कांवड़ यात्रा में युवती पर तेज़ाब हमले से गरमाई राजनीति, वंदना राजपूत बोलीं- डबल इंजन सरकार में बेटियां कहीं भी सुरक्षित नहीं
रायपुर, 19 अगस्त 2026: छत्तीसगढ़ में धार्मिक यात्रा के दौरान एक युवती पर तेज़ाब (एसिड) से हमला किए जाने की भयावह घटना को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा जैसी पवित्र और हजारों लोगों की भीड़ वाले आयोजन में एक बेटी पर तेज़ाब फेंका जाना यह साबित करता है कि प्रदेश में अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं। यह घटना सरकार के ‘सुशासन’ के दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
- हजारों की भीड़ में कांवड़ यात्रा के दौरान युवती पर तेज़ाब फेंकना बेहद शर्मनाक और खौफनाक।
- बेटियों पर बड़े-बड़े भाषण देने वाले नींद से जागें, राज्य में न घर सुरक्षित है न मंदिर या अस्पताल।
- डबल इंजन सरकार में कानून व्यवस्था सुधारने का प्रधानमंत्री मोदी का वादा झूठा साबित हुआ।
- धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं और महिलाओं की सुरक्षा पुलिस व प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
‘नींद से जागें बड़े-बड़े भाषण देने वाले’
कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि बेटियों की सुरक्षा पर बड़े-बड़े भाषण देने वाले नेताओं को अब नींद से जागना चाहिए। आज स्थिति यह हो गई है कि प्रदेश की बेटियां घर, स्कूल, मंदिर, अस्पताल कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में डबल इंजन सरकार बनने पर कानून व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार का वादा किया था, लेकिन वह वादा पूरी तरह झूठा निकला।
धार्मिक आयोजनों की पवित्रता और सुरक्षा पर सवाल
वंदना राजपूत ने कहा कि जब प्रदेश में धार्मिक आयोजनों और कांवड़ यात्राओं के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर निकलते हैं, तब महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा की विशेष जिम्मेदारी प्रशासन और पुलिस तंत्र की होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी धार्मिक आयोजन की पवित्रता तभी कायम रह सकती है, जब उसमें शामिल हर महिला और श्रद्धालु खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करे।
सुरक्षित वातावरण देना सरकार की पहली जिम्मेदारी
कांग्रेस प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ की बेटियों और महिलाओं को भयमुक्त और सुरक्षित वातावरण देना सरकार का पहला कर्तव्य है। भाजपा शासनकाल में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति बेहद चिंता का विषय बन चुकी है और जनता इस नाकामी को देख रही है।

















