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फसलों में होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए कृषकों को समसामयिक सलाह

फसलों में होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए कृषकों को समसामयिक सलाह

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रायगढ़, 4 अक्टूबर2021धान हमारे अंचल की प्रमुख फसल है। इसमें ब्लास्ट, शीथ ब्लाइट जीवाणु जनित झुलसा रोग का प्रकोप हो सकता है। किसान थोड़ी सावधानी बरतें तो इसके नुकसान से बचाव हो सकता है। झुलसा बीमारी में पत्ती पर नाव के आकार के धब्बे बन जाते हैं इसके रोकथाम के लिए किसान को ट्राईसाईक्लाज़ोल 6 ग्राम 10 लीटर पानी के हिसाब से या कासुगामाईसिन 1 मिलीलीटर मात्रा 1 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। दूसरी जो प्रमुख बीमारी है वह शीथ ब्लाइट, पर्णछंद या अंगमारी है, इस रोग में पत्तों पर स्लेटी रंग के धब्बे बन जाते हैं एवं पौधों में सडऩ हो जाती है। इसकी रोकथाम के लिए वेलिडामाईसीन 1 मिली मात्रा 1 लीटर पानी के हिसाब से या ट्राइफ्लुजामाइड 1 मिली मात्र 1 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। तीसरी बीमारी है जीवाणु जनित झुलसा रोग, जिसमें पत्तियां ऊपर से नीचे की तरफ झुलस जाती हैं। इसकी रोकथाम के लिए किसान भाई पोटाश 10 किलोग्राम मात्रा 1 एकड़ के हिसाब से अतिरिक्त या 400 ग्राम मात्रा कॉपर ऑसीक्लोराईड एवं 37 ग्राम मात्रा स्ट्रेप्टोसाईक्लिन का छिड़काव करें। हल्दी की पत्ती में दो तरह की बीमारी आती हैं अभी के समय में हल्दी में जो बीमारी आती है उसे कोलेटोट्राइकम पत्ती धब्बा बीमारी कहते हैं, इसमें पत्तों पर बड़े-बड़े और चौड़े भूरे रंग के धब्बे होते हैं। छोटे जो है सुई के नोक आकार की छोटी-छोटी संरचना दिखाई देती है। इसके लिए किसान भाई कार्बेडाजिम और मैनकोजेब की 1 ग्राम मात्रा 1 लीटर पानी के हिसाब से पंद्रह दिनों के अंतराल में दो बार छिड़काव करना चाहिए। अदरक की फसल में कहीं-कहीं पर किसानों के खेत में प्रकंद सडऩ बीमारी दिखाई दे रही है उसमें प्रकंद को निकाल कर फेंक दें और वहां पर कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 3 ग्राम मात्रा 1 लीटर पानी की मात्रा के हिसाब से पौधों के पास में दें एवं मेटालक्सिल एवं मेंकोजेब 125 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी के हिसाब से जड़ों में दें। धूप की अवस्था में अदरक की फसल में यूरिया प्रयोग कदापि ना करें। वर्मी कम्पोस्ट को धान की फसल में तीन बार आधारीय अवस्था अधिकतम कसा अवस्था एवं बाली निकलने की अवस्था में दिया जा सकता है। लेकिन खेत में नमी होनी चाहिए।

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