छत्तीसगढ़ के CCTNS डैशबोर्ड स्कोर में सुधार के कड़े निर्देश, मुख्य सचिव विकास शील ने ली गृह विभाग की उच्च स्तरीय बैठक
छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था, डिजिटल पुलिसिंग और आपराधिक डेटा प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और चुस्त-दुरुस्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकास शील की अध्यक्षता में गृह विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं सिस्टम (CCTNS) के डैशबोर्ड की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के कमजोर बिंदुओं को बारीकी से चिन्हित किया गया और उनमें त्वरित तथा प्रभावी सुधार करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। बैठक में राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) अरुण देव गौतम भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
NCRB स्कोरकार्ड में 64.97 अंक, प्रशासनिक सुधार में शत-प्रतिशत सफलता
बैठक के दौरान राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी नवीनतम स्टेट स्कोरकार्ड की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ को 100 में से 64.97 अंक प्राप्त हुए हैं। हालांकि ओवरऑल स्कोर में अभी सुधार की गुंजाइश है, लेकिन राज्य ने ‘प्रशासनिक सुधार’ और ‘मेडिकोलीगल रिपोर्ट पोर्टल’ के सफल क्रियान्वयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पूर्ण अंक हासिल किए हैं। मुख्य सचिव ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि कुछ क्षेत्रों में कार्य बेहतर हुआ है, लेकिन जिन मापदंडों पर स्कोर कम है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुधारने की आवश्यकता है।
- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के स्कोरकार्ड में छत्तीसगढ़ को मिले 64.97 अंक।
- ‘प्रशासनिक सुधार’ और ‘मेडिकोलीगल रिपोर्ट पोर्टल’ के क्रियान्वयन में राज्य ने हासिल किए पूर्ण अंक।
- जीरो एफआईआर, ई-चार्जशीट और न्याय श्रुति प्रणाली को शीघ्र लागू करने पर विशेष जोर।
जीरो एफआईआर और ई-चार्जशीट को सुदृढ़ करने के निर्देश
डिजिटल पुलिसिंग के उद्देश्यों को जमीन पर पूरी तरह उतारने के लिए मुख्य सचिव विकास शील ने स्पष्ट किया कि जीरो एफआईआर (Zero FIR) और ई-चार्जशीट (e-ChargeSheet) की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, सरल तथा पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि थानों स्तर पर मिलने वाली शिकायतों और प्राथमिक सूचना रिपोर्ट दर्ज करने की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समय पर मामलों का निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि आधुनिक तकनीकी माध्यमों का पूरी क्षमता से उपयोग किया जाए।
न्यायालयों में मामलों के त्वरित निपटारे के लिए निर्धारित समयावधि का हवाला देते हुए कड़े निर्देश दिए गए कि हर हाल में 60 एवं 90 दिवस के भीतर न्यायालयों में चालान प्रस्तुत किया जाना सुनिश्चित किया जाए। अभियोजन और पुलिस समन्वय को बेहतर कर लंबित मामलों के निराकरण में तेजी लाई जाए।
‘न्याय श्रुति प्रणाली’ और ई-साक्ष्य के उपयोग पर जोर
आधुनिक न्याय प्रणाली में तकनीक की भूमिका को रेखांकित करते हुए बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए ‘न्याय श्रुति प्रणाली’ को शीघ्र अति शीघ्र धरातल पर उतारने के निर्देश दिए गए। इससे न केवल गवाहों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित होगी, बल्कि अदालती कार्रवाई में लगने वाले समय में भी भारी कमी आएगी।
इसके साथ ही, डिजिटल साक्ष्यों की बढ़ती महत्ता को ध्यान में रखते हुए ‘ई-साक्ष्य’ (E-Evidence) के अधिकाधिक उपयोग पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। अपराध अनुसंधान के दौरान डिजिटल एविडेंस को सुरक्षित तरीके से संग्रहित करने और अदालतों में प्रस्तुत करने के लिए पुलिस कर्मियों को तकनीकी रूप से और अधिक दक्ष बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में रहे ये वरिष्ठ अधिकारी मौजूद
CCTNS डैशबोर्ड की इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान पुलिस और गृह विभाग के बीच समन्वय स्थापित करने तथा प्रशासनिक कसावट लाने पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में गृह विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विधायी कार्य विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत, गृह विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता सहित कई अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने-अपने विभागों से जुड़े डेटा और रिपोर्ट को बैठक के समक्ष रखा।
Ashish Sinha
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