कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मंजूरी पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मिलकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने जताया आभार
रायपुर। छत्तीसगढ़ के लाखों शासकीय सेवकों और उनके आश्रित परिजनों के हित में राज्य सरकार द्वारा एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। प्रदेश के सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और उनके परिजनों के लिए मंत्रिपरिषद द्वारा कैशलेस चिकित्सा सुविधा (Cashless Medical Facility) को मंजूरी दिए जाने के बाद राज्य भर के शासकीय कर्मचारियों में भारी उत्साह और खुशी का माहौल है।
इस ऐतिहासिक फैसले के परिप्रेक्ष्य में छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री निवास पहुंचकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के शासकीय सेवकों की दशकों पुरानी और अत्यंत संवेदनशील मांग को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया तथा धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर फेडरेशन की ओर से मुख्यमंत्री को आगामी अभिनंदन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित भी किया गया।
प्रमुख बिंदु: कर्मचारियों के लिए क्यों ऐतिहासिक है यह निर्णय?
- अग्रिम वित्तीय व्यवस्था से मुक्ति: अब इलाज के लिए तत्काल बड़ी धनराशि जुटाने की मजबूरी नहीं रहेगी।
- कागजी प्रक्रियाओं से राहत: अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद मेडिकल रीइम्बर्समेंट (चिकित्सा प्रतिपूर्ति) के जटिल बिल पास कराने की आवश्यकता समाप्त होगी।
- आपातकालीन सुरक्षा: गंभीर बीमारी या अचानक दुर्घटना की स्थिति में बिना किसी वित्तीय रुकावट के तुरंत गुणवत्तापूर्ण इलाज सुनिश्चित होगा।
- व्यापक दायरा: इस सुविधा का प्रत्यक्ष लाभ प्रदेश के लाखों नियमित अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ-साथ उनके आश्रित परिजनों को भी प्राप्त होगा।
लंबी लड़ाई और बहुप्रतीक्षित मांग की हुई पूर्ति
मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के साथ विस्तृत चर्चा की। कमल वर्मा ने कहा कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही सबसे प्रमुख मांगों में से एक थी। पहले किसी भी गंभीर बीमारी अथवा आपातकालीन स्थिति में कर्मचारी को सबसे पहले अपने निजी संसाधनों या कर्ज के माध्यम से बड़ी रकम जुटाकर अस्पताल में जमा करनी पड़ती थी।
उपचार पूरा होने के बाद फाइल तैयार कर विभागों के चक्कर काटने और लंबी चिकित्सा प्रतिपूर्ति प्रक्रिया (Medical Reimbursement Process) से गुजरना पड़ता था, जिसमें महीनों लग जाते थे। कई बार आर्थिक तंगी के कारण समय पर बेहतर इलाज न मिल पाने से कर्मचारियों को भारी मानसिक एवं शारीरिक कष्ट झेलना पड़ता था। मंत्रिपरिषद द्वारा कैशलेस इलाज की व्यवस्था को मंजूरी दिए जाने से यह पूरी व्यवस्था पारदर्शी, त्वरित और सुलभ हो जाएगी।
स्वास्थ्य सुरक्षा और सामाजिक संबल का मजबूत आधार
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य सरकार शासकीय सेवकों के हितों और उनके कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था के सुचारू संचालन में अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। कर्मचारियों को स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से मुक्त रखना और उनके परिजनों को बेहतर चिकित्सा सुरक्षा प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है।
इस फैसले से न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि वे पूरी निष्ठा और निश्चिंतता के साथ अपनी सेवाएं राज्य के नागरिकों को दे सकेंगे। राज्य सरकार का यह कदम प्रदेश में सुशासन और कर्मचारी कल्याण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति
मुख्यमंत्री निवास में आयोजित इस सौजन्य मुलाकात के अवसर पर छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा के साथ फेडरेशन के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे:
- पंकज पाण्डेय
- सत्येंद्र देवांगन
- अश्वनी चेलक
- जय कुमार साहू
- पीताम्बर पटेल
- आलोक मिश्रा
- संतोष कुमार वर्मा
उपस्थित सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के इस कर्मचारी-हितैषी निर्णय की सराहना की और पूरी निष्ठा के साथ राज्य के विकास में अपना योगदान देने का संकल्प व्यक्त किया।













