‘छठ महापर्व के गीतों में उनकी मधुर आवाज ने करोड़ों की आस्था को दिया स्वर’: डॉ. शारदा सिन्हा की पुण्यतिथि पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर कर ‘बिहार कोकिला’ पद्म विभूषण डॉ. शारदा सिन्हा को याद किया। उन्होंने लोक संगीत, मैथिली, भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा के संवर्धन में उनके अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- सीएम योगी का भावुक संदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. शारदा सिन्हा की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करते हुए उनके गीतों के अमर प्रभाव का उल्लेख किया।
- लोक आस्था का स्वर: छठ पूजा के गीतों में शारदा सिन्हा की सुरमयी आवाज ने देश-विदेश में बसे करोड़ों श्रद्धालुओं की भक्ति और सांस्कृतिक पहचान को नया रूप दिया।
- लोक बोलियों का सम्मान: भोजपुरी, मैथिली, मगही और अंगिका भाषा को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में उनकी ऐतिहासिक भूमिका रही।
लखनऊ / पटना: लोक आस्था के महापर्व छठ और भारतीय लोक संगीत की अमूल्य धरोहर ‘पद्म विभूषण’ स्वर्गीय डॉ. शारदा सिन्हा की पुण्यतिथि के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है। सीएम योगी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल X (पूर्व में ट्विटर) पर एक संवेगात्मक संदेश साझा करते हुए कहा कि उनके सुर और उनके गीत हमेशा हर भारतवासी के हृदय में जीवित रहेंगे।
“महान लोक गायिका, ‘पद्म विभूषण’ डॉ. शारदा सिन्हा की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। छठ महापर्व के गीतों में उनकी मधुर आवाज ने करोड़ों लोगों की आस्था को स्वर दिया। भोजपुरी, मैथिली, अंगिका व मगही लोक संगीत को लोकप्रिय बनाने और उसे नई पहचान दिलाने में उनका योगदान अतुलनीय है। अपने गीतों के माध्यम से हम सभी के बीच वह हमेशा उपस्थित रहेंगी।”
छठ महापर्व और शारदा सिन्हा: एक अटूट सांस्कृतिक संबंध
भारतीय समाज में, विशेषकर पूर्वांचल, बिहार और झारखंड में छठ पूजा का पर्व बिना शारदा सिन्हा के गीतों के अधूरा माना जाता है। कार्तिक मास के आगमन के साथ ही जब घाटों पर ‘केलवा के पात पर उगलेन सूरज देव’ और ‘पहिले पहिल हम कईनी छठ मईया व्रत तोहार’ जैसे कालजयी गीत गूंजते हैं, तो पूरा वातावरण छठी मैया की भक्ति में सराबोर हो जाता है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसी अलौकिक प्रभाव को याद करते हुए कहा कि शारदा सिन्हा की आवाज ने केवल गानों को जन्म नहीं दिया, बल्कि करोड़ों लोगों की अंतरात्मा की आस्था को स्वर प्रदान किया है।
क्षेत्रीय लोक भाषाओं का वैश्विक फलक पर संवर्धन
डॉ. शारदा सिन्हा केवल एक गायिका नहीं थीं; वे मैथिली, भोजपुरी, मगही और अंगिका की सांस्कृतिक राजदूत थीं। उन्होंने भारतीय लोक संगीत को शास्त्रीय अनुशासन और मिठास के साथ जोड़कर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाया। उन्होंने इन लोक बोलियों को एक नया सम्मान और पहचान दी।
हिंदी फिल्मों जैसे ‘मैंने प्यार किया’ (कहे तोसे सजना) और ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ (तार बिजली से पतले हमारे पिया) में भी उनके द्वारा गाए गए गीतों ने यह साबित किया कि पारंपरिक लोक कला में आधुनिक संगीत जगत को मंत्रमुग्ध करने की अपार क्षमता है।
पद्म विभूषण तक का स्वर्णिम सफर
संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘पद्म श्री’ और बाद में ‘पद्म विभूषण’ से अलंकृत किया गया था। उनकी गायकी में मिट्टी की खुशबू और ग्रामीण भारत की सहजता समाहित थी।
आज भले ही वे भौतिक रूप से हमारे बीच उपस्थित नहीं हैं, लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ के शब्दों में, वे अपने गीतों की अमूल्य विरासत के माध्यम से हर उस घर में हमेशा मौजूद रहेंगी जहाँ-जहाँ लोक संस्कृति और छठी मैया की पूजा की जाती है।














