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छत्तीसगढ़ राशन दुकान नए नियम 2026: बस्तर में बिना बायोमेट्रिक नहीं मिलेगा राशन, नियमों में भारी सख्ती






बस्तर में राशन वितरण प्रणाली पर बड़ी कार्रवाई: कलेक्टर आकाश छिकारा ने जारी किए कड़े निर्देश, अब बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण हुआ अनिवार्य


बस्तर में राशन वितरण प्रणाली पर बड़ी कार्रवाई: कलेक्टर आकाश छिकारा ने जारी किए कड़े निर्देश, अब ई-पॉस और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण हुआ अनिवार्य, गड़बड़ी करने वालों पर होगी दंडात्मक कार्रवाई

जगदलपुर (बस्तर)। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिलने वाले राशन वितरण की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुदृढ़ और जवाबदेह बनाने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। बस्तर के नव-पदस्थ कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने जिले की राशन वितरण व्यवस्था में व्यापक सुधार करने और हर प्रकार की संभावित गड़बड़ी या अनियमितताओं को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से नए और कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

इन दिशा-निर्देशों के तहत अब जिले की सभी ऑनलाइन शासकीय उचित मूल्य दुकानों (Fair Price Shops) में राशन सामग्री का वितरण अनिवार्य रूप से ई-पॉस (e-PoS – Electronic Point of Sale) मशीन के माध्यम से हितग्राहियों के फिंगरप्रिंट या उंगली के निशान (बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण) द्वारा ही किया जाएगा। प्रशासन के इस कड़े रुख के बाद अब राशन दुकानों में बिना भौतिक सत्यापन के सीधे खाद्यान्न का उठाव करना पूरी तरह से प्रतिबंधित हो गया है।

कलेक्टर का कड़ा संदेश: “सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किसी भी स्तर पर पारदर्शिता से समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक और पात्र हितग्राहियों तक बिना किसी कटौती और धांधली के पहुंचे, यह सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। नियमों की अनदेखी करने वाले उचित मूल्य दुकान संचालकों पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”


‘वन नेशन वन राशनकार्ड’ के मूल उद्देश्यों को पूरा करने की कवायद

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘वन नेशन वन राशनकार्ड’ (ONORC) का मुख्य उद्देश्य देश के किसी भी कोने में रहने वाले नागरिक को उसके हिस्से का खाद्यान्न पूरी पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराना है। इस योजना की सफलता पूरी तरह से डिजिटल वेरिफिकेशन पर टिकी हुई है। बस्तर जिले में इस केंद्रीय योजना के मूल उद्देश्यों को शत-प्रतिशत धरातल पर उतारने के लिए ही आधार प्रमाणीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है।

कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार, राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिजिटल तकनीकों का सही क्रियान्वयन आवश्यक है। जब तक हर एक हितग्राही का उसकी उंगलियों के निशान के माध्यम से सत्यापन नहीं होगा, तब तक बिचौलियों या फर्जीवाड़े की आशंका को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि अब बायोमेट्रिक सत्यापन को बस्तर के शहरी और सुदूर ग्रामीण अंचलों की सभी राशन दुकानों में पूरी तरह से बाध्यकारी बना दिया गया है।


मोबाइल ओटीपी (OTP) व्यवस्था पर लगी पूरी तरह रोक: क्यों लिया गया यह फैसला?

कलेक्टर श्री आकाश छिकारा द्वारा जारी आधिकारिक परिपत्र में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि जिले की कई राशन दुकानों में दुकान संचालकों द्वारा नियमों को दरकिनार करते हुए बायोमेट्रिक सत्यापन के बजाय सीधे मोबाइल ओटीपी (OTP) के जरिए राशन का वितरण कर दिया जाता है। प्रशासनिक जांच और समीक्षा में यह बात सामने आई है कि इस ढीली व्यवस्था के कारण खाद्यान्न वितरण में भारी गड़बड़ी, कालाबाजारी और अपात्र लोगों द्वारा राशन उठाव की गंभीर अनियमितताएं होने की आशंका हमेशा बनी रहती है।

इस लूपहोल यानी तकनीकी खामी का अनुचित लाभ उठाने वाले दुकान संचालकों और बिचौलियों पर पूरी तरह से लगाम लगाने के लिए बस्तर प्रशासन ने ओटीपी आधारित वितरण प्रणाली को लगभग बंद करने का फैसला किया है। अब ओटीपी के माध्यम से राशन वितरण केवल कुछ बेहद विशेष, संवेदनशील और सीमित परिस्थितियों में ही मान्य होगा। आम नागरिकों या सामान्य राशनकार्डधारियों के लिए यह सुविधा पूरी तरह बंद कर दी गई है।


केवल इन विशेष परिस्थितियों में ही मिलेगी ओटीपी (OTP) से राशन की छूट

प्रशासन ने इस बात का भी ध्यान रखा है कि कड़े नियमों के कारण किसी वास्तविक असहाय या बुजुर्ग हितग्राही को भूखा न रहना पड़े। इसलिए अत्यंत मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए केवल निम्नलिखित श्रेणियों के राशनकार्डधारियों को ही ओटीपी के माध्यम से राशन प्राप्त करने की छूट दी जाएगी, वह भी तब जब उनका बायोमेट्रिक प्रयास पूरी तरह से विफल हो जाए:

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  1. वरिष्ठ नागरिक: ऐसे राशनकार्ड जिनमें दर्ज सभी सदस्यों की उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक हो।
  2. छोटे बच्चे: ऐसे राशनकार्ड जिनमें सभी सदस्यों की उम्र 10 वर्ष से कम हो।
  3. एकल निराश्रित: ऐसे व्यक्ति जो पूरी तरह अकेले हैं और जिनका कोई सहारा नहीं है।
  4. निःशक्तजन (दिव्यांग): ऐसे दिव्यांग राशनकार्डधारी जो शारीरिक अक्षमता के कारण दुकान तक आने या फिंगरप्रिंट देने में असमर्थ हैं और जिन्होंने अपने कार्ड में किसी नॉमिनी (नामांकित व्यक्ति) को नहीं जोड़ा है या जिनके पास नॉमिनी के माध्यम से राशन लेने की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

महत्वपूर्ण शर्त: इन विशेष और पात्र हितग्राहियों को भी ओटीपी का विकल्प सीधे नहीं दिया जाएगा। उचित मूल्य दुकान संचालक को पहले उनके बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का भौतिक रूप से प्रयास करना होगा। जब मशीन पर उंगलियों या अंगूठे का निशान पूरी तरह से असफल (Fail) साबित हो जाएगा, केवल उसी स्थिति में तकनीकी प्रमाण के आधार पर ओटीपी का विकल्प खुलेगा।


नामांकित व्यक्ति (नॉमिनी) के लिए भी बदले नियम

राशन वितरण प्रणाली को और अधिक सख्त और अभेद्य बनाते हुए नए नियमों में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी राशनकार्ड में मुख्य हितग्राही (परिवार का मुखिया) किसी कारणवश स्वयं राशन लेने दुकान पर नहीं पहुंच पाता है और उसके स्थान पर कोई नामांकित व्यक्ति (नॉमिनी) खाद्यान्न लेने पहुंचता है, तो उसे भी ढिलाई नहीं मिलेगी।

उस नॉमिनी को भी अनिवार्य रूप से अपने स्वयं के आधार प्रमाणीकरण (बायोमेट्रिक) के माध्यम से ही खाद्यान्न का उठाव करना होगा। ऐसा करने से यह रिकॉर्ड में दर्ज रहेगा कि मुख्य परिवार की अनुपस्थिति में किस व्यक्ति ने राशन प्राप्त किया है, जिससे भविष्य में राशन चोरी या “राशन नहीं मिलने” जैसी झूठी शिकायतों पर भी रोक लगेगी।


तकनीकी खराबी की स्थिति में क्या होगा? जानिए प्रशासनिक एसओपी (SOP)

अक्सर देखा जाता है कि सुदूर वनांचल क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या या सर्वर डाउन होने के कारण ई-पॉस मशीनें काम नहीं करतीं, जिसका बहाना बनाकर संचालक मैन्युअल या ओटीपी वितरण शुरू कर देते हैं। बस्तर कलेक्टर ने इस समस्या के समाधान के लिए एक त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली (SOP) तैयार की है:

स्थिति / समस्या दुकान संचालक के लिए निर्देश प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई
ई-पॉस मशीन में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण का असफल होना तत्काल संबंधित क्षेत्र के खाद्य निरीक्षक (Food Inspector) और तकनीकी टीम को सूचित करें। तकनीकी टीम द्वारा समस्या का तुरंत (Real-time) निराकरण किया जाएगा।
सर्वर या नेटवर्क डाउन होना लॉग बुक में प्रविष्टि दर्ज कर उच्च अधिकारियों को ऑफलाइन माध्यम से तत्काल रिपोर्ट करें। क्षेत्रीय नोडल अधिकारी मौके का निरीक्षण कर वैकल्पिक तकनीकी समाधान सुनिश्चित करेंगे।
मशीन का खराब होना खाद्य विभाग से तत्काल दूसरी बैकअप मशीन की मांग करें। विभाग द्वारा 24 से 48 घंटों के भीतर मशीन को बदला या सुधारा जाएगा।

नियमों की अनदेखी पर होगी जेल और दंडात्मक कार्रवाई: कलेक्टर की सख्त हिदायत

बस्तर जिले के सभी उचित मूल्य दुकान संचालकों को चेतावनी देते हुए कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने सख्त लहजे में कहा है कि जो भी संचालक शासन के इन नियमों की उपेक्षा करेगा या जानबूझकर बायोमेट्रिक को दरकिनार कर ओटीपी (OTP) के माध्यम से राशन वितरण को प्राथमिकता देगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

ऐसे दोषी दुकान संचालकों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश के तहत कड़ी दंडात्मक, वैधानिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अंतर्गत दुकान का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित या निरस्त किया जा सकता है, साथ ही आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।


जनजागरूकता के लिए खाद्य अधिकारियों को निर्देश, कलेक्टर की जनता से अपील

इस नई और पारदर्शी व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए केवल प्रशासनिक कड़ाई ही काफी नहीं है, बल्कि आम जनता का जागरूक होना भी उतना ही आवश्यक है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए बस्तर जिला प्रशासन ने व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है।

कलेक्टर ने खाद्य विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि जिले की प्रत्येक शासकीय उचित मूल्य दुकान के सामने बड़े और स्पष्ट अक्षरों में बैनर, पोस्टर और वॉल पेंटिंग के माध्यम से इस नए नियम का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। इन पोस्टरों में स्पष्ट लिखा होना चाहिए कि बिना बायोमेट्रिक सत्यापन के राशन का वितरण प्रतिबंधित है, ताकि कोई भी संचालक जनता को गुमराह न कर सके।

प्रशासन की आम नागरिकों से अपील:

  • राशन दुकान पर जाते समय अपना भौतिक रूप से सत्यापन करवाने के लिए स्वयं उपस्थित हों।
  • खाद्यान्न का उठाव करते समय हमेशा अपने अंगूठे या उंगली के निशान (बायोमेट्रिक) का ही उपयोग करें।
  • यदि कोई दुकान संचालक मशीन खराब होने का बहाना बनाकर राशन देने से मना करता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो इसकी शिकायत तुरंत तहसील या जिला खाद्य कार्यालय में करें।

बस्तर जिला प्रशासन द्वारा उठाए गए इस क्रांतिकारी कदम से न केवल राशन की कालाबाजारी पर पूरी तरह से रोक लगेगी, बल्कि सुदूर आदिवासी अंचलों में रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक उनके हक का पूरा खाद्यान्न अत्यंत सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से पहुंच सकेगा।


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