मौसम विभाग की चेतावनी के बाद बिलासपुर में चक्रवात के संभावित असर और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए नगर निगम ने आपात तैयारियों का दावा किया है। 27 से 29 अक्टूबर तक निगम प्रशासन ने अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट रहने निर्देश दिए हैं। जलभराव, पेड़ गिरने, बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त होने और निचले इलाकों में पानी भरने जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए विभागवार जिम्मेदारी तय की गई है।
निगम ने 17 मुख्य अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। इनमें 2 नोडल अधिकारी और सभी 8 जोनों के कमिश्नर शामिल हैं। बंगाल की खाड़ी में संभावित चक्रवाती तूफान के खतरे को देखते हुए जिले में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। खराब मौसम, तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका के बीच प्रशासन ने मैदानी अमले को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
वहीं, जिले में संभावित आंधी-तूफान और तेज बारिश के साथ ही बाढ़ के खतरे को देखते हुए राहत-बचाव की तैयारियां तेज करने का दावा किया गया है। संवेदनशील यानी कि शहर और आसपास के गांवों के निचलते इलाकों में लोगों को सतर्क किया जा रहा है, जबकि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और नगर सेना की टीमों को आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखने का दावा किया गया है।
नगर निगम का दावा-3 दिन 24 घंटे चलेगा नियंत्रण कक्ष
निगम आयुक्त ने अपर आयुक्त खजांची कुम्हार और अधीक्षण अभियंता एसपी साहू को संयुक्त रूप से नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। सभी जोन कमिश्नरों को अपने क्षेत्रों में मुनादी कराने, जलभराव और बाढ़ की आशंका वाले निचले इलाकों को चिह्नित करने तथा राहत एवं बचाव के लिए कर्मचारियों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
बारिश के दौरान सड़कों पर पेड़ गिरने की स्थिति में उन्हें तत्काल हटाने के लिए उद्यान विभाग की टीम तैयार रहेगी। बिजली के खंभे और स्ट्रीट लाइट क्षतिग्रस्त होने पर विद्युत विभाग मरम्मत करेगा। वहीं, पेयजल आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में टैंकरों की व्यवस्था और सफाई बनाए रखने की जिम्मेदारी भी संबंधित विभागों को दी गई है। होर्डिंग्स से होने वाले संभावित खतरे को देखते हुए भी आवश्यक सुरक्षा उपाय करने के निर्देश हैं। राहत कार्यों के लिए जेसीबी और डंपर जैसे उपकरण तैयार रखे जाएंगे।

















