विशेष रिपोर्ट: बस्तर संभाग में मानसून को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट; मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए अभेद्य सुरक्षा चक्र तैयार, 180 कॉम्बेट दल संभालेंगे मोर्चा
जगदलपुर/बस्तर: छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल और भौगोलिक रूप से अत्यंत जटिल बस्तर संभाग में वर्षाकाल के दस्तक देते ही मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अंदरूनी और पहुंचविहीन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं समय पर पहुंचाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। इस वर्ष मानसून के दौरान मलेरिया, डायरिया (उल्टी-दस्त), पीलिया और अन्य जलजनित व संक्रामक बीमारियों की त्वरित रोकथाम तथा प्रभावी उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने संभाग के सभी जिलों में युद्धस्तर पर व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
विभाग ने इस बार केवल जिला स्तर पर ही नहीं, बल्कि विकासखंड (ब्लॉक) और सेक्टर स्तर तक एक मजबूत और त्रिस्तरीय चिकित्सा सुरक्षा तंत्र तैयार किया है। किसी भी आपातकालीन परिस्थिति या महामारी जैसी स्थिति से निपटने के लिए बस्तर संभाग के सभी सात जिलों में विशेष कॉम्बेट दलों का गठन किया गया है, जो सूचना मिलते ही तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर मोर्चा संभालेंगे।
संभाग में 180 विशेष कॉम्बेट दल गठित, ब्लॉक स्तर पर आपातकालीन टीमें तैनात
संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. महेश सांडिया ने बस्तर संभाग की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा करते हुए बताया कि संभाग के सभी जिलों में कुल मिलाकर 180 कॉम्बेट दल गठित किए जा चुके हैं। ये दल पूरी तरह से आधुनिक जीवन रक्षक दवाओं, रैपिड डायग्नोस्टिक किट्स और आवश्यक उपकरणों से लैस हैं। इनका मुख्य उद्देश्य किसी भी गांव या पारा-टोला में बीमारी फैलने की प्रारंभिक सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर पहुंचकर मरीजों का इलाज करना और संक्रमण को आगे फैलने से रोकना है।
इसके साथ ही, किसी भी बड़ी आपातकालीन स्थिति या अचानक आई बाढ़ जैसी आपदा से निपटने के लिए प्रत्येक विकासखंड में अलग से एक ‘चिकित्सा सहायता टीम’ (Emergency Medical Support Team) का भी गठन किया गया है। यह टीम २४ घंटे जिला मुख्यालय और क्षेत्रीय नियंत्रण कक्ष के संपर्क में रहेगी ताकि जरूरत पड़ने पर मरीजों को तुरंत एम्बुलेंस या अन्य साधनों के माध्यम से बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा सके।
पहुंचविहीन क्षेत्रों और उप स्वास्थ्य केंद्रों में जीवन रक्षक दवाओं का एडवांस भंडारण
बस्तर संभाग की सबसे बड़ी भौगोलिक समस्या यह है कि भारी बारिश के दौरान कई नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं, जिससे दर्जनों अंदरूनी गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एडवांस प्लानिंग के तहत काम किया है। डॉ. महेश सांडिया के अनुसार, वर्षा ऋतु के शुरू होने से पहले ही संभाग के सभी पहुंचविहीन और सुदूर क्षेत्रों में स्थित उप स्वास्थ्य केंद्रों (Sub-Health Centers) में जीवन रक्षक दवाइयों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित कर दिया गया है।
इसके अलावा, क्षेत्र के ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (ANM, MPW) को भी अतिरिक्त दवाओं का स्टॉक दिया गया है ताकि मार्ग बंद होने की स्थिति में भी क्षेत्र में दवाओं की कोई कमी न हो। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) के मुख्य औषधालयों को भी दवाओं से पूरी तरह रीफिल कर दिया गया है।
बस्तर संभाग के संवेदनशील क्षेत्रों का सांख्यिकीय वर्गीकरण
स्वास्थ्य विभाग ने इस वर्ष वर्षाकाल से पहले पूरे बस्तर संभाग का एक विस्तृत सर्वे कराया है, जिसके आधार पर अत्यधिक संवेदनशील, डायरिया प्रोन (संभावित प्रकोप वाले क्षेत्र), पहुंचविहीन और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें चिन्हित किया गया है। इन क्षेत्रों पर विभाग की विशेष नजर है। चिन्हित क्षेत्रों के आंकड़े इस प्रकार हैं:
| क्र. | क्षेत्र का वर्गीकरण / श्रेणी | चिन्हित गांवों/इलाकों की कुल संख्या | स्वास्थ्य विभाग की विशेष कार्ययोजना |
|---|---|---|---|
| 1 | डायरिया प्रोन एरिया (Diarrhea Prone Areas) | 177 | ओआरएस (ORS), जिंक टैबलेट और एंटीबायोटिक्स का विशेष स्टॉक, दैनिक रिपोर्टिंग। |
| 2 | अत्यंत संवेदनशील ग्राम (Sensitive Villages) | 538 | साप्ताहिक स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन और मितानिनों द्वारा घर-घर सर्वे। |
| 3 | पहुंचविहीन ग्राम (Inaccessible/Remote Villages) | 810 | ३ महीने की आवश्यक व जीवन रक्षक दवाओं का अग्रिम (Advance) भंडारण। |
| 4 | संभावित बाढ़ ग्रस्त इलाके (Flood Prone Areas) | 638 | आपातकालीन चिकित्सा सहायता टीमों की २४ घंटे तैनाती और बोट-एम्बुलेंस समन्वय। |
आश्रम, छात्रावासों पर विशेष ध्यान: अधीक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण
बस्तर संभाग में बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के बच्चों के लिए आवासीय आश्रम एवं छात्रावास संचालित हैं। वर्षाकाल में इन छात्रावासों में रहने वाले बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा विभाग के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संभाग के सभी शासकीय आश्रमों और छात्रावासों में आवश्यक दवाइयां (जैसे पेरासिटामोल, ओआरएस, ओआरएस घोल, पेट दर्द, उल्टी और खुजली आदि की दवाएं) अनिवार्य रूप से उपलब्ध करा दी गई हैं।
इसके साथ ही, एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों ने सभी छात्रावास अधीक्षकों और प्रबंधकों को दवाओं के सुरक्षित उपयोग, प्राथमिक उपचार (First Aid) और मौसमी बीमारियों के शुरुआती लक्षणों को पहचानने के संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया है, ताकि किसी भी बच्चे के बीमार होने पर तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू किया जा सके और समय रहते डॉक्टरों को सूचित किया जा सके।
मितानिनों की ‘मुख्यमंत्री दवा पेटी’ हुई रीफिल, हाट-बाजारों में लगेंगे नियमित शिविर
ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली ‘मितानिनों’ को इस महाअभियान में सक्रिय रूप से जोड़ा गया है। संभाग के सभी गांवों और पारा-टोलों में कार्यरत मितानिनों के पास उपलब्ध ‘मुख्यमंत्री दवा पेटी’ की नियमित रूप से रीफिलिंग सुनिश्चित की गई है। मितानिनों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्र में किसी भी ग्रामीण को बुखार, दस्त या उल्टी होने पर तुरंत दवा पेटी से आवश्यक प्राथमिक दवाएं दें।
इसके अतिरिक्त, बस्तर की संस्कृति का अहम हिस्सा माने जाने वाले स्थानीय ‘हाट-बाजारों’ का उपयोग स्वास्थ्य जागरूकता और इलाज के लिए प्रभावी ढंग से किया जाएगा। संभाग के सभी प्रमुख हाट-बाजारों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित रूप से ‘हाट-बाजार क्लिनिक’ और विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में आने वाले ग्रामीणों की मलेरिया, बीपी, शुगर और मौसमी बीमारियों की निःशुल्क जांच कर उन्हें मौके पर ही दवाइयां दी जाएंगी।
पेयजल स्रोतों का शुद्धीकरण: हैंडपंपों और कुओं में क्लोरीनेशन तेज
वर्षाकाल में अधिकांश बीमारियां दूषित पानी के सेवन से फैलती हैं। इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने स्थानीय समुदाय और पंचायत प्रशासन की सहभागिता से बस्तर संभाग के सभी गांवों में पेयजल स्रोतों के शुद्धीकरण का महाअभियान शुरू किया है। संभाग के सभी सक्रिय हैंडपंपों, सार्वजनिक पक्के कुओं और अन्य जल स्रोतों की पहचान कर ली गई है। इन स्रोतों में ब्लीचिंग पाउडर डालने और नियमित रूप से क्लोरीनेशन करने का काम तेजी से किया जा रहा है, ताकि ग्रामीणों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल मिल सके।
आम नागरिकों के लिए स्वास्थ्य विभाग की जरूरी गाइडलाइन और बचाव के उपाय
डॉ. महेश सांडिया ने मौसमी बीमारियों, विशेषकर मलेरिया, डेंगू और डायरिया से सुरक्षित रहने के लिए संभाग के नागरिकों के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन कर बीमारियों से बचा जा सकता है:
- शुद्ध पेयजल का उपयोग: हमेशा साफ और सुरक्षित पानी ही पीएं। वर्षाकाल में यदि संभव हो तो पानी को अच्छी तरह उबालकर और छानकर ही ठंडा होने के बाद उपयोग में लाएं।
- ताजा और गर्म भोजन: हमेशा गर्म और ताजा बना हुआ भोजन ही ग्रहण करें। बासी भोजन, खुले में रखे हुए कटे फल और बाजार के दूषित खाद्य पदार्थों के सेवन से पूरी तरह बचें।
- साफ-सफाई की व्यवस्था: अपने घर के भीतर और आसपास के परिवेश में पूरी स्वच्छता बनाए रखें। कचरे को सही स्थान पर डंप करें और गंदगी न फैलने दें।
- जलजमाव पर रोक: घर के आसपास, नालियों में, पुराने टायरों, कूलरों या बर्तनों में गंदे पानी का जमाव बिल्कुल न होने दें, क्योंकि ठहरे हुए पानी में ही मलेरिया और डेंगू के मच्छर पनपते हैं।
- मच्छरदानी का अनिवार्य उपयोग: सोते समय नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करें। वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोग खुद को और बच्चों को मच्छरों के काटने से बचाने के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें।
- तत्काल चिकित्सकीय परामर्श: यदि घर में किसी भी सदस्य को तेज बुखार, लगातार उल्टी, दस्त, पेट दर्द या अत्यधिक कमजोरी जैसी समस्या महसूस हो, तो बिना किसी देरी के निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या गांव की मितानिन से तुरंत संपर्क कर उपचार शुरू करवाएं।
समुदाय की सहभागिता से मौसमी बीमारियों पर सतत निगरानी
स्वास्थ्य विभाग बस्तर संभाग के समस्याग्रस्त और संवेदनशील गांवों, विशेष रूप से अंदरूनी पारा-टोलों में सतत निगरानी बनाए रखने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, कोटवारों, और ग्रामीणों की सहभागिता ले रहा है। मैदानी अमले को निर्देश दिए गए हैं कि वे रोजाना गांवों का दौरा करें और यदि किसी एक क्षेत्र से एक से अधिक मरीजों में समान लक्षण (जैसे उल्टी-दस्त या बुखार) दिखाई देते हैं, तो उसकी सूचना तत्काल जिला स्तरीय नियंत्रण कक्ष (Control Room) को दें, ताकि स्थिति बिगड़ने से पहले वहां विशेष कॉम्बेट दल को भेजा जा सके।
निश्चित रूप से, स्वास्थ्य विभाग द्वारा बस्तर संभाग में की गई यह व्यापक और अग्रिम तैयारी सराहनीय है। समय पर दवाओं का भंडारण, कॉम्बेट टीमों का गठन और जल स्रोतों का शुद्धीकरण जैसे कदम मानसून के दौरान बस्तर के वनांचल में रहने वाले मासूम आदिवासियों और आम नागरिकों के लिए जीवन रक्षक साबित होंगे।









