और पुलिस बल की संयुक्त टीमों ने समर्पित सहभागिता निभाई। कार्यक्रम के दौरान जन शिक्षण संस्थान के निदेशक मो. सिद्दीकी तथा परियोजना अधिकारी गिरीश गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के दौर में युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण के साथ-साथ डिजिटल सुरक्षा की समझ होना अत्यंत आवश्यक है।
इसके साथ ही सामाजिक संस्था ‘नवा बिहान’ की ओर से मंगल पांडे, अजय तिवारी एवं संतोष दास ने कार्यक्रम के आयोजन व युवाओं को जोड़ने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सरगुजा पुलिस विभाग की ओर से उप निरीक्षक अभय तिवारी, सायबर सेल प्रभारी सहायक उप निरीक्षक अजीत मिश्रा, साइबर एक्सपर्ट आरक्षक अनुज जायसवाल, अमन पुरी, राहुल केरकेट्टा एवं अविनाश पासवान ने पूरे सत्र का संचालन किया। पुलिस टीम के सदस्यों ने वास्तविक केस स्टडीज के माध्यम से उपस्थित युवाओं को बहुत ही सरल और व्यावहारिक भाषा में सुरक्षा के उपाय समझाए।
🛡️ सरगुजा पुलिस की आम नागरिकों से महत्वपूर्ण अपील
सरगुजा पुलिस जिले के सभी नागरिकों, युवाओं, छात्र-छात्राओं एवं कामगारों से अपील करती है कि:
- किसी भी अनजान व्यक्ति, कॉल या संस्थान को बिना जांच-परख के अपनी व्यक्तिगत जानकारी, आधार नंबर, बैंक खाता विवरण, यूपीआई पिन या ओटीपी (OTP) साझा न करें।
- यदि आप या आपके आसपास का कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार की साइबर वित्तीय ठगी का शिकार हो जाता है, तो बिना समय गंवाए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।
- इसके अलावा, भारत सरकार के आधिकारिक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं।
याद रखें, साइबर वित्तीय ठगी के मामलों में शुरुआती 1 से 2 घंटे (गोल्डन आवर्स) अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। 1930 पर त्वरित सूचना देने से ठगी की गई राशि को होल्ड कराया जा सकता है।
अभियान का व्यापक प्रभाव और सामाजिक सरोकार
सरगुजा पुलिस का यह ‘साइबर जागृति अभियान’ जिले के विभिन्न वर्गों तक पहुंचकर डिजिटल सुरक्षा की मजबूत नींव रख रहा है। स्कूलों, कॉलेजों, ग्रामीण क्षेत्रों और अब कौशल विकास केंद्रों तक पहुंचकर पुलिस की टीमें लोगों को डिजिटल रूप से सशक्त बना रही हैं। जन शिक्षण संस्थान में आयोजित इस कार्यक्रम ने असंगठित क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं को एक नया दृष्टिकोण दिया है, जिससे वे भविष्य में ऑनलाइन रोजगार की तलाश करते समय साइबर अपराधियों का शिकार होने से बच सकेंगे।















