पंजाब में नशे और माफियाराज पर कांग्रेस का बड़ा हमला: संगरूर इंसाफ रैली से मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी का राजनीतिक शंखनाद
संगरूर / नई दिल्ली: पंजाब की सियासत में नशे के संगठित जाल और बेलगाम माफियाराज का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र बिंदु बन गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व—पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी—ने संगरूर जिले के फागुवाला गांव में आयोजित विशाल ‘इंसाफ रैली’ के दौरान राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला। इस रैली से इतर दोनों नेताओं ने पंजाब के उन पीड़ित परिवारों से आत्मीय मुलाकात की, जिन्होंने नशे (चिट्टा) की लत या माफिया की गोलियों के कारण अपने बच्चों और प्रियजनों को खो दिया है ।
पार्टी के आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि पंजाब में शासन तंत्र की विफलता के कारण आम नागरिक भारी कीमत चुका रहे हैं। कांग्रेस ने संकल्प दोहराया कि राज्य में पार्टी की सरकार बनते ही नशे के इस संगठित व्यापार और माफिया नेटवर्क को जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा।
पीड़ित परिवारों की आपबीती: आंसुओं में झलका पंजाब का सच
इंसाफ रैली के दौरान मंच के पीछे और विशेष संवाद सत्र में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने कई ऐसे परिवारों के साथ समय बिताया, जिनकी जिंदगी नशे और हिंसा ने हमेशा के लिए तबाह कर दी है। मुलाकात में शामिल प्रमुख मामलों ने राज्य की भयावह स्थिति को रेखांकित किया:
- सुखविंदर सिंह कालकत्ता का परिवार: बरनाला जिले के सहना गांव में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दिए गए सुखविंदर सिंह के परिजनों ने नेताओं को अपनी व्यथा सुनाई। परिवार ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है और अपराधियों में पुलिस का कोई खौफ नहीं रह गया है।
- गुरमेल सिंह तूट का परिवार: तरनतारन जिले के पट्टी में माफिया और अपराधियों के शिकार हुए कांग्रेस नेता व पूर्व सरपंच गुरमेल सिंह तूट के परिवार ने भी निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग उठाई।
- प्रकाश चंद (बठिंडा): नशे के सामाजिक और आर्थिक विनाश का सबसे दर्दनाक रूप बठिंडा के प्रकाश चंद के मामले में दिखा। उन्होंने भारी मन से बताया कि उन्होंने अपने बेटे की ‘चिट्टे’ (सिंथेटिक ड्रग्स) की लत का इलाज कराने और उसे बचाने के चक्कर में अपनी जीवन भर की कमाई और जमीन-जायदाद तक बेच दी। परिवार ने बेटे के पुनर्वास और अपनी पोतियों की शिक्षा के लिए मदद की गुहार लगाई।
- तेहल सिंह का दोहरा आघात: नशे की महामारी की विभीषिका तेहल सिंह के घर में साफ दिखी, जिन्होंने ड्रग्स की ओवरडोज और लत के कारण अपने दोनों बेटों को एक-एक करके खो दिया।
सिद्धू मूसेवाला के पिता को मंच पर बुलाकर राहुल गांधी का भावुक संबोधन
रैली के दौरान एक भावुक क्षण तब आया जब राहुल गांधी ने मशहूर दिवंगत पंजाबी गायक शुभदीप सिंह सिद्धू (सिद्धू मूसेवाला) के पिता बलकौर सिंह सिद्धू को अपने पास मंच पर बुलाया। 29 मई 2022 को मानसा जिले में मूसेवाला की हुई जघन्य हत्या का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि आज पंजाब में बेखौफ होकर सरेआम गोलियां चलाना एक खतरनाक प्रवृत्ति बन गई है। जो लोग पंजाब की आवाज को आगे ले जाना चाहते हैं, उन्हें चुप कराया जा रहा है। बलकौर सिंह ने भी संकट के समय लगातार साथ खड़े रहने के लिए कांग्रेस नेतृत्व का धन्यवाद व्यक्त किया ।
पंजाब में नशे का संकट: एक गहराता सामाजिक और आर्थिक नासूर
पंजाब में नशे की समस्या कोई नई नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ‘चिट्टा’ (हेरोइन और केमिकल ड्रग्स का स्थानीय नाम) और प्रतिबंधित फार्मास्युटिकल दवाओं के बढ़ते प्रचलन ने स्थिति को अत्यधिक विस्फोटक बना दिया है। राज्य के मालवा, माझा और दोआबा तीनों क्षेत्रों में युवा आबादी इसका तेजी से शिकार हो रही है।
विशेषज्ञों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, सीमा पार से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी और राज्य में मौजूद स्थानीय माफिया-तस्कर सांठगांठ ने इस व्यापार को बहु-करोड़ी उद्योग में बदल दिया है। इसका सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था, कानून व्यवस्था और जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) पर पड़ रहा है। खेत बेचकर बेटों का इलाज कराने या फिर असमय उन्हें खो देने वाले हजारों परिवार आज न्याय और सरकारी सहायता की आस लगाए बैठे हैं।
राजनीतिक निहितार्थ और कांग्रेस की रणनीति
संगरूर की इंसाफ रैली और पीड़ित परिवारों से शीर्ष नेतृत्व की यह मुलाकात महज एक संवेदना बैठक नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी की सुविचारित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है:
- सत्तारूढ़ ‘आप’ सरकार पर घेराबंदी: आम आदमी पार्टी (AAP) ने चुनाव से पूर्व पंजाब को नशा मुक्त करने और माफियाराज खत्म
Ashish Sinha
Website: https://pradeshkhabar.in














