रायपुर: राजीव भवन में आदिवासी कांग्रेस की अहम बैठक, विश्व आदिवासी दिवस का उपहास उड़ाने पर भाजपा सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित
रायपुर, 27 अगस्त 2026: राजीव भवन में आयोजित आदिवासी कांग्रेस कार्यकारिणी समिति एवं आदिवासी सलाहकार परिषद की विशेष बैठक में आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रान्त भूरिया का आत्मीय स्वागत किया गया। बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू, आदिवासी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जनक ध्रुव, डॉ. शिवकुमार डहरिया और अमरजीत भगत सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता एवं विधायक उपस्थित रहे। इस दौरान राज्य में वन अधिकार अधिनियम, पेसा कानून के अनुपालन और जल-जंगल-जमीन पर आदिवासी हितों की उपेक्षा को लेकर विस्तृत मंथन किया गया तथा संगठन स्तर पर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई।
- राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत: आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रान्त भूरिया का राजीव भवन में आत्मीय स्वागत।
- निंदा प्रस्ताव पारित: विश्व आदिवासी दिवस पर कोई आयोजन न करने और 32% आदिवासी समाज की उपेक्षा पर भाजपा सरकार के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित।
- जल-जंगल-जमीन पर चर्चा: संसाधनों के असंतुलित दोहन, वनाधिकार पट्टे और पर्यावरणीय संकट पर गहन विचार-विमर्श।
- आंदोलन की रूपरेखा: आदिवासी अधिकारों के संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर बड़े आंदोलन की तैयारी।
विश्व आदिवासी दिवस न मनाने पर भाजपा सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बैठक में भाजपा सरकार के खिलाफ विश्व आदिवासी दिवस न मनाने पर निंदा प्रस्ताव रखा, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि विश्व आदिवासी दिवस कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि आदिवासी अस्मिता और गौरव का दिन है। राज्य की भाजपा सरकार ने इस अवसर पर कोई शासकीय आयोजन नहीं किया, यहां तक कि मुख्यमंत्री व मंत्रियों ने प्रदेश की 32 प्रतिशत आदिवासी आबादी को बधाई देने की औपचारिकता तक नहीं निभाई, जो संपूर्ण आदिवासी समाज का घोर अपमान है।
आरएसएस और भाजपा के एजेंडे पर तीखा हमला
बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया कि आरएसएस आदिवासी संस्कृति को स्वतंत्र सभ्यता मानने का विरोध करती है और उन्हें आज भी पिछलग्गू बनाकर रखना चाहती है। भाजपा आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर से अधिकार छीनकर उन्हें ‘आदिवासी’ की जगह ‘वनवासी’ बताती है ताकि उनके प्राकृतिक संसाधनों को अपने उद्योगपति मित्रों को सौंपा जा सके। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी आदिवासी समाज के अधिकार, सम्मान और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और इस अन्याय के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाएगी।















