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अंबिकापुर राजीव भवन में मनाई गई पंडित रविशंकर शुक्ल और विद्याचरण शुक्ल की जयंती, कांग्रेसजनों ने दी श्रद्धांजलि






अंबिकापुर राजीव भवन में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई स्व. पंडित रविशंकर शुक्ल एवं स्व. पंडित विद्याचरण शुक्ल की जयंती – विशेष रिपोर्ट


अंबिकापुर के राजीव भवन में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई स्व. पंडित रविशंकर शुक्ल एवं स्व. पंडित विद्याचरण शुक्ल की जयंती

स्थान: अंबिकापुर, सरगुजा (छत्तीसगढ़)
दिनांक: 2 अगस्त 2026
प्रसारण: विशेष राजनीतिक एवं ऐतिहासिक समाचार रिपोर्ट

अंबिकापुर: जिला कांग्रेस कमेटी सरगुजा द्वारा आज स्थानीय राजीव भवन में भारतीय राजनीति के पुरोधाओं और राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान देने वाली विभूतियों—अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय पंडित रविशंकर शुक्ल एवं देश के दिग्गज नेता तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय पंडित विद्याचरण शुक्ल की जयंती अत्यंत श्रद्धा, हर्षोल्लास और सम्मान के साथ मनाई गई। इस गरिमामयी अवसर पर सरगुजा जिले के तमाम वरिष्ठ कांग्रेसजनों, पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर दोनों महान विभूतियों के तैल चित्रों पर माल्यार्पण किया और अपनी सविनय पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

समाचार सार: सरगुजा जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में आयोजित इस जयंती समारोह में वक्ताओं ने अविभाजित मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल और दूरदर्शी राजनेता विद्याचरण शुक्ल के राजनीतिक सफर, राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका तथा उनके आदर्शों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण युवा कार्यकर्ताओं की उपस्थिति और दोनों दिवंगत नेताओं के जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का सामूहिक संकल्प रहा।

भारतीय राजनीति के दो महासूर्य: एक ऐतिहासिक सिंहावलोकन

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से लेकर स्वतंत्र भारत के प्रशासनिक और लोकतांत्रिक ताने-बाने को गढ़ने में जिन गिने-चुने राजनेताओं ने अपनी निर्णायक भूमिका निभाई, उनमें पंडित रविशंकर शुक्ल और उनके सुपुत्र पंडित विद्याचरण शुक्ल का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। एक तरफ जहां पंडित रविशंकर शुक्ल ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कड़े संघर्ष झेले और आजाद भारत के बाद एक नए राज्य (अविभाजित मध्यप्रदेश) के सुदृढ़ प्रशासनिक ढांचे की आधारशिला रखी, वहीं दूसरी ओर पंडित विद्याचरण शुक्ल ने देश के सबसे लंबे समय तक संसद सदस्य रहने और केंद्रीय मंत्री के रूप में देश की विदेश नीति, सूचना एवं प्रसारण तथा आंतरिक सुरक्षा जैसे अहम विभागों को संभालते हुए एक मजबूत राजनीतिक कौशल का परिचय दिया।

अंबिकापुर के राजीव भवन में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम ने एक बार फिर से नई पीढ़ी को इन महान नेताओं के कृतित्व से रूबरू कराने का काम किया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और दोनों नेताओं के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ हुई। उपस्थित प्रत्येक कांग्रेसजन के चेहरे पर इन महान नेताओं के प्रति अगाध श्रद्धा और सम्मान का भाव स्पष्ट रूप से झलक रहा था।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक का संबोधन: “उनका जीवन संघर्ष और राष्ट्रसेवा का पर्याय था”

कार्यक्रम को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी सरगुजा के अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने कहा कि स्वर्गीय पंडित रविशंकर शुक्ल ने प्रदेश के विकास की इतनी सुदृढ़ और मजबूत नींव रखी कि आज भी इस क्षेत्र की प्रगति में उनकी नीतियां और दूरदर्शिता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने अपने दूरदर्शी नेतृत्व से जनसेवा की एक ऐसी अनुकरणीय परंपरा स्थापित की, जिस पर चलकर आज भी जनप्रतिनिधि जनता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

बालकृष्ण पाठक ने पंडित विद्याचरण शुक्ल के योगदान को याद करते हुए कहा कि, “स्वर्गीय पंडित विद्याचरण शुक्ल ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में लोकतांत्रिक मूल्यों, जनहित और देश के चहुंमुखी विकास के लिए जो उल्लेखनीय योगदान दिया, वह अतुलनीय है। उनका पूरा जीवन संघर्ष, समर्पण और राष्ट्रसेवा का जीवंत प्रतीक रहा है। उनके विचार और उनके आदर्श आज भी कांग्रेस पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता को पूरी निष्ठा के साथ जनसेवा करने के लिए प्रेरित करते हैं।”

“पंडित रविशंकर शुक्ल और पंडित विद्याचरण शुक्ल का पूरा राजनीतिक जीवन व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से परे होकर राष्ट्र और समाज के उत्थान को समर्पित था। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में उनके आदर्शों का अनुसरण करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।” — बालकृष्ण पाठक, अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी सरगुजा

अविभाजित मध्यप्रदेश के विकास में पंडित रविशंकर शुक्ल का अतुलनीय योगदान

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए पंडित रविशंकर शुक्ल के प्रशासनिक और वैचारिक योगदान पर विस्तार से चर्चा की। मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने जिस विषम परिस्थितियों में शासन की बागडोर संभाली थी, वह किसी चुनौती से कम नहीं था। रियासतों के एकीकरण से लेकर प्रशासनिक इकाइयों के गठन और शिक्षा, कृषि तथा बुनियादी ढांचे के विकास में उन्होंने जो दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाई, उसने नए राज्य को स्थिरता प्रदान की।

उनका मानना था कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा और विकास की रोशनी नहीं पहुंचेगी, तब तक स्वराज का सपना अधूरा रहेगा। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में उन्होंने कई बार ब्रिटिश हुकूमत की प्रताड़ना झेली, लेकिन राष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा कभी विचलित नहीं हुई। अंबिकापुर के कांग्रेसजनों ने उनके इन्हीं गुणों को याद करते हुए वर्तमान समय में समाज में व्याप्त असमानता को दूर करने के लिए उनके विचारों प्रासंगिकता पर बल दिया।

पंडित विद्याचरण शुक्ल: दूरदर्शी नीति निर्माता और ओजस्वी वक्ता

स्वर्गीय पंडित विद्याचरण शुक्ल के राजनीतिक सफर को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वे केवल एक राजनेता नहीं बल्कि एक कुशल प्रशासक और दूरदर्शी रणनीतिकार थे। देश की केंद्र सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभालते हुए उन्होंने देश की प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने में अहम भूमिका निभाई। आपातकाल के बाद के जटिल राजनीतिक दौर में भी उन्होंने अपनी राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया और हमेशा राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा।

छत्तीसगढ़ी माटी से जुड़ाव और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी अमिट छाप ने प्रदेश का नाम हमेशा गौरवान्वित किया है। सरगुजा अंचल के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनके संस्मरणों को साझा करते हुए कहा कि उनका ओजस्वी व्यक्तित्व और जनता से सीधा संवाद स्थापित करने की कला हर कार्यकर्ता के लिए सीखने योग्य है।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित कांग्रेसजन

राजीव भवन अंबिकापुर में आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में सरगुजा जिले के तमाम वरिष्ठ और सक्रिय नेतागण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजन को सफल बनाने और दिवंगतों को नमन करने वालों में निम्नलिखित प्रमुख नाम शामिल रहे:

  • इंद्रजीत सिंह धनजल (अध्यक्ष, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी)
  • मो. इस्लामुद्दीन (उपाध्यक्ष)
  • जमील खान (महामंत्री)
  • नरेंद्र कुमार विश्वकर्मा (प्रवक्ता)
  • लुक्स एक्का (पार्षद)
  • सोहन जायसवाल (मंडल अध्यक्ष)
  • आलोक कुमार गुप्ता
  • अमित वर्मा
  • धनमीत सिंह
  • रोशन कनोजिया
  • विकास
  • सोहेल अली
  • शकीला

…इसके अलावा सरगुजा जिले के विभिन्न वार्डों और ब्लॉकों से आए सैकड़ों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

संकल्प समारोह: जनसेवा और राष्ट्र निर्माण का लिया गया संकल्प

जयंती कार्यक्रम के अंतिम चरण में एक संकल्प सभा का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित सभी कांग्रेसजनों ने एक स्वर में यह प्रण लिया कि वे पंडित रविशंकर शुक्ल और पंडित विद्याचरण शुक्ल के बताए मार्ग पर पूरी ईमानदारी से चलेंगे। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने और जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को और अधिक एकजुट होने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रहित और जनहित के कार्यों को जमीन पर उतारने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। अंबिकापुर के राजीव भवन में आयोजित इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सरगुजा का कांग्रेस संगठन अपने महापुरुषों के वैचारिक इतिहास को सहेजने और उनसे प्रेरणा लेने में हमेशा आगे रहा है।