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प्रदेश में सिंगल यूज प्लास्टिक और 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले कैरी बैग के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए अब कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन रखा जाएगा

प्रदेश में सिंगल यूज प्लास्टिक और 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले कैरी बैग के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए अब कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन रखा जाएगा। यानी प्रतिबंधित प्लास्टिक बेचते या इस्तेमाल करते कोई पकड़ा गया या उसके खिलाफ शिकायत आई तो जांच और कार्रवाई की जानकारी वेब पोर्टल और मोबाइल एप पर दर्ज होगी।

इससे नगरीय प्रशासन विभाग के पास दुकानदार, कारोबारी या निर्माता का रिकॉर्ड तैयार होता जाएगा। एक ही व्यक्ति या कारोबारी के यहां दोबारा प्रतिबंधित प्लास्टिक मिलने पर पिछली कार्रवाई भी सामने रहेगी और उसके आधार पर सख्त कार्रवाई की जा सकेगी। जांच सिर्फ दुकानों तक सीमित नहीं रहेगी। प्रतिबंधित प्लास्टिक बनाने वाले कारखानों, थोक कारोबारियों और सप्लायरों की भी जांच होगी।

इसके लिए नगरीय प्रशासन विभाग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें मिलकर अभियान चलाएंगी। जरूरत पड़ने पर पुलिस भी साथ रहेगी। अभियान में जांच करने वाले अधिकारियों को ‘एसयूपी बैन कंप्लायंस मॉनिटरिंग पोर्टल’ पर अपना पंजीयन कराना होगा। मौके पर प्रतिबंधित प्लास्टिक मिलने पर उसकी जानकारी और की गई कार्रवाई ‘एसयूपी फील्ड इंस्पेक्शन मोबाइल एप’ से तुरंत ऑनलाइन दर्ज करनी होगी।

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इससे विभाग को यह पता रहेगा कि किस शहर में कितनी जांच हुई, कितने मामले मिले और कितनों पर कार्रवाई हुई। लोगों की शिकायत के लिए ‘एसयूपी पब्लिक ग्रिवांस मोबाइल एप’ का भी प्रचार किया जाएगा। इसके जरिए मिली शिकायतों पर स्थानीय निकायों को कार्रवाई करनी होगी। हालांकि केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड बनाने से प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद नहीं होगा। असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि बाजार में जांच कितनी नियमित होती है और बार-बार नियम तोड़ने वालों पर वास्तव में कितनी सख्ती होती है।

जुर्माने से लेकर कारखाना बंद कराने तक कार्रवाई नियम तोड़ने वालों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा 5 के तहत कार्रवाई होगी। प्रतिबंधित प्लास्टिक जब्त करने के साथ नोटिस दिया जा सकता है। अवैध तरीके से प्लास्टिक बनाने वाली इकाई बंद कराने और पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के नाम पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। हर तीन महीने में स्थानीय निकायों को अपनी कार्रवाई का हिसाब देना होगा। इसमें कितनी प्लास्टिक जब्त हुई, कितना जुर्माना वसूला गया, कितने चालान काटे गए और कितनी इकाइयां बंद कराई गईं, इसकी जानकारी देनी होगी।

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