छत्तीसगढ़ के पेंशनरों के लिए राहत की खबर है। अब महंगाई राहत (DR) बढ़ाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार की सहमति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मध्यप्रदेश वित्त विभाग ने पुरानी व्यवस्था में बदलाव करते हुए दूसरे राज्य की मंजूरी लेने की अनिवार्यता खत्म कर दी है।
17 जुलाई को जारी आदेश के बाद अब छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश सरकार अपने-अपने पेंशनरों के लिए महंगाई राहत बढ़ाने का फैसला खुद ले सकेंगी। इससे पेंशनरों को DR का लाभ पहले की तुलना में जल्दी मिलने की उम्मीद है।
पहले क्या था नियम?
राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के पेंशनरों की महंगाई राहत बढ़ाने के लिए दोनों राज्यों के बीच सहमति की प्रक्रिया अपनाई जाती थी। इस वजह से कई बार फैसला लेने में देरी होती थी और पेंशनरों को बढ़ी हुई राहत का लाभ समय पर नहीं मिल पाता था।
नई व्यवस्था में अब दोनों राज्य सीधे आदेश जारी कर सकेंगे। हालांकि, महंगाई राहत की दर केंद्र सरकार द्वारा तय दर से ज्यादा नहीं होगी। साथ ही दोनों राज्य एक-दूसरे को इससे होने वाले वित्तीय भार की जानकारी देंगे।
फेडरेशन ने लंबे समय से उठाई थी मांग
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन और पेंशनर्स फोरम ने इस फैसले का स्वागत किया है। फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा और पेंशनर्स फोरम के संयोजक बीपी शर्मा ने कहा कि पेंशनरों को DR मिलने में देरी से आर्थिक नुकसान हो रहा था। इसे लेकर संगठन लगातार सरकार से मांग कर रहे थे। संगठन ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव के साथ ही केंद्र सरकार को भी पत्र लिखकर इस व्यवस्था में बदलाव की मांग की थी।
लाखों पेंशनर्स को होगा फायदा
फेडरेशन का कहना है कि नई व्यवस्था से छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के लाखों पेंशनरों को समय पर महंगाई राहत मिल सकेगी। वर्षों से चली आ रही प्रक्रिया की वजह से होने वाली देरी अब कम होगी।
संगठन ने इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी का आभार जताया है।













