मेधा का डंका: राष्ट्रीय छात्रवृत्ति परीक्षा (NMMSE) 2026 में कांकेर जिले का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 143 विद्यार्थियों का हुआ चयन
कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन और शिक्षा विभाग की ‘विशेष 4’ रणनीति ने बदली कांकेर की तस्वीर; ओएमआर शीट अभ्यास और साप्ताहिक टेस्ट से संवरी नौनिहालों की तकदीर।
कांकेर। राष्ट्रीय साधन एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा (एनएमएमएसई) 2026 के घोषित परिणामों ने छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर कांकेर जिले को गौरवान्वित किया है। इस वर्ष जिले के कुल 143 मेधावी विद्यार्थियों का चयन इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय छात्रवृत्ति के लिए हुआ है। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग द्वारा जमीनी स्तर पर किए गए निरंतर प्रयासों, सटीक रणनीति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता के कारण कांकेर ने प्रदेश स्तर पर अपनी एक अलग पहचान दर्ज की है।
शैक्षणिक विश्लेषकों के अनुसार, नक्सल प्रभावित और जनजातीय बहुल इस क्षेत्र में एक साथ इतने बड़े पैमाने पर बच्चों का राष्ट्रीय छात्रवृत्ति के लिए चयनित होना यह साबित करता है कि यदि सही मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो ग्रामीण अंचल की प्रतिभाएं किसी से पीछे नहीं हैं। यह सफलता जिले में पिछले एक वर्ष से चल रहे सतत शैक्षणिक अनुश्रवण और विद्यार्थियों की नियमित एवं अनुशासित तैयारी का सीधा और सकारात्मक परिणाम है।
कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर और जिला प्रशासन का मिला कुशल नेतृत्व
इस उल्लेखनीय और ऐतिहासिक सफलता के पीछे जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों की दूरदर्शिता रही है। कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के सतत मार्गदर्शन ने इस पूरे अभियान को एक नई ऊर्जा दी। दोनों ही अधिकारियों की शिक्षा के प्रति विशेष संवेदनशीलता और जिले में एक उत्कृष्ट एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण विकसित करने की प्रतिबद्धता के कारण ही इस अभियान को गति मिल सकी।
कलेक्टर के कड़े और स्पष्ट निर्देशों के बाद जिले में शिक्षा गुणवत्ता संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को ध्यान में रखते हुए पूरे जिले में विभिन्न नवाचारात्मक गतिविधियां संचालित की गईं। प्रशासनिक अधिकारियों ने समय-समय पर खुद विकासखंडों और दूरस्थ अंचलों के स्कूलों का दौरा कर शिक्षा के स्तर का जायजा लिया, जिससे शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों का मनोबल बढ़ा।
क्या थी जिला शिक्षा विभाग की ‘विशेष कार्ययोजना’ और रणनीति?
विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत सफलता सुनिश्चित करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) एवं जिला मिशन समन्वयक (डीएमसी) के संयुक्त नेतृत्व में सभी विकासखंडों में एक बेहद सुनियोजित और चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की गई थी। इस रणनीति के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:
- प्रारंभिक स्तर पर पात्र बच्चों की पहचान: शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही शासकीय विद्यालयों में कक्षा आठवीं में अध्ययनरत उन पात्र और होनहार विद्यार्थियों की पहचान की गई, जिनमें प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति रुचि थी।
- नियमित ओएमआर (OMR) शीट आधारित अभ्यास: चूंकि एनएमएमएस परीक्षा ओएमआर शीट पर होती है, इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों का डर दूर करने के लिए उन्हें शुरू से ही ओएमआर शीट पर उत्तर भरने का सघन अभ्यास कराया गया।
- विशेष मॉडल प्रश्नपत्रों का निर्माण: विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की एक कोर टीम बनाकर पिछले सालों के प्रश्नों के आधार पर नए मॉडल प्रश्नपत्र तैयार किए गए, जिससे बच्चों को परीक्षा के वास्तविक पैटर्न को समझने में मदद मिली।
- साप्ताहिक परीक्षण एवं परिणाम विश्लेषण: हर सप्ताह विद्यार्थियों का टेस्ट लिया जाता था और प्राप्त अंकों के आधार पर उनका मूल्यांकन किया जाता था। जिस विषय में बच्चे कमजोर पाए जाते थे, उस पर अतिरिक्त ध्यान दिया जाता था।
- विषयवार विशेष मार्गदर्शन: गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और मानसिक योग्यता (मैट) जैसे कठिन विषयों के लिए विशेष कक्षाओं का आयोजन किया गया।
जमीनी स्तर पर काम कर रही टीम को जाता है श्रेय
इस बड़े अभियान को धरातल पर उतारने का वास्तविक श्रेय जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ), संकुल समन्वयकों (सीएसी), संस्था प्रमुखों यानी प्राचार्यों और प्रधान पाठकों समेत उन समर्पित शिक्षकों को जाता है, जिन्होंने दिन-रात एक कर दिया। दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में स्थित स्कूलों के शिक्षकों ने अतिरिक्त कक्षाएं लेकर बच्चों को नियमित मार्गदर्शन, अभ्यास और हर संभव शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया। शिक्षकों के इसी समर्पण का परिणाम है कि आज कांकेर जिले के 143 घरों में शिक्षा का नया दीया जला है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने दी बधाई, उज्ज्वल भविष्य की कामना की
परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद कांकेर जिला शिक्षा अधिकारी ने इस शानदार उपलब्धि पर बेहद प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने सभी चयनित छात्र-छात्राओं, उनके गौरवान्वित पालकों, दिन-रात मेहनत करने वाले शिक्षकों और पूरे शैक्षणिक अमले को हार्दिक बधाई दी है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने संदेश में कहा कि यह ऐतिहासिक सफलता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि कांकेर के समस्त शैक्षणिक परिवार के सामूहिक प्रयास, अटूट समर्पण और निरंतर परिश्रम का मीठा फल है। उन्होंने चयनित विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी इस लय को टूटने न दें और भविष्य में होने वाली अन्य राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले को शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने सभी बच्चों को उनके आगामी शैक्षणिक जीवन के लिए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।









