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गांधी जयंती पर पीएम मोदी का संदेश: स्वदेशी और खादी अपनाकर बनाएं समृद्ध व ‘विकसित भारत’






गांधी जयंती विशेष: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अर्पित की श्रद्धांजलि | विकसित भारत और स्वदेशी संकल्प


गांधी जयंती विशेष: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि

तिथि: 2 अक्टूबर |
स्थान: नई दिल्ली |
विषय: स्वदेशी, खादी और विकसित भारत 2047
“महात्मा गांधी के विचार पूरी दुनिया को प्रेरित करते हैं और जब तक मानवता का प्रवाह कायम है, तब तक उनकी प्रासंगिकता बनी रहेगी। आइए, इस गांधी जयंती पर कम से कम एक खादी उत्पाद खरीदने का संकल्प लें और गर्व से इसे स्वदेशी कहें।”
— प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली: देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती (गांधी जयंती) के पावन अवसर पर उन्हें कोटि-कोटि नमन किया और भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया कि महात्मा गांधी के विचार न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व को दिशा दिखाने का सामर्थ्य रखते हैं। बापू का जीवन दर्शन, अहिंसा का संदेश और सत्य का मार्ग आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना स्वतंत्रता संग्राम के दौरान था।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के विचार तब तक प्रासंगिक रहेंगे जब तक मानव सभ्यता का प्रवाह मानवता के मूल्यों से जुड़ा रहेगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने बापू के स्वदेशी के दृष्टिकोण पर विशेष बल दिया और देशवासियों से खादी अपनाने का पुरजोर आह्वान किया। उन्होंने हर नागरिक से 2 अक्टूबर के दिन कम से कम एक खादी या स्थानीय स्वदेशी उत्पाद खरीदने का आग्रह किया, ताकि देश के बुनकरों, कारीगरों और स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन मिल सके।

“May Bapu’s timeless message keep guiding us towards a better society and a Viksit Bharat. #GandhiJayanti”

1. महात्मा गांधी का कालजयी दर्शन और आधुनिक विश्व

महात्मा गांधी का जीवन केवल एक इतिहास का अध्याय नहीं है, बल्कि वह एक दर्शन है जो हर युग में प्रासंगिक रहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि बापू के सिद्धांत सीमाओं में बंधे हुए नहीं हैं। आज जब पूरा विश्व विभिन्न प्रकार के संघर्षों, जलवायु परिवर्तन, असमानता और वैश्विक तनावों से जूझ रहा है, ऐसे समय में बापू के सत्य, अहिंसा और करुणा के सिद्धांत मानवता को एक नया मार्ग दिखाते हैं।

गांधीजी का विचार था कि दुनिया में शांति और सौहार्द केवल बाहुबल से नहीं, बल्कि नैतिक बल और आत्म-नियंत्रण से आ सकता है। जब हम बापू के ‘सर्वोदय’ (सबका उदय) के सिद्धांत की बात करते हैं, तो यह आज के समावेशी विकास (Inclusive Growth) के विजन से पूरी तरह मेल खाता है।

बापू के प्रमुख स्तंभ:

  • सत्य और अहिंसा: बापू का मानना था कि अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा का अभाव नहीं है, बल्कि विचारों और शब्दों में भी किसी के प्रति द्वेष न रखना है।
  • सत्याग्रह: अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रतिरोध का एक ऐसा हथियार जिसने दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य को झुका दिया।
  • अपरिग्रह और सादगी: संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और लालच से दूर रहना, जो आज के समय में पर्यावरण संरक्षण का आधार है।
  • स्वदेशी: स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाना।

2. स्वदेशी का संकल्प: खादी केवल एक वस्त्र नहीं, एक विचार है

गांधी जयंती के इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बापू के स्वदेशी आंदोलन की भावना को पुनः जागृत करने का आह्वान किया। महात्मा गांधी के लिए खादी केवल सूती कपड़ा नहीं थी, बल्कि यह भारत की आत्मनिर्भरता, स्वाभिमान और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतीक थी। बापू मानते थे कि चरखा और खादी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।

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प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले एक दशक में खादी के पुनरुत्थान के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज खादी ‘नेशन फॉर फैशन’ और ‘फैशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन’ बन चुकी है। खादी अब केवल ग्रामीण भारत का कपड़ा नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक फैशन मंचों पर भी अपनी पहचान बना रहा है।

स्वदेशी अपनाएं

स्थानीय कारीगरों और बुनकरों का समर्थन करें।

खादी खरीदें

2 अक्टूबर को कम से कम एक खादी उत्पाद खरीदने का संकल्प।

वोकल फॉर लोकल

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देकर आत्मनिर्भर भारत का निर्माण।

विकसित भारत @2047

गांधीजी के सपनों के भारत का निर्माण।

‘वोकल फॉर लोकल’ का मंत्र

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से भावुक अपील करते हुए कहा, “2 अक्टूबर को जब आप बाजार जाएं, तो कम से कम एक खादी का उत्पाद या कोई स्थानीय स्वदेशी सामान जरूर खरीदें। जब आप खादी का एक वस्त्र खरीदते हैं, तो आप केवल एक कपड़ा नहीं खरीदते, बल्कि उस गरीब बुनकर, उस कारीगर के घर में खुशी का दीपक जलाते हैं जो दिन-रात मेहनत करके इसे बनाता है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें स्वदेशी सामान खरीदने में गर्व का अनुभव होना चाहिए। जब नागरिक अपनी राष्ट्रीय वस्तुओं पर गर्व महसूस करते हैं, तो देश की अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व गति मिलती है। ‘वोकल फॉर लोकल’ का यह अभियान ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ बनने की दिशा में पहला कदम है।

3. गांधीजी का ‘सर्वोदय’ और आज का ‘विकसित भारत’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में बापू के सिद्धांतों को भारत के भविष्य के रोडमैप से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत आज वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में महात्मा गांधी के विचार ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति हैं।

विकसित भारत केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं है; इसमें सामाजिक न्याय, स्वच्छता, पर्यावरणीय संतुलन और अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना शामिल है। यही गांधीजी का ‘अंत्योदय’ का सपना था – यानी समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का कल्याण।

गांधीजी के सपनों से जुड़ती आधुनिक योजनाएं:

  1. स्वच्छ भारत मिशन: बापू मानते थे कि स्वच्छता स्वतंत्रता से भी अधिक महत्वपूर्ण है। 2014 में शुरू किया गया स्वच्छ भारत मिशन महात्मा गांधी को समर्पित सबसे बड़ा जन-आंदोलन बना।
  2. आत्मनिर्भर भारत: बापू के स्वदेशी मॉडल का आधुनिक रूप, जिसमें भारत को निर्माण और तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य है।
  3. डिजिटल इंडिया और जन धन योजना: समाज के अंतिम व्यक्ति तक वित्तीय समावेशन और सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित करना, जो बापू के सर्वोदय के विचार को साकार करता है।
  4. पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली (LiFE Movement): बापू के ‘अपरिग्रह’ और सतत जीवनशैली के सिद्धांतों पर आधारित वैश्विक पहल।

4. स्वच्छता से समृद्धि: बापू के प्रति सबसे बड़ी श्रद्धांजलि

महात्मा गांधी स्वच्छता को ईश्वर की भक्ति के समान मानते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया कि बापू का यह दृढ़ विश्वास था कि जब तक हमारा आसपास का वातावरण स्वच्छ नहीं होगा, तब तक हमारी सोच और समाज निर्मल नहीं हो सकता।

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने स्वच्छता के क्षेत्र में जो क्रांति देखी है, वह बापू के प्रति पूरे देश की श्रद्धांजलि है। आज स्वच्छता केवल एक आदत नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय पहचान बन चुकी है। ‘एक तारीख, एक घंटा, एक साथ’ जैसे अभियानों के माध्यम से देश के करोड़ों नागरिकों ने श्रमदान करके बापू के इस प्रिय कार्य को आगे बढ़ाया है।

5. वैश्विक मंचों पर गांधीवादी विचारों की गूंज

प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि आज जब दुनिया आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, और युद्ध जैसी चुनौतियों से जूझ रही है, तब महात्मा गांधी का शांति और अहिंसा का मार्ग दुनिया के लिए एकमात्र समाधान प्रतीत होता है। संयुक्त राष्ट्र से लेकर विश्व के विभिन्न देशों में गांधीजी की प्रतिमाएं और उनके विचार मानवता को एकजुट करने का काम कर रहे हैं।

भारत की अध्यक्षता में आयोजित विभिन्न वैश्विक सम्मेलनों में भी गांधीवादी मूल्यों की छाप साफ देखी गई है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (पूरा विश्व एक परिवार है) की भावना महात्मा गांधी के अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण का ही विस्तार है।

6. नई पीढ़ी और बापू के विचार

प्रधानमंत्री मोदी ने देश के युवाओं से विशेष रूप से बापू के जीवन से सीखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को गांधीजी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ (My Experiments with Truth) अवश्य पढ़नी चाहिए। बापू का जीवन हमें सिखाता है कि कैसे दृढ़ संकल्प, सत्यनिष्ठा और अनुशासन से बड़े से बड़े लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “युवाओं को बापू के विचारों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने दैनिक जीवन में उतारना चाहिए। जब हम अपने दैनिक व्यवहार में ईमानदारी, सादगी और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता लाते हैं, तो हम सही मायनों में गांधी जयंती मना रहे होते हैं।”

7.बेहतर समाज और स्वर्णिम भारत का संकल्प

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश हमें याद दिलाता है कि गांधी जयंती केवल एक दिवस विशेष का उत्सव नहीं है, बल्कि यह आत्म-विश्लेषण और राष्ट्र-निर्माण के संकल्प का अवसर है। बापू का संदेश कालजयी है और यह हमें एक बेहतर समाज, एक समावेशी राष्ट्र और एक ‘विकसित भारत’ के निर्माण का मार्ग दिखाता रहेगा।

आइए, इस गांधी जयंती पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपने आचरण में सत्य और अहिंसा को स्थान देंगे, स्वच्छता को अपनाएंगे, स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी और खादी उत्पाद खरीदेंगे, और भारत को विश्व गुरु बनाने के सपने को साकार करने में अपना योगदान देंगे।

“जय हिंद! जय भारत! भारत माता की जय!”

© 2026 विशेष समाचार कवरेज – गांधी जयंती | भारत सरकार एवं राष्ट्रीय विकास प्रेस विज्ञप्ति आधारित


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