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दुर्ग जिले के कचांदुर गांव के मुक्तिधाम में शनिवार सुबह खून के निशान, नींबू, मछली, अंडे और अन्य पूजा सामग्री मिलने से सनसनी फैल गई

दुर्ग जिले के कचांदुर गांव के मुक्तिधाम में शनिवार सुबह खून के निशान, नींबू, मछली, अंडे और अन्य पूजा सामग्री मिलने से सनसनी फैल गई। सुबह वहां पहुंचे ग्रामीणों ने यह नजारा देखा तो हैरान रह गए। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। गांव के सरपंच का दावा है कि मुक्तिधाम में सूअर के बच्चे की बलि दी गई है, हालांकि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

सरपंच ने बताया कि सुबह मुक्तिधाम में रेलिंग लगाने के लिए भेजे गए दो मजदूरों ने वहां बिखरी पूजा सामग्री और खून के निशान देखकर उन्हें सूचना दी। इसके बाद पुलिस चौकी को मामले की जानकारी दी गई।

ग्रामीणों का अनुमान है कि रात के समय किसी ने मुक्तिधाम में तंत्र-मंत्र से जुड़ी पूजा की होगी। सुबह जब लोग वहां पहुंचे तो जमीन पर खून फैला हुआ था और पूजा में इस्तेमाल होने वाली कई सामग्री बिखरी पड़ी थी। इसके बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

बैगा पूजा किए जाने की आशंका

स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी बैगा ने तंत्र-मंत्र से जुड़ी पूजा की होगी। पूजा पूरी होने के बाद वह वहां से चला गया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि पूजा किस उद्देश्य से की गई थी। घटना के बाद ग्रामीणों में डर और उत्सुकता का माहौल है।

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पुलिस ने पशु बलि की पुष्टि नहीं की

मुक्तिधाम के आसपास खून के निशान मिले हैं, लेकिन यह खून किसका है, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान पशु बलि जैसी कोई बात सामने नहीं आई है।

वहीं सरपंच का दावा है कि सूअर के बच्चे की बलि देकर उसे मटके में रखा गया था। फिलहाल मौके पर मिले सामान के आधार पर केवल तंत्र-मंत्र से जुड़ी पूजा किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

पुलिस ने किया मुआयना

सूचना मिलने पर जेवरा-सिरसा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और फिलहाल किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। गांव में पूरे दिन इस घटना को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा।

सावन से पहले ‘गांव बांधने’ की परंपरा

सरपंच ने बताया कि सावन शुरू होने से एक दिन पहले गांव में बैगा द्वारा ‘गांव बांधने’ की पूजा करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। वहीं कुछ ग्रामीणों का कहना है कि सावन के दौरान तंत्र-मंत्र से जुड़ी गतिविधियों की चर्चाएं भी बढ़ जाती हैं।

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