पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर देश का नमन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा— “शास्त्री जी की सादगी और राष्ट्र-समर्पण आज भी गहरा प्रभाव छोड़ते हैं”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपने संदेश के माध्यम से देशवासियों की ओर से भारत के दूसरे प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने शास्त्री जी के आदर्शों और दृढ़ इच्छाशक्ति को याद करते हुए लिखा कि उनका सौम्य व्यक्तित्व हर भारतीय को गर्व से भर देता है, जबकि राष्ट्र-हित के निर्णयों में उनका संकल्प चट्टान की तरह मजबूत था।
“Homage to Lal Bahadur Shastri Ji, whose simplicity and dedication to the nation remain deeply inspiring.”
(लाल बहादुर शास्त्री जी को नमन, जिनकी सादगी और देश के प्रति समर्पण आज भी हम सभी के लिए अत्यंत प्रेरणादायी है।)
पीएम मोदी का संदेश: “विनम्रता में समाहित दृढ़ता का प्रतीक”
प्रधानमंत्री ने शास्त्री जी के बहुआयामी व्यक्तित्व का स्मरण करते हुए कहा कि लाल बहादुर शास्त्री जी एक ऐसे व्यक्तित्व के स्वामी थे जिन्होंने यह सिद्ध किया कि विनम्रता का अर्थ कमजोरी नहीं होता। उनका सौम्य और सरल स्वभाव हर नागरिक के दिल में उनके प्रति गहरी श्रद्धा उत्पन्न करता है, वहीं जब देश के सामने चुनौतियां आईं, तो उनके निर्णय चट्टान की तरह अटल और कठोर साबित हुए।
पीएम मोदी ने कहा कि शास्त्री जी की जीवन-शैली, उनका विचार प्रवाह और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनका निस्वार्थ दृष्टिकोण भारत की आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव एक मार्गदर्शक प्रकाशपुंज बना रहेगा। उन्होंने जिस तरह से कठिन समय में देश का नेतृत्व किया, वह भारत के प्रशासनिक और राजनीतिक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है।
जयंती के अवसर पर राजघाट और विजय घाट पर श्रद्धांजलि अर्पण
शास्त्री जयंती (2 अक्टूबर) के पावन अवसर पर राजधानी दिल्ली में विभिन्न राजकीय कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल बहादुर शास्त्री के समाधि स्थल ‘विजय घाट’ पहुंचकर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती भी होने के कारण देश भर में राष्ट्र चेतना और सादगी के इस पर्व को बड़े पैमाने पर मनाया जा रहा है।
विजय घाट पर विशेष कार्यक्रम के मुख्य बिंदु:
- पुष्पांजलि अर्पण: प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति, सर्वधर्म प्रार्थना सभा के साथ गणमान्य नेताओं ने विजय घाट पर जाकर शास्त्री जी की स्मृति को नमन किया।
- शास्त्री जी के परिवार से मुलाकात: प्रधानमंत्री ने शास्त्री जी के परिजनों से भेंट कर उनके योगदान को रेखांकित किया।
- सर्वधर्म प्रार्थना: समाधि स्थल पर शास्त्री जी के प्रिय भजनों और देशभक्ति गीतों का गायन किया गया।
लाल बहादुर शास्त्री: सादगी, ईमानदारी और अदम्य साहस का दूसरा नाम
लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। एक बेहद साधारण परिवार में जन्मे शास्त्री जी का शुरुआती जीवन अत्यंत संघर्षपूर्ण रहा। उन्होंने कठिनाइयों के बीच शिक्षा प्राप्त की और देश के स्वतंत्रता संग्राम में पूरी निष्ठा के साथ कूद पड़े। महात्मा गांधी और पुरुषोत्तम दास टंडन जैसे महान नेताओं से प्रभावित होकर उन्होंने अपना जीवन राष्ट्र सेवा में समर्पित कर दिया।
शास्त्री जी भारत के स्वतंत्रता संग्राम के उन प्रमुख सेनानियों में से थे, जिन्होंने अहिंसा और दृढ़ संकल्प के बल पर ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिला दी थी। स्वतंत्रता के पश्चात उन्होंने भारत सरकार में रेल मंत्री, गृह मंत्री और अंततः भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में देश का कुशल नेतृत्व किया।
‘जय जवान, जय किसान’: एक नारा जिसने देश की दिशा बदल दी
जब 1964 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद शास्त्री जी ने देश के प्रधानमंत्री पद की कमान संभाली, तब भारत कई गंभीर संकटों से जूझ रहा था। एक तरफ देश भीषण खाद्यान्न संकट (अनाज की कमी) का सामना कर रहा था, तो दूसरी तरफ 1965 में पाकिस्तान ने भारत पर युद्ध थोप दिया।
ऐसे अभूतपूर्व संकट काल में शास्त्री जी ने देश को ऐतिहासिक नारा दिया:
“जय जवान, जय किसान”
यह केवल एक नारा नहीं था, बल्कि यह भारत के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों—देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिक और देशवासियों का पेट भरने वाले किसान—को सम्मान देने और उनका मनोबल बढ़ाने का एक राष्ट्रव्यापी अभियान था।
1. भारत-पाक युद्ध (1965) में चट्टान सा नेतृत्व
1965 के युद्ध के दौरान जब पाकिस्तान ने भारत की सीमाओं का अतिक्रमण करने का प्रयास किया, तब शास्त्री जी ने भारतीय सेना को पूरी छूट दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। उनके इस दृढ़ फैसले के परिणामस्वरूप भारतीय सेना ने लाहौर तक पहुंच बनाकर पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। उनकी इस रणनीतिक और साहसी नेतृत्व क्षमता ने साबित कर दिया कि उनका संकल्प सचमुच चट्टान जैसा मजबूत था।
2. हरित क्रांति और श्वेत क्रांति की नींव
खाद्यान्न संकट से निपटने के लिए शास्त्री जी ने देश के किसानों का आह्वान किया। उन्होंने स्वयं सप्ताह में एक दिन का उपवास रखने की शुरुआत की और देशवासियों से भी ऐसा करने की अपील की, ताकि अनाज की बचत हो सके। उनके इस निर्णय को देश की जनता ने सिर-आंखों पर लिया। उन्होंने भारत में ‘हरित क्रांति’ (Green Revolution) और अमूल के माध्यम से ‘श्वेत क्रांति’ (White Revolution) की मजबूत नींव रखी, जिससे आगे चलकर भारत खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बना।
शास्त्री जी के जीवन के प्रेरक प्रसंग: जो उनकी सादगी बयां करते हैं
शास्त्री जी का जीवन इस बात का जीवंत प्रमाण था कि उच्च पदों पर बैठकर भी व्यक्ति कैसे अपनी जड़ों और सादगी से जुड़ा रह सकता है। उनके जीवन के कई ऐसे प्रसंग हैं जो आज के राजनीतिक और सामाजिक जीवन के लिए अनुकरणीय हैं:
| प्रसंग / घटना | शास्त्री जी का निर्णय / व्यवहार | सीख व संदेश |
|---|---|---|
| अरिंतूर रेल दुर्घटना (1956) | रेल मंत्री रहते हुए दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया। | उच्च नैतिक मूल्य और जवाबदेही की मिसाल। |
| सरकारी गाड़ी का व्यक्तिगत उपयोग | जब उनके बेटे ने कुछ दूरी के लिए सरकारी कार का इस्तेमाल किया, तो शास्त्री जी ने सरकारी खाते में उतने किलोमीटर का निजी भुगतान जमा करवाया। | सार्वजनिक संपत्ति का पूर्ण ईमानदारी से रखरखाव। |
| बैंक लोन से फिएट कार खरीदना | प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उनके पास अपनी कार नहीं थी। उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक से 5,000 रुपये का ऋण लेकर कार खरीदी। | सादगी, ईमानदारी और सीमित संसाधनों में जीने की कला। |
| खाद्यान्न बचत की पहल | देश में अनाज की कमी होने पर पहले अपने घर में चूल्हा जलना बंद कराया, फिर देशवासियों से अपील की। | “जो कहो, पहले खुद करके दिखाओ” की नेतृत्व शैली। |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शास्त्री जी के सपनों का भारत
अपने संबोधन और विभिन्न मंचों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर शास्त्री जी के विचारों और उनके योगदान का उल्लेख करते रहते हैं। केंद्र सरकार द्वारा शास्त्री जी के विजन को आधुनिक भारत में साकार करने के लिए कई नीतियां चलाई जा रही हैं:
- ‘जय जवान, जय किसान’ से ‘जय विज्ञान’ और ‘जय अनुसंधान’: अटल बिहारी वाजपेयी ने शास्त्री जी के नारे में ‘जय विज्ञान’ जोड़ा था, जिसे पीएम मोदी ने आधुनिक समय में विस्तार देते हुए ‘जय अनुसंधान’ का नाम दिया है, ताकि भारत इनोवेशन और तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेता बने।
- कृषि और किसान कल्याण: पीएम-किसान सम्मान निधि, प्राकृतिक खेती और कृषि अवसंरचना कोष के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाना शास्त्री जी के ‘जय किसान’ के संकल्प को मजबूत करता है।
- सैन्य आत्मनिर्भरता (रक्षा में मेक इन इंडिया): शास्त्री जी ने 1965 में सेना को जो बल और स्वतंत्रता दी थी, उसी राह पर चलते हुए आज भारत रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर’ बन रहा है और स्वदेशी हथियारों का निर्माण कर रहा है।
लाल बहादुर शास्त्री जी भले ही भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनकी सत्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति उनका निस्वार्थ समर्पण हर भारतीय के हृदय में अमर है। जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में रेखांकित किया है, उनकी सादगी और राष्ट्रनिष्ठा आने वाले युगों-युगों तक भारतवर्ष का मार्गदर्शन करती रहेगी।
आज शास्त्री जयंती के अवसर पर प्रत्येक देशवासी का यह दायित्व है कि वह शास्त्री जी के दिखाए सत्य, निष्ठा, सादगी और ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ के मार्ग पर चलने का संकल्प ले। भारत माता के इस अमर सपूत को संपूर्ण राष्ट्र का शत-शत नमन!














