आज का पंचांग: तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहुकाल एवं दैनिक ग्रह स्थिति
वैदिक ज्योतिष के अनुसार पंचांग काल-गणना का एक प्राचीन और अत्यंत सटीक माध्यम है। तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण—इन पाँच मुख्य अंगों से मिलकर पंचांग का निर्माण होता है। किसी भी मांगलिक या नए कार्य को शुरू करने से पहले पंचांग के माध्यम से शुभ और अशुभ समय का ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
1. आज के सूर्योदय एवं चंद्रोदय का समय
ग्रह-नक्षत्रों के प्रभाव और समय-गणना के लिए सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय एवं चंद्रास्त का विशेष महत्व होता है। स्थान भेद के अनुसार इन समयों में आंशिक अंतर आ सकता है।
| घटना / स्थिति | समय / मान |
|---|---|
| सूर्योदय (Sunrise) | प्रातः 06:19 AM |
| सूर्यास्त (Sunset) | सायं 05:54 PM |
| चंद्रोदय (Moonrise) | प्रातः 07:45 AM |
| चंद्रास्त (Moonset) | सायं 06:30 PM |
| सूर्य राशि | कन्या राशि |
| चंद्र राशि | तुला राशि |
| ऋतु (Season) | शरद ऋतु |
| अयन (Ayana) | दक्षिणायन |
2. पंचांग के मुख्य पाँच अंग (Panchang Angles)
पंचांग का अर्थ ही ‘पाँच अंग’ है। इनके बिना किसी भी दिन की ज्योतिषीय स्थिति पूर्ण नहीं होती। आज के मुख्य पंचांगीय घटक इस प्रकार हैं:
| पंचांग अंग | विवरण |
|---|---|
| तिथि (Tithi) | द्वितीया तिथि (आश्विन शुक्ल पक्ष) |
| वार (Day) | सोमवार (Lorded by Chandra / Moon) |
| नक्षत्र (Nakshatra) | स्वाति नक्षत्र (रात्रि 11:52 PM तक, तत्पश्चात विशाखा) |
| योग (Yoga) | विष्कुम्भ योग (रात्रि 08:31 PM तक, तत्पश्चात प्रीति योग) |
| करण (Karana) | बालव (प्रातः 09:49 AM तक), तत्पश्चात कौलव (रात्रि 10:14 PM तक) |
3. हिन्दू मास एवं संवत्सर (Calendar & Samvat)
भारतीय काल-गणना में विक्रम संवत और शक संवत का उपयोग किया जाता है। धार्मिक अनुष्ठानों और पर्वों की तिथियाँ इन्हीं पर आधारित होती हैं।
| संवत्सर / मास | विवरण |
|---|---|
| विक्रम संवत | 2083 |
| शक संवत | 1948 (पराभव) |
| कली संवत | 5127 |
| मास (अमांत) | आश्विन मास |
| मास (पूर्णिमांत) | आश्विन मास |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष (Shukla Paksha) |
4. आज के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
शुभ मुहूर्त वह समय-अवधि है जिसमें शुरू किया गया कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य सफलता के उच्च योग प्रदान करता है।
| शुभ काल / मुहूर्त | समय सीमा | महत्व / उपयोग |
|---|---|---|
| अभिजीत मुहूर्त | प्रातः 11:44 AM से दोपहर 12:30 PM | सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त, इसमें शुरू किया गया कार्य सफल होता है। |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02:03 PM से दोपहर 02:49 PM | विजय प्राप्त करने, मुकदमे या प्रतियोगिता के लिए शुभ। |
| गोधूलि मुहूर्त | सायं 05:54 PM से सायं 06:18 PM | संध्या कालीन पूजा और शांति पाठ के लिए उत्तम। |
| अमृत काल | दोपहर 02:15 PM से दोपहर 03:55 PM | शुभ कार्यों और नए सौदों के लिए अनुकूल। |
| ब्रह्म मुहूर्त | प्रातः 04:42 AM से प्रातः 05:31 AM | ध्यान, अध्ययन और साधना के लिए सर्वोत्तम समय। |
5. आज के अशुभ मुहूर्त एवं वर्जित समय (Inauspicious Timings)
शास्त्रों के अनुसार राहुकाल और वर्जित मुहूर्तों में नया व्यापार, गृह प्रवेश, खरीदारी या यात्रा का शुभारंभ करने से बचना चाहिए।
| अशुभ काल | समय सीमा |
|---|---|
| राहु काल (Rahu Kaal) | प्रातः 07:46 AM से प्रातः 09:13 AM |
| यमगंड (Yamaganda) | दोपहर 10:40 AM से दोपहर 12:07 PM |
| गुलिक काल (Gulika Kaal) | दोपहर 01:34 PM से दोपहर 03:01 PM |
| दुर्मुहूर्त (Dur Muhurat) | दोपहर 12:30 PM से दोपहर 01:16 PM |
| वर्ज्यम (Varjyam) | प्रातः 05:12 AM से प्रातः 06:50 AM |
6. दिशा शूल एवं निवारण उपाय (Disha Shool)
आज का दिशा शूल: पूर्व दिशा (East Direction)
यदि आज आपको पूर्व दिशा में यात्रा करना अनिवार्य हो, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यात्रा पर निकलने से पहले थोड़ा सा दही या शीशा देखकर घर से निकलना शुभ माना जाता है। इससे यात्रा का दोष समाप्त होता है।
7. पंचांग के पाँच अंगों की विस्तृत व्याख्या
1. तिथि (Tithi)
सूर्य और चंद्रमा के बीच के कोणीय अंतर को तिथि कहा जाता है। एक शुक्ल पक्ष में 15 और कृष्ण पक्ष में 15 तिथियाँ होती हैं। आज शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है, जो देवी-देवताओं के पूजन और शुभ संकल्पों के लिए उत्तम मानी गई है।
2. नक्षत्र (Nakshatra)
आकाशमंडल को 27 भागों में विभाजित किया गया है, जिन्हें नक्षत्र कहते हैं। आज स्वाति नक्षत्र प्रभाव में रहेगा। स्वाति नक्षत्र का स्वामी राहु ग्रह और अधिष्ठाता देवता वायु हैं। इस नक्षत्र में जन्मी संतान स्वतंत्र विचारों वाली और कला-प्रेमी होती है।
3. योग (Yoga)
सूर्य और चंद्रमा के देशांतर के जोड़ से 27 योग बनते हैं। आज विष्कुम्भ योग रहेगा। विष्कुम्भ योग में किसी भी प्रकार के स्थायी कार्य की शुरुआत सोच-समझकर करनी चाहिए, हालांकि इसके बाद आने वाला प्रीति योग अत्यंत शुभ फलदायक होता है।
4. करण (Karana)
एक तिथि में दो करण होते हैं। आज प्रथम प्रहर में बालव करण और द्वितीय प्रहर में कौलव करण रहेगा। कौलव करण मित्रता, समझौता और सामाजिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
5. वार (Day)
आज सोमवार का दिन है। यह दिन भगवान शिव और चंद्र ग्रह को समर्पित है। इस दिन चंद्र देव की उपासना से मन को शांति मिलती है और मानसिक तनाव दूर होता है।
8. आज का विशेष ज्योतिषीय उपाय (Today’s Remedies)
सोमवार के दिन निम्नलिखित उपाय करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और जीवन में समृद्धि आती है:
- भगवान शिवलिंग पर जल अर्पित करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
- चंद्रमा की कृपा प्राप्त करने के लिए दूध, चावल या श्वेत वस्त्रों का दान करें।
- माता या घर की बुजुर्ग महिलाओं का आशीर्वाद लें, इससे मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है।
















