मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026: निर्वाचन आयोग की 29 जून को बड़ी बैठक, सचिव दिनेश श्रीवास्तव करेंगे समीक्षा






राज्य निर्वाचन आयोग: मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 को लेकर 29 जून को बड़ी समीक्षा बैठक, सचिव दिनेश श्रीवास्तव ने दिए निर्देश

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राज्य निर्वाचन आयोग: मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 को लेकर 29 जून को बड़ी समीक्षा बैठक, सचिव दिनेश श्रीवास्तव ने दिए निर्देश

डेस्क न्यूज, भोपाल/राज्य ब्यूरो | अपडेटेड: 24 जून, 2026 | समय: 06:10 PM

राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) ने आगामी स्थानीय निकायों और त्रिस्तरीय पंचायतों के चुनावों के मद्देनजर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। नगरीय निकायों एवं पंचायतों की फोटोयुक्त मतदाता सूची के वार्षिक पुनरीक्षण वर्ष 2026 (Annual Revision of Voter List 2026) के कार्यों की प्रगति को परखने के लिए आयोग द्वारा एक अत्यंत महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के नवनियुक्त सचिव श्री दिनेश श्रीवास्तव (IAS) ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि यह उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आगामी 29 जून 2026 को शाम 4:30 बजे आयोजित की जाएगी।

इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह से पारदर्शी, त्रुटिरहित और अद्यतन (अपडेटेड) बनाना है। आयोग का पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे, साथ ही सूची में मौजूद विसंगतियों को समय रहते दूर किया जा सके। कोरोना काल के बाद से डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने की कड़ी में यह बैठक पूरी तरह से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से आयोजित की जाएगी, जिसमें राज्य भर के जमीनी स्तर के निर्वाचन अधिकारी सीधे जुड़ेंगे।

बैठक का संक्षिप्त विवरण (Quick Overview)

विषय विवरण
समीक्षा प्राधिकारी श्री दिनेश श्रीवास्तव, सचिव (राज्य निर्वाचन आयोग)
बैठक की तिथि 29 जून, 2026 (सोमवार)
समय शाम 04:30 बजे से
माध्यम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing)
मुख्य एजेंडा वार्षिक पुनरीक्षण 2026 की समीक्षा, मृत/शिफ्टेड/अप्राप्त मतदाताओं की जांच
अनिवार्य उपस्थिति उप जिला निर्वाचन अधिकारी, रजिस्ट्रीकरण एवं सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी

इन अधिकारियों की उपस्थिति रहेगी अनिवार्य, वीसी से जुड़ेंगे जिले

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस समीक्षा बैठक की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति को अनिवार्य किया गया है। बैठक में प्रशासनिक अमले के उन प्रमुख चेहरों को शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं, जिनके कंधों पर जमीनी स्तर पर चुनावी नामावली तैयार करने का सीधा जिम्मा होता है।

बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित स्तर के अधिकारी भाग लेंगे:

  • उप जिला निर्वाचन अधिकारी (स्थानीय निर्वाचन): जो जिला स्तर पर पूरे निर्वाचन कार्य की मॉनिटरिंग और समन्वय के लिए जिम्मेदार होते हैं।
  • रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (Electoral Registration Officers – ERO): जिनका मुख्य कार्य मतदाता सूचियों को वैधानिक रूप से स्वीकृत और अद्यतन करना है।
  • सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO): जो तहसील और ब्लॉक स्तर पर पुनरीक्षण दावों और आपत्तियों का प्रत्यक्ष सत्यापन करते हैं।
  • सहायक अधीक्षक (स्थानीय निर्वाचन): जो जिला निर्वाचन कार्यालयों में प्रशासनिक और तकनीकी कार्यों का संचालन देखते हैं।
महत्वपूर्ण नोट: सचिव श्री दिनेश श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया है कि बैठक में सभी अधिकारियों को पूरी प्रगति रिपोर्ट के साथ उपस्थित होना होगा। ढुलमुल रवैया अपनाने वाले या बिना ठोस कारण के अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ आयोग सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है।

बैठक का मुख्य एजेंडा: ‘फोर-पिलर’ जांच पर रहेगा विशेष फोकस

नगरीय निकायों और त्रिस्तरीय पंचायतों की मतदाता सूचियों में अक्सर यह शिकायतें सामने आती हैं कि कई मृत या क्षेत्र से पलायन कर चुके लोगों के नाम भी सूची में दर्ज रह जाते हैं, जिससे फर्जी मतदान की गुंजाइश बनी रहती है। इस बार आयोग ने तकनीक और डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन के जरिए इसे पूरी तरह दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया है। 29 जून को होने वाली बैठक में मुख्य रूप से चार प्रकार के मतदाताओं (Four Pillars of Verification) के नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रियाओं की विस्तृत समीक्षा की जाएगी:

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1. अनुपस्थित मतदाता (Absentee Voters)

ऐसे मतदाता जो पंजीकरण के समय दर्ज पते पर लंबे समय से उपलब्ध नहीं हैं या किसी अन्य शहर/राज्य में आजीविका के लिए रह रहे हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पंचनामा और भौतिक सत्यापन के आधार पर ऐसे नामों की छंटनी की स्थिति से आयोग को अवगत कराएं।

2. शिफ्टेड मतदाता (Shifted Voters)

शहरीकरण या विवाह और अन्य कारणों से जो लोग एक वार्ड/पंचायत से दूसरे वार्ड, शहर या जिले में स्थायी रूप से शिफ्ट हो चुके हैं। इनका नाम पुरानी जगह से हटाकर नई जगह जोड़ना अनिवार्य है, ताकि ‘डुप्लिकेसी’ (एक ही व्यक्ति का दो जगह नाम होना) को रोका जा सके।

3. मृत मतदाता (Deceased Voters)

मतदाता सूची की शुद्धता के लिए यह सबसे संवेदनशील हिस्सा है। स्थानीय प्रशासन और पंचायत स्तर के मृत्यु रजिस्टरों से मिलान कर सूची में से मृत व्यक्तियों के नाम हटाना प्राथमिकता में शामिल है। बैठक में इस बात की समीक्षा होगी कि अब तक कितने मृत मतदाताओं के नाम सूची से विलोपित किए जा चुके हैं।

4. रिपीट/डुप्लिकेट मतदाता (Repeated Voters)

तकनीकी खराबी या एक से अधिक बार आवेदन करने के कारण कुछ मतदाताओं के नाम सूची में दो या तीन बार अंकित हो जाते हैं। आयोग सॉफ्टवेयर और फिजिकल वेरिफिकेशन के माध्यम से ऐसे रिपीट नामों को हटाने की गति की समीक्षा करेगा।

15 जून तक मांगे गए थे दावे-आपत्तियां, अब अंतिम चरण में काम

गौरतलब है कि राज्य निर्वाचन आयोग ने फोटोयुक्त मतदाता सूची के वार्षिक पुनरीक्षण कार्यक्रम 2026 के तहत आम जनता से नाम जोड़ने, हटाने और किसी भी प्रकार के संशोधन के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। पूर्व में निर्धारित तिथियों में संशोधन करते हुए आयोग ने आवेदन करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 जून 2026 की थी, ताकि अधिक से अधिक पात्र युवा और नागरिक अपना नाम जुड़वा सकें।

15 जून तक प्राप्त हुए सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे की समय-सीमा अब नजदीक आ रही है। ऐसे में 29 जून की यह बैठक यह तय करेगी कि मैदानी स्तर पर काम कर रहे रजिस्ट्रीकरण और सहायक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों ने प्राप्त आवेदनों पर क्या कार्रवाई की है। आवेदनों के निरस्तीकरण या स्वीकृति का अनुपात क्या है, इसकी जिलेवार समीक्षा खुद सचिव दिनेश श्रीवास्तव करेंगे।

अधिकारियों को सख्त हिदायत: राज्य निर्वाचन आयोग का स्पष्ट मत है कि किसी भी वैध और पात्र नागरिक का नाम राजनैतिक दबाव या प्रशासनिक लापरवाही के कारण मतदाता सूची से नहीं छूटना चाहिए। यदि किसी भी जिले से ऐसी शिकायत मिलती है, तो सीधे संबंधित एईआरओ (AERO) की जवाबदेही तय की जाएगी।

स्थानीय सरकार के गठन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पुनरीक्षण?

भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में नगरीय निकाय (नगर निगम, नगरपालिका, नगर परिषद) और त्रिस्तरीय पंचायतें (ग्राम, जनपद और जिला पंचायत) जमीनी शासन की रीढ़ मानी जाती हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243K और 243ZA के तहत राज्य निर्वाचन आयोग को इन स्थानीय निकायों के चुनावों को निष्पक्ष तरीके से कराने की पूर्ण स्वायत्तता और जिम्मेदारी दी गई है।

चूंकि स्थानीय स्तर पर जीत-हार का अंतर बेहद कम (कई बार मात्र कुछ वोटों का) होता है, इसलिए मतदाता सूची में एक-एक नाम की शुद्धता मायने रखती है। यदि मतदाता सूची में विसंगतियां रहती हैं, तो चुनाव के बाद कानूनी विवाद और जन-असंतोष की स्थिति पैदा होती है। यही वजह है कि राज्य निर्वाचन आयोग के नवनियुक्त सचिव दिनेश श्रीवास्तव कार्यभार संभालते ही एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं और खुद वर्चुअली जुड़कर प्रत्येक जिले की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं।

समीक्षा बैठक के बाद क्या होगी आयोग की रणनीति?

29 जून को होने वाली इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बाद राज्य निर्वाचन आयोग मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन (Final Publication of Voters List) की दिशा में कदम बढ़ाएगा। बैठक से प्राप्त फीडबैक के आधार पर जिन क्षेत्रों या वार्डों में काम धीमा पाया जाएगा, वहां विशेष पर्यवेक्षक (Special Observers) भेजे जा सकते हैं। आयोग का लक्ष्य है कि मानसून के सीजन के साथ-साथ प्रशासनिक कार्य को सुचारू रूप से पूरा कर लिया जाए ताकि आगामी चुनावी प्रक्रियाओं को बिना किसी तकनीकी या कानूनी बाधा के समय पर संपन्न कराया जा सके।

तमाम जिला निर्वाचन अधिकारियों को पहले ही निर्देशित किया जा चुका है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की प्रोग्रेस रिपोर्ट, दावों-आपत्तियों के निपटारे का डेटा और अनुपस्थित/मृत मतदाताओं की सत्यापित सूची 29 जून की दोपहर तक आयोग के पोर्टल पर अपलोड करना सुनिश्चित करें, ताकि शाम को होने वाली वीसी में बिंदुवार चर्चा की जा सके।