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अम्बिकापुर बाल संप्रेक्षण गृह में कलेक्टर अजीत वसंत का औचक निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की जांच, दिए कड़े निर्देश






अम्बिकापुर बाल संप्रेक्षण गृह का बड़ा अपडेट: कलेक्टर अजीत वसंत और एसएसपी राजेश अग्रवाल ने आधी रात के बाद किया औचक निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं की खुली पोल, दिए कड़े निर्देश


सरगुजा / प्रशासनिक कार्रवाई

शासकीय बाल संप्रेक्षण गृह का औचक निरीक्षण: कलेक्टर अजीत वसंत और एसएसपी राजेश अग्रवाल ने परखी सुरक्षा व्यवस्था, बुनियादी कमियों को दूर करने के कड़े निर्देश जारी

प्रदेश खबर नेटवर्क |
अम्बिकापुर, छत्तीसगढ़ |
अपडेटेड: जून 24, 2026
मुख्य बिंदु: अम्बिकापुर बिशुनपुर मार्ग पर स्थित शासकीय बाल संप्रेक्षण गृह (बालक) में सुरक्षा और बुनियादी व्यवस्थाओं की समीक्षा करने आधी रात के बाद प्रशासनिक और पुलिस अमला पहुंचा। कलेक्टर ने किशोर न्याय बोर्ड के प्रवेश द्वार पर कंटीले तार लगाने और सभी खिड़कियों की मरम्मत तत्काल प्राथमिकता के आधार पर करने का आदेश दिया।

अम्बिकापुर। जिला मुख्यालय अम्बिकापुर के बिशुनपुर रोड स्थित शासकीय बाल संप्रेक्षण गृह (बालक) की सुरक्षा व्यवस्था, आधारभूत अधोसंरचना और वहां रह रहे बच्चों की बुनियादी सुविधाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने संयुक्त मोर्चा संभाला। कलेक्टर अजीत वसंत एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल ने आज संस्थान का सघन और विस्तृत निरीक्षण किया। इस औचक कार्रवाई से संस्था के अधिकारी-कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति रही। अधिकारियों ने एक-एक पॉइंट की बारीकी से जांच की ताकि भविष्य में सुरक्षा को लेकर कोई भी चूक न होने पाए।

निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य संस्था की सुरक्षात्मक कमियों की पहचान करना, बच्चों के रहन-सहन के स्तर का आकलन करना और संस्थान के संचालन में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों का तत्काल मौके पर ही निराकरण करना था। प्रशासनिक टीम ने परिसर के भीतर और बाहर के हर उस हिस्से का मुआयना किया जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं।

सुरक्षा व्यवस्थाओं का कड़ा इम्तिहान: खिड़कियों और निकास मार्गों का हुआ परीक्षण

निरीक्षण के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान संस्थान के सुरक्षा घेरे को अभेद्य बनाने पर केंद्रित रहा। कलेक्टर अजीत वसंत ने संस्था भवन की सभी खिड़कियों, आपातकालीन और मुख्य निकास मार्गों (एग्जिट पॉइंट्स) का स्वयं खड़े होकर कड़ा परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि भवन के कुछ हिस्सों में तत्काल मरम्मत की भारी आवश्यकता है। अधिकारियों को सख्त लहजे में हिदायत दी गई कि भवन के जितने भी कमजोर हिस्से हैं, या जहां भी खिड़कियों और दरवाजों में टूट-फूट है, उसे प्राथमिकता के आधार पर और बिना किसी देरी के तुरंत ठीक कराया जाए।

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सुरक्षा को और अधिक चाक-चौबंद करने के लिए कलेक्टर ने मौके पर मौजूद लोक निर्माण विभाग और संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि किशोर न्याय बोर्ड के प्रवेश द्वार की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाया जाए। इसके लिए प्रवेश द्वार के आसपास और ऊपरी हिस्सों में कंटीले तार (बारब्ड वायर) लगाने के निर्देश दिए गए, ताकि बाहरी या भीतरी तौर पर किसी भी प्रकार के अवांछित प्रयास को पूरी तरह रोका जा सके।

बच्चों के साथ आत्मीय संवाद: दैनिक दिनचर्या और समस्याओं पर हुई खुली चर्चा

निरीक्षण के दूसरे चरण में कलेक्टर अजीत वसंत और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल ने बाल संप्रेक्षण गृह में निवासरत बच्चों से मुलाकात की। अधिकारियों ने बच्चों के साथ बेहद सहज, आत्मीय और तनावमुक्त वातावरण में बातचीत की ताकि बच्चे बिना किसी डर या संकोच के अपनी बातें साझा कर सकें। इस दौरान बच्चों की दैनिक जीवन से जुड़ी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और उनकी समस्याओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

अधिकारियों ने बच्चों से मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर फीडबैक लिया:

  • भोजन की गुणवत्ता: संप्रेक्षण गृह की रसोई में बनने वाले भोजन के स्वाद, पौष्टिकता और मीनू के अनुसार नियमित वितरण की जानकारी ली गई।
  • स्वास्थ्य सेवाएं: बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच, बीमार होने पर दवाइयों की उपलब्धता और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्थाओं के बारे में पूछा गया।
  • शिक्षा और अध्ययन: बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, किताबों की उपलब्धता, वोकेशनल ट्रेनिंग (व्यवसायिक शिक्षा) और उनके रचनात्मक विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों का जायजा लिया गया।
  • मनोरंजन और दिनचर्या: खेलकूद के साधन, टीवी देखने का समय और सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक की पूरी दिनचर्या के बारे में बच्चों से सीधा इनपुट लिया गया।

कलेक्टर ने बच्चों द्वारा दिए गए सुझावों और उनकी व्यक्तिगत व सामूहिक समस्याओं को बेहद गंभीरता से सुना और मौके पर ही उपस्थित विभागीय अधिकारियों को उनके त्वरित निराकरण के निर्देश दिए।

“बाल संप्रेक्षण गृह में रहने वाले प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य और उनका समग्र सामाजिक व मानसिक विकास सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। बच्चों को एक सुरक्षित, सकारात्मक, तनावमुक्त और प्रेरणादायी वातावरण उपलब्ध कराना सभी संबंधित अधिकारियों और ग्राउंड स्टाफ की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
– अजीत वसंत, कलेक्टर, सरगुजा (अम्बिकापुर)

लापरवाही बरतने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई: नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश

संस्थान के प्रबंधन और सुरक्षा अमले की क्लास लेते हुए कलेक्टर अजीत वसंत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया कि बच्चों की देखरेख, उनकी सुरक्षा व्यवस्था और उनके स्वास्थ्य को लेकर किसी भी प्रकार की मानवीय या तकनीकी लापरवाही अक्षम्य होगी। ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी चौबीसों घंटे पूरी मुस्तैदी के साथ अपनी सेवाएं दें।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल ने भी पुलिस बल और वहां तैनात सुरक्षा प्रहरियों को सुरक्षा के तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रात के समय गश्त और निगरानी व्यवस्था को दोगुना किया जाए। परिसर के भीतर बच्चों की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरों के संचालन और उनकी नियमित रिकॉर्डिंग की जांच करने की बात कही। अधिकारियों ने कहा कि बच्चों की बुनियादी आवश्यकताओं का समय पर निराकरण किया जाना चाहिए ताकि उनके भीतर किसी भी प्रकार की नकारात्मक भावना का संचार न हो और वे खुद को एक सुरक्षित और सुधारात्मक माहौल में महसूस कर सकें।

सतत निगरानी के लिए बनेगा कड़ा प्रोटोकॉल

कलेक्टर ने जिला बाल संरक्षण इकाई और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे बाल संरक्षण से जुड़े सभी शासकीय और अर्ध-शासकीय संस्थानों में नियमित और औचक निरीक्षण की एक सतत प्रणाली विकसित करें। सतत निगरानी के माध्यम से ही बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर प्रशासनिक अधिकारियों के दौरों से जमीनी स्तर की कमियां सामने आती हैं और उनका त्वरित समाधान संभव हो पाता है।

निरीक्षण के इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील मौके पर एसडीएम बनसिंह नेताम सहित महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी, लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर, बाल संप्रेक्षण गृह के अधीक्षक, हाउस फादर और अन्य संबंधित विभागीय कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों को उनके प्रभार और जिम्मेदारियों को लेकर कड़े और स्पष्ट डेडलाइन वाले टास्क सौंपे गए हैं।


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