बेमेतरा जिले के ग्राम निनवा में बड़ा एक्शन: राजस्व रिकॉर्ड और नक्शे में अनियमित फेरबदल पर पटवारी अम्बा उपाध्याय निलंबित
बेमेतरा: छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में प्रशासनिक महकमे से एक बड़ी और सख्त कार्रवाई की खबर सामने आ रही है। जिले के प्रशासनिक अधिकारियों ने अनुशासनहीनता और पदीय कर्तव्यों के प्रति गंभीर लापरवाही बरतने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बाद, राजस्व रिकॉर्ड में गंभीर अनियमित फेरबदल किए जाने के मामले में पटवारी हल्का क्रमांक-40 की पटवारी अम्बा उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से पूरे जिले के मैदानी अमले और राजस्व कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
बिना सक्षम न्यायालय के आदेश के निजी भूमि के खसरा नंबरों और नक्शे में छेड़छाड़ करने के मामले में बेमेतरा प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लेते हुए पटवारी को सस्पेंड कर दिया है। प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए हल्का का अतिरिक्त प्रभार अन्य पटवारी को सौंप दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला बेमेतरा जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम निनवा से जुड़ा हुआ है। यहां हल्का क्रमांक-40 का पदभार संभाल रही पटवारी अम्बा उपाध्याय पर निजी स्वामित्व वाली भूमि के दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप लगे हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात खुलकर सामने आई कि संबंधित पटवारी द्वारा निजी भूमि के खसरा क्रमांक 184/1 एवं 184/2 के राजस्व अभिलेख (रिकॉर्ड) और नक्शे में अनाधिकृत रूप से बदलाव किए गए थे।
नियमानुसार राजस्व अभिलेखों या नक्शों में किसी भी प्रकार का संशोधन या फेरबदल करने के लिए सक्षम न्यायालय या प्राधिकारी का विधिवत आदेश होना अनिवार्य होता है। परंतु, इस प्रकरण में बिना किसी विधिक आदेश के ही रिकॉर्ड में हेरफेर कर दिया गया, जो सीधे तौर पर प्रशासनिक नियमों की अनदेखी और गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है।
एसडीओपी/एसडीएम जांच में हुआ खुलासा
इस पूरे प्रकरण की शिकायत मिलने के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), बेमेतरा द्वारा मामले की गहराई से जांच कराई गई। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जांच के दौरान आरोपों को सही पाया गया। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की विस्तृत जांच रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई कि पटवारी अम्बा उपाध्याय द्वारा अपने पदीय अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए राजस्व दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ किया गया है।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि पटवारी का यह कृत्य छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 115 एवं 116 के प्रावधानों के पूरी तरह विपरीत है। कानून के दायरे से बाहर जाकर किए गए इस तरह के बदलावों से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि आम नागरिकों के भूमि संबंधी अधिकारों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना बनी रहती है।
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत हुई कार्रवाई
प्रकरण की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने इसे अनुशासनहीनता का गंभीर मामला माना। कलेक्टर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देशानुसार, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पटवारी अम्बा उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कहां रहेगा, इस संबंध में जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश में निर्देशित किया गया है कि निलंबन काल में संबंधित पटवारी का मुख्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय, बेमेतरा निर्धारित किया जाता है। नियमानुसार निलंबन अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
राजस्व कार्यों की निरंतरता के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
किसी भी क्षेत्र में पटवारी के निलंबित होने या पद रिक्त होने की स्थिति में आम जनता को भूमि से जुड़े कार्यों के लिए परेशानियों का सामना न करना पड़े, इसे ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की है। ग्राम निनवा और संबंधित हल्का क्षेत्र के किसानों व आम नागरिकों के राजस्व कार्य बाधित न हों, इसके लिए प्रशासनिक आदेश जारी किए गए हैं।
जारी व्यवस्था के तहत, पटवारी हल्का क्रमांक-40 का संपूर्ण अतिरिक्त प्रभार हल्का क्रमांक-26 के पटवारी मेघनाथ वर्मा को सौंप दिया गया है। अब मेघनाथ वर्मा अपने नियमित हलके के साथ-साथ हल्का क्रमांक-40 का अतिरिक्त कार्यभार भी संभालेंगे, ताकि क्षेत्र के नागरिकों को नामांतरण, बटवारा, ऋण पुस्तिका और अन्य जरूरी राजस्व कार्यों के लिए किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
प्रशासन की दो टूक: लापरवाही बर्दाश्त नहीं
बेमेतरा जिले में राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े मामलों में इस तरह की सख्त कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि प्रशासनिक कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिला प्रशासन द्वारा लगातार यह निगरानी रखी जा रही है कि मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारी नियमों के दायरे में रहकर ही अपने दायित्वों का निर्वहन करें। इस कार्रवाई के बाद से जिले के अन्य राजस्व कर्मियों में भी हड़कंप मचा हुआ है और फाइलों के रखरखाव में पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।















