कोरिया : शासन की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना का जिले में हुआ विस्तार

कोरिया : शासन की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना का जिले में हुआ विस्तार

ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_14_44 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 05_53_50 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_08_26 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_16_13 PM
ChatGPT Image Jul 20, 2026, 06_22_41 PM

1 नवंबर से जिले में 193 नवीन गौठानों में गोबर खरीदी शुरू, अब कुल 329 गौठानों में गोबर खरीदी

66071dc5-2d9e-4236-bea3-b3073018714b
hotal trinetra
gaytri hospital
WhatsApp Image 2026-05-10 at 2.46.41 PM (1)
17a09f88-37fa-496a-8923-b0e0bac9f15d

<>कोरिया 01 नवंबर 2021गौठानों में गोबर खरीदी शुरू राज्य स्थापना दिवस 01 नवम्बर को कलेक्टर श्री श्याम धावड़े के मार्गदर्शन में शासन की महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना को विस्तार देते हुए जिले में 329 गौठानों में गोबर खरीदी शुरू कर दी गयी है। जिले के 136 गौठानों के माध्यम से गोबर ख़रीदी की जा रही है। 01 नवंबर से योजना को विस्तार देते हुए जिले में 193 नवनिर्मित गौठानों में भी गोबर खरीदी शुरू की गई है। अब जिले में कुल 329 गौठानों में गोबर खरीदी शुरू हो गयी है।<>
गांवों के दैनिक जनजीवन को प्रेरणा बनाकर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य शासन ने नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी योजना की शुरुआत की जिसमें भूजल रिचार्जिंग जैसी महत्वपूर्ण अवधारणा शामिल है। इसी योजना को विस्तार देते हुए गोधन न्याय योजना की शुरुआत की गई। योजना के अंतर्गत जिले में किसानों एवं पशु पालकों से गोबर खरीदी की जा रही है।
योजना के तहत किसानों, पशुपालकों और गोबर विक्रेताओं से गोबर खरीदी की जा रही है। कलेक्टर श्री श्याम धावड़े के मार्गदर्शन में जिले में गोधन न्याय योजना का बेहतर क्रियान्वयन किया जा रहा है। आज ग्राम पंचायत भैंसवार, कचार, ग्राम पंचायत बेलबहरा, अकलासराई, शिवपुर, ग्राम पंचायत किशोरी सहित 193 नवीन गौठानों में गोबर खरीदी का शुभारंभ स्थानीय जनप्रतिनिधियों, एवं गौठान समिति की उपस्थिति में किया गया।
गौठानों में क्रय किये गोबर से वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट एवं अन्य उत्पाद का निर्माण किया जा रहा है। गौठानों में ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए विभिन्न आजीविकामूलक गतिविधियां संचालित की जा रही है। चप्पल निर्माण, पोल निर्माण, ट्री गॉर्ड, चौन लिंक फेंसिंग, सब्जी उत्पादन, फ्लाई ऐश ब्रिक्स निर्माण जैसे काम किये जा रहे हैं। इन रोजगार गतिविधियों से जुड़े स्व सहायता समूहों की महिलाएं आमदनी हासिल कर रही हैं।