दुर्ग के अंजोरा स्थित दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय में भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद के बीच राजभवन ने हस्तक्षेप किया है। राज्यपाल सचिवालय की ओर से 1 अक्टूबर को जारी आदेश में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक पदों पर भर्ती, नियुक्ति और साक्षात्कार की पूरी प्रक्रिया को अगले आदेश तक तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है।
इसके साथ ही विश्वविद्यालय के भवन निर्माण और रखरखाव कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रही जांच की प्रगति का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्यपाल ने शिकायतों का लिया संज्ञान
राज्यपाल के उप सचिव निषिध साहू की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, विश्वविद्यालय में भवनों के निर्माण एवं रखरखाव और शैक्षणिक पदों पर भर्ती में अनियमितता और भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतें मिली थीं। राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने इन शिकायतों का संज्ञान लेते हुए जांच की प्रगति का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
मंत्री ने भी भर्ती रोकने के दिए थे निर्देश
इससे पहले कृषि विकास, किसान कल्याण एवं पशुधन विकास मंत्री रामविचार नेताम की नोटशीट सामने आई थी। इसमें विश्वविद्यालय की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों की उच्चस्तरीय जांच कराने और जांच पूरी होने तक आगामी भर्ती प्रक्रिया स्थगित रखने के निर्देश दिए गए थे।
शिकायतों में वेतन संरक्षण, स्थानीय शिक्षकों की पदोन्नति, आरक्षण और रोस्टर निर्धारण, पहले से तय रोस्टर में बदलाव, बैकलॉग पदों पर भर्ती और विभागवार पदों के निर्धारण जैसे मुद्दे शामिल थे। इसके अलावा कार्यकारिणी परिषद का अनुमोदन लिए बिना भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने और स्वीकृत सेटअप से अधिक पदों के लिए विज्ञापन जारी करने के आरोप भी लगाए गए थे।
विधायक ने राज्यपाल को लिखा था पत्र
इस मामले में स्थानीय विधायक ने 19 अगस्त 2026 को राज्यपाल को पत्र भेजकर भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। पत्र में विधानसभा क्षेत्र के युवाओं और अन्य लोगों से मिली शिकायतों का हवाला देते हुए भर्ती प्रक्रिया राज्य लोक सेवा आयोग या किसी अन्य प्रदेश स्तरीय एजेंसी के माध्यम से कराने का अनुरोध किया गया था।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर क्यों हुआ विवाद?
दुर्ग जिले के अंजोरा स्थित कामधेनु विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर भर्ती को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद विवाद बढ़ा। शिकायतकर्ताओं ने भर्ती में आरक्षण और रोस्टर के पालन, बैकलॉग पदों, स्थानीय शिक्षकों की पदोन्नति और वेतन संरक्षण जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए थे।
इसके अलावा स्वीकृत पदों की संख्या से अधिक पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी करने और कार्यकारिणी परिषद की मंजूरी नहीं लेने संबंधी आरोप भी लगाए गए थे। इन शिकायतों के बाद मंत्री ने उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए थे।
अब राजभवन के आदेश के बाद शैक्षणिक पदों पर भर्ती, नियुक्ति और साक्षात्कार की प्रक्रिया अगले आदेश तक रोक दी गई है। शिकायतों में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से होगी।













